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दिल्ली में इफ्तार पर खर्च 2 करोड़, जानिए हिंदू त्यौहारों पर कितना

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने बीते तीन साल में त्यौहार मनाने पर कितना खर्च किया होगा? इस बारे में खुद दिल्ली सरकार ने जो जानकारियां दी हैं वो चौंकाने वाली हैं। आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में यह बात सामने आई है कि दिल्ली में साल 2015 से 2018 के बीच रमजान के महीने में इफ्तार और ईद पार्टियों पर सरकारी खजाने से कुल 2 करोड़ 18 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए गए। दिल्ली में इस मद में होने वाला ये अब तक का सबसे बड़ा खर्च है। यहां हम आपको बता दें कि सरकार ऐसे आयोजनों पर जो कुछ भी खर्च करती है वो टैक्सपेयर्स की जेब से जाता है। आम तौर पर इफ्तार के लिए इतना बड़ा बजट अपने आप में हैरान करने वाला है। क्योंकि ये वो खर्च है जो सिर्फ खाने-पीने पर हुआ है। लेकिन असली चिंता की बात तब पैदा होती है जब हम नजर डालते हैं कि हिंदुओं के त्यौहारों पर कुल कितनी रकम खर्च की गई।

आरटीआई में सामने आई जानकारी

दिल्ली में रहने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट डॉक्टर हुकुम (@Dr_JaySpeak) ने सरकार से इस बारे में जानकारी मांगी थी कि धार्मिक त्यौहारों से जुड़े सरकारी आयोजनओं पर कितनी रकम खर्च की जा रही है। जवाब में केजरीवाल सरकार ने बताया है कि बीते तीन साल में 2 करोड़ 18 लाख रुपये इफ्तार और ईद पार्टियों पर खर्च हुए हैं। अकेले इफ्तार पार्टियों पर कुल खर्च 2 करोड़ 99 हजार रुपये के करीब बैठता है। ये सारी रकम मुख्यमंत्री दफ्तर के बजट से खर्च किया गया। और ठेका मोहम्मद अयाज केटरर्स को दिया गया। खबरों के मुताबिक ये केटरर भी आम आदमी पार्टी का ही आदमी है। आरटीआई में दीवाली, होली, नवरात्र जैसे हिंदू त्यौहारों को मनाने पर हुए सरकारी खर्च की भी जानकारी मांगी गई थी। इसका जवाब है एक भी पैसा नहीं। यानी केजरीवाल सरकार ने तीन साल मुसलमानों के त्यौहार पर 2.18 लाख रुपये खर्च कर दिए, लेकिन हिंदू त्यौहारों के लिए उनके पास कोई बजट नहीं था। यहां तक अग्रवाल समाज के त्यौहार अग्रसेन जयंती पर भी उन्होंने एक रुपया भी खर्च नहीं किया।

फिजूलखर्ची में नंबर-1 केजरीवाल

केजरीवाल सरकार बनने के बाद से ही इसके लंबे-चौड़े खर्चों पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये के खर्च को लेकर पहले ही काफी विवाद हो चुका है। 2016 में केजरीवाल सरकार के मंत्रिमंडल के चाय-नाश्ते से जुड़ी जानकारियां किसी ने निकलवाई तो पता चला कि शुरुआती डेढ़ साल में ही मुख्यमंत्री अपने कैबिनेट के सहयोगियों के साथ मिलकर 1 करोड़ रुपये का चाय-नाश्ता कर गए। इसमें सीएम केजरीवाल ने सबसे ज्यादा 47.29 लाख रुपए खर्च किए थे। इसी तरह सरकार की सालगिरह पर फाइवस्टार जश्न, विदेश यात्राओं पर लाखों रुपये खर्च जैसे मामले समय-समय पर सुर्खियों में आते रहे हैं। यह स्थिति तब है जब अरविंद केजरीवाल समय-समय पर शिकायत करते रहते हैं कि केंद्र सरकार उन्हें काम नहीं करने दे रही है। सोचने वाली बात है कि अगर सरकार चाय-नाश्ते और इफ्तार पार्टियों पर ही इतना बड़ा बजट खर्च कर रही है तो काम की छूट मिलने के बाद वो क्या करेंगे।

नीचे आप आरटीआई में मिली जानकारी को देख सकते हैं। अगर तस्वीर दिखाई न दे तो इस पर क्लिक करें। ये अलग विंडो में खुल जाएगी।

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