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कांग्रेस के दाग धोने में जुटा है मीडिया का फर्जी फैक्ट चेक गिरोह

मीडिया में इन दिनों फैक्ट चेक का चलन जोरों पर है। फैक्ट चेक यानी जो खबरें चल रही हैं उनकी सच्चाई की पड़ताल। लेकिन कांग्रेसी मीडिया फैक्ट चेक के बहाने कांग्रेस पार्टी के पुराने कुकर्मों पर परदा डालने में जुटा हुआ है। बीते 3-4 साल में कांग्रेस ने बेरोजगार हो चुके अपने वफादार पत्रकारों से एक दर्जन से ज्यादा न्यूज वेबसाइटें खुलवाई हैं। इन सभी का एक ही काम है कांग्रेस के पक्ष में झूठी खबरें उड़ाना और कांग्रेस के खिलाफ आई किसी भी खबर को झूठा साबित कर देना। इस खेल में नई-नई खुली ढेर सारी वेबसाइटों के अलावा बीबीसी हिंदी, आजतक और नवभारत टाइम्स जैसे संस्थान भी शामिल हैं। ये गिरोह उन फर्जी खबरों का फैक्ट चेक कभी नहीं करता जो कांग्रेस पार्टी की तरफ से बीजेपी नेताओं को बदनाम करने के लिए फैलाई जाती हैं। उदाहरण के तौर पर राहुल गांधी अपनी हर रैली में कहते हैं कि मोदी ने 30 हजार करोड़ रुपये अनिल अंबानी को दे दिए। इस बात का फैक्ट चेक करने की हिम्मत आज तक किसी ने नहीं किया। न्यूज़लूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक ऐसे ज्यादातर तथाकथित फैक्ट चेक पैसे लेकर छापे जा रहे हैं। क्योंकि लोग इन पर अक्सर आसानी से भरोसा भी कर लेते हैं।

फर्जी फैक्ट चेक नंबर-1

लंबे समय से यह जानकारी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध रही है कि 1971 की लड़ाई के दौरान राजीव गांधी और सोनिया गांधी देश छोड़कर इटली चले गए थे। ये वो समय था जब राजीव गांधी इंडियन एयरलाइंस के पायलट हुआ करते थे। जब युद्ध हो रहा था तब राजीव गांधी इकलौते पायलट थे जो छुट्टी पर थे। बीबीसी और दैनिक भास्कर जैसे कांग्रेस-परस्त मीडिया संस्थानों ने इस खबर का फर्जी फैक्ट चेक कर डाला और यह कहना शुरू कर दिया कि “राजीव गांधी इंडियन एयरफोर्स के नहीं, बल्कि इंडियन एयरलाइंस के पायलट थे। सिविल एविएशन में होने के नाते उनका युद्ध से कोई लेना-देना नहीं था।” जबकि यह अर्धसत्य है। वास्तविकता यह है कि युद्ध शुरू होने पर इंडियन एयरलाइंस के सभी पायलटों की छुट्टियां रद्द कर दी गई थीं। क्योंकि सामान पहुंचाने और दूसरी लॉजिस्टिक जरूरतों के लिए उड़ानों की जरूरत पड़ सकती थी। लेकिन राजीव गांधी की छुट्टी रद्द नहीं हुई और वो सोनिया के साथ इटली में अपनी ससुराल में रहे। यानी बीबीसी और दैनिक भास्कर ने यह फैक्ट चेक किया कि वो इंडियन एयरलाइंस के पायलट थे या इंडियन एयरफोर्स के। लेकिन यह जानने की जरूरत नहीं समझी कि युद्ध के दौरान पायलटों की छुट्टियां रद्द हुई थीं या नहीं और अगर रद्द हुई थीं तो राजीव गांधी काम पर क्यों नहीं लौटे थे। यह भी पढ़ें: 1971 की लड़ाई का वो पायलट जो देश छोड़कर भाग गया था

फर्जी फैक्ट चेक नंबर-2

यह बात हमेशा से जानी जाती रही है कि चीन को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता जवाहरलाल नेहरू की अदूरदर्शिता के कारण मिली था। इस बात का जिक्र कांग्रेस नेता और यूएन में उच्च पदों पर रहे शशि थरूर ने अपनी किताब में भी किया है। लेकिन मौलाना मसूद के मामले में जब नेहरू की करतूतों का जिक्र आया तो मीडिया के कांग्रेसियों ने नया झूठ गढ़ दिया कि ये बात गलत है और ऐसा कुछ कभी हुआ ही नहीं। इसके लिए उन्होंने अंबानी के अखबार ‘फर्स्टपोस्ट’ में छपे संदीपन शर्मा नाम के कट्टर कांग्रेसी पत्रकार के लेख को बतौर सबूत पेश किया। जिसमें कुछ फर्जी तथ्यों के आधार पर दावा किया गया था कि तब के अमेरिका के राष्ट्रपति केनेडी ने भारत को कभी सुरक्षा परिषद की सीट ऑफर ही नहीं की। इस लेख का जिक्र कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने किया और फिर इसी को आधार बनाकर आजतक, दैनिक भास्कर, नवभारत टाइम्स जैसे ढेरों कांग्रेसी मीडिया संस्थानों ने सच को झूठा साबित कर दिया। जबकि @trueindology ने ट्विटर पर बाकायदा नेहरू का 2 अगस्त 1955 को मुख्यमंत्रियों को लिखा पत्र जारी कर दिया है जिसमें उन्होंने यह जानकारी दी है कि सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव उन्होंने यह कहते हुए नामंजूर कर दिया है कि यह “चीन जैसे महान देश के लिए नाइंसाफी होगी।”

फर्जी फैक्ट चेक नंबर-3

न्यूज़लूज़ समेत कई समाचार वेबसाइटों ने खबर दी थी कि राजस्थान के कुंभलगढ़ किले में मुसलमानों के इज़्तेमा की तैयारी चल रही है और राजस्थान सरकार ने इसकी मंजूरी दी है। इस पर सोशल मीडिया पर बवाल मचा तो राजस्थान सरकार को सांप सूंघ गया। फौरन इज़्तेमा के आयोजकों से एक लेटर लिखवा लिया गया, जिसमें उन्होंने अपनी तरफ से कार्यक्रम रद्द करने का एलान कर दिया। लेकिन डैमेज कम करने के लिए कांग्रेस ने फिर से फर्जी फैक्ट चेक का सहारा लिया। आजतक समेत कई कांग्रेसी संस्थानों ने यह कहते हुए दावा किया कि कुंभलगढ़ किला ASI के तहत आता है और इसमें ऐसा कोई कार्यक्रम हो ही नहीं सकता। उन्होंने इज़्तेमा की खबरों को ही अफवाह ठहरा दिया और राजस्थान की कांग्रेस सरकार को क्लीनचिट दे दी। जबकि सच यह है कि पूरे इलाके में इज्तेमा के पोस्टर चिपकाए गए थे और उसमें लोगों का पहुंचना शुरू भी हो गया था। अगर राजस्थान सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी थी तो उसे रद्द करने का लिखित फैसला आयोजकों से क्यों लिया गया? इन सारे तथ्यों को कांग्रेस के बिकाऊ मीडिया संस्थानों ने नजरअंदाज कर दिया।

फर्जी फैक्ट चेक नंबर-4

बालाकोट हमले के बाद कई चैनलों ने एनिमेशन और गूगल इमेज के आधार पर उस ठिकाने को दिखाया जहां पर एयरस्ट्राइक की गई। इन सभी ने यह बात साफ-साफ बताई थी कि ये रिप्रेजेंटेटिव इमेज है ताकि लोगों को हमले के बारे में समझना आसान हो। लेकिन कांग्रेसी मीडिया ने इसे हाथों-हाथ लपक लिया और यह दावा करना शुरू कर दिया कि कुछ चैनल फर्जी फुटेज के आधार पर बालाकोट हमले को सही साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि ऐसा कोई दावा किया ही नहीं गया था। पाकिस्तानी चैनलों ने फर्जी फैक्ट चेक गिरोह की ऐसी खबरों को खूब बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया।

Altnews और आजतक की तो हालत ये है कि वो कई बार tiktok वीडियोज और मजाक के तौर पर बनाई गई फोटोशॉप तस्वीरों का भी फैक्ट चेक कर डालते हैं। दरअसल इन सभी के लिए उन्हें मोटी रकम मिलती है और लिहाजा नंबर बढ़ाने की होड़ रहती है। दूसरी तरफ बीजेपी के विरोध में ज्यादातर ऐसी खबरें ही फैक्ट चेक की जाती हैं जिनकी सच्चाई लोगों को पहले से ही पता होती है।

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