Home » Loose Top » कंधार छोड़िए, जानिए जब कांग्रेस ने मुफ्त में छोड़े थे 25 पाकिस्तानी आतंकी
Loose Top

कंधार छोड़िए, जानिए जब कांग्रेस ने मुफ्त में छोड़े थे 25 पाकिस्तानी आतंकी

दावा किया जाता है कि छोड़े जाने वाले 25 आतंकियों की लिस्ट भी सोनिया गांधी के दफ्तर में तैयार की गई थी।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बीजेपी पर कंधार विमान अपहरण कांड को लेकर हमला कर रहे हैं। उन्होंने एक चुनावी रैली में आरोप लगाया कि बीजेपी की सरकार के समय ही मौलाना मसूद अजहर को छोड़ा गया था। यह बात सही भी है कि दिसंबर 1999 में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने एयर इंडिया के विमान IC814 का अपहरण कर लिया था। वो काठमांडु से विमान को हाइजैक करके कंधार लेकर गए। विमान में फंसे करीब 150 भारतीयों को छुड़ाने के लिए तब की वाजपेयी सरकार ने 3 आतंकवादियों को छोड़ा था, जिसमें से एक मौलाना मसूद अज़हर भी था। कांग्रेस अक्सर इस फैसले को लेकर बीजेपी पर हमला बोलती रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मनमोहन सरकार के समय पाकिस्तानी आतंकवादियों को ‘सद्भावना’ दिखाते हुए छोड़ा गया है। इन्हीं में से एक आतंकी ने पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले को अंजाम दिया था। यानी वाजपेयी सरकार ने तो कम से कम 150 भारतीयों की जान बचाने के लिए 3 आतंकी छोड़े थे, लेकिन कांग्रेस की सरकारों ने बिना किसी बदले के ढेरों बर्बर आतंकियों को यूं ही छोड़ दिया।

2010 में मनमोहन ने 25 आतंकी छोड़े

आजाद भारत में आतंकवादियों को यूं ही छोड़ देने की ये सबसे बड़ी घटना थी। तब पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने के नाम पर मनमोहन सरकार ने 25 बर्बर आतंकवादियों को रिहा करने का फैसला किया। इनमें से ज्यादातर पाकिस्तानी थे, जिन पर भारत में कत्लेआम मचाने और बम धमाकों के गंभीर आरोप थे। ये सभी आतंकी लश्कर ए तैबा और हिज्बुल मुजाहिदीन के थे। तब मनमोहन सरकार ने इन सभी को सरकारी गाड़ियों में बाइज्जत बिठाकर पाकिस्तानी सेना के अफसरों को सौंपा था। दरअसल 7 जून 2010 को मनमोहन जम्मू कश्मीर के दौरे पर जाने वाले थे और उससे पहले 28 मई को ‘पाकिस्तान के लिए सद्भावना दिखाने’ के नाम पर यह फैसला बेहद जल्दीबाजी में लिया गया था। तब यह बात कही गई थी कि कांग्रेस सरकार को तब लगता था कि इससे हुर्रियत के अलगाववादी बातचीत के लिए राजी हो जाएंगे। उन्होंने इस रिहाई के बदले पाकिस्तान से एक भी भारतीय कैदी को छोड़ने की कोई शर्त नहीं रखी। जिन आतंकवादियों को छोड़ा गया था उनमें शाहिद लतीफ, नूर मोहम्मद, अब्दुल राशिद, नजीर मोहम्मद, मोहम्मद शफी, रहीम दीन, मोहम्मद शरीफ मलिक, करामत हुसैन और सुहेल अहमद कटारिया जैसे आतंकी कमांडर भी शामिल थे। ये सभी देशभर की जेलों में बंद थे। बाद में कई सरकारी अधिकारियों ने यह पुष्टि की कि आतंकवादियों को छोड़ने का फैसला सेना और सुरक्षा एजेंसियों से सलाह लिए बिना किया गया था। यहां तक कि प्रधानमंत्री कार्यालय के बड़े अफसरों से भी इसे छिपाया गया था। इसी आधार पर यह दावा किया जाता है कि यह फैसला मनमोहन सिंह का नहीं, बल्कि सोनिया गांधी का था। छोड़े जाने वाले आतंकियों की लिस्ट भी सोनिया की तरफ से ही दी गई थी। इस समय तक राहुल गांधी का राजनीति में पदार्पण हो चुका था, जाहिर है उनको भी सबकुछ पता ही रहा होगा।

पठानकोट हमले के पीछे था शाहिद लतीफ

2016 में हुए पठानकोट हमले में छोड़े गए आतंकी शाहिद लतीफ का नाम सामने आया। 2010 में रिहाई के समय 47 साल का हो चुका लतीफ 11 साल से भारत की जेलों में सड़ रहा था। पाकिस्तान में वापस जाकर उसने ही जैश-ए-मोहम्मद की फिदायीन ब्रिगेड तैयार की। खास बात यह है कि 1999 में हुए कंधार विमान अपहरण के समय भी जिन 35 आतंकियों को छोड़ने की मांग की गई थी उनमें शाहिद लतीफ का नाम था। वाजपेयी सरकार ने आतंकियों से सौदेबाजी करके 35 में से सिर्फ 3 को छोड़ा था। शाहिद लतीफ आज भी पूरी तरह सक्रिय है और माना जाता है कि 2010 के बाद से देश में जितने भी बड़े आतंकी हमले हुए हैं उनमें शाहिद लतीफ का कहीं न कहीं जरूर हाथ रहा है। पुलवामा हमले का तो वो मास्टरमाइंड ही था। 2010 में कांग्रेस सरकार ने जिन 25 आतंकियों को छोड़ा था उनमें से बाकी भी सक्रिय हैं और भारत में आतंकवादी हमलों में अलग-अलग तरीके से अपना योगदान दे रहे हैं।

सीक्रेट रखा गया आतंकी छोड़ने का फैसला

खास बात यह है कि सोनिया-मनमोहन सरकार ने इस फैसले को पूरी तरह से सीक्रेट रखा। 2008 के मुंबई हमले के बाद अभी देश पूरी तरह से उबरा भी नहीं था कि 18 महीनों के अंदर इस तरह से 25 आतंकियों को छोड़ देना किसी रहस्य से कम नहीं है। देश की तमाम सुरक्षा एजेंसियों और विपक्ष के नेताओं को इस फैसले की कोई जानकारी नहीं दी गई। मीडिया ने इस खबर को ऐसे दिखाया मानो ये बहुत ही अच्छा फैसला था और ये सारे आतंकवादी जेलों में बंद रहकर देश पर बोझ बने हुए थे। नतीजा यह हुआ कि इस खबर को लेकर कुछ खास प्रतिक्रिया नहीं हुई। बीजेपी के नेताओं ने इसका कड़ा विरोध करने की कोशिश भी की तो मीडिया ने उनके बयानों को सेंसर कर दिया ताकि यह बात आम लोगों तक न पहुंचे। उस समय तक सोशल मीडिया आ चुका था, लेकिन उसकी पहुंच बहुत लोगों तक नहीं थी, लिहाजा कांग्रेस सरकार का ये कुकृत्य दबा का दबा रह गया।

संदर्भ

1. https://www.indiatoday.in/india/story/pak-terrorists-freed-in-goodwill-gesture-75384-2010-05-29

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें


कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।

comments

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...

Donate to Newsloose.com

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें

Popular This Week

Don`t copy text!