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प्रोफेसर जीडी अग्रवाल की मौत के पीछे ‘कांग्रेसी बाबा’ की साज़िश?

फाइल तस्वीर

गंगा के लिए 112 दिन से उपवास कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद यानी प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के निधन के मामले में कुछ चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। ऋषिकेश के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उनका इलाज करने वाले डॉक्टरों ने कहा है कि प्रोफेसर अग्रवाल अनशन तोड़ने के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन कोई था जो उन्हें अनशन जारी रखने के लिए उकसा रहा था। एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रविकांत ने मीडिया से बातचीत में इसकी पुष्टि की है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह दबाव किसका था। एम्स का ये दावा इस मौत को लेकर छिड़े विवाद को नया रंग दे चुका है। सूत्रों के मुताबिक एम्स के अधिकारी जिसकी तरफ इशारा कर रहे हैं वो दरअसल उन्हीं के करीबी कुछ बड़े साधु-संत हैं। इसके अलावा मातृ सदन संस्था की भूमिका भी सवालों के दायरे में है। प्रोफेसर जीडी अग्रवाल को स्वामी सानंद के रूप में 2011 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दीक्षा दी थी। यह इत्तेफाक है कि स्वरूपानंद और अविमुक्तेश्वरानंद, दोनों ही कांग्रेस के बेहद करीबी माने जाते हैं।

एम्स, ऋषिकेश के निदेशक डॉ. रविकांत ने बताया है कि स्वामी सानंद अपना अनशन खत्म करना चाहते थे। लेकिन कोई उन्हें ऐसा न करने के लिए हिदायत दे रहा था और इसी बारे में उन्हें एसएमएस और फोन किए जा रहे थे। स्वामी सानंद के साथ रहकर इलाज कर रही डॉक्टरों की टीम भी यही बात कह रही है। लेकिन कोई उन्हें फोन और एसएमएस करके अभी और इंतजार करने को कह रहा था। ऐसा कौन कर रहा था, इस सवाल पर डॉ. रविकांत ने चुप्पी साध ली। उन्होंने कहा कि “यह पता करना पुलिस और सरकार का काम है। एक डॉक्टर के तौर पर हमने जो कुछ महसूस किया वो मीडिया के आगे बता दिया।” शुरू से ही माना जा रहा था कि एम्स निदेशक का इशारा मातृ सदन की तरफ है। यह अजीबोगरीब बात है कि एम्स के इस दावे के फौरन बाद हरिद्वार के मातृ सदन ने मौत के लिए उलटा एम्स प्रशासन पर हत्या के आरोप लगाने शुरू कर दिए थे। मातृ सदन में ही रहकर प्रोफेसर जीडी अग्रवाल धरना दे रहे थे और उन्हें कुछ दिन पहले ही एम्स में शिफ्ट किया गया था। स्वामीजी ने दोबारा अस्पताल में भर्ती किए जाने का काफी विरोध किया था। उन्हें अस्पताल तक ले जाने वाले पुलिस वालों को उनकी नाराजगी का भी सामना करना पड़ा था।

उधर, मातृ सदन के प्रमुख स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा है कि वो एम्स के निदेशक के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करेंगे। हालांकि एम्स के निदेशक ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसी का नाम नहीं लिया था। फिर भी मातृ सदन ने इसे खुद पर आरोप मान लिया। मातृ सदन के पीछे कोई राजनीतिक ताकत है ये इसी बात से पता चलता है कि उन्होंने कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी, हरिद्वार के डीएम दीपक रावत, एसडीएम मनीष कुमार, कनखल थाने के सीओ और एसएचओ तक पर हत्या की साजिश का आरोप जड़ दिया। स्वामी सानंद 22 जून से मातृ सदन में गंगा विधेयक बनाने, गंगा भक्त परिषद के गठन, गंगा और सहायक नदियों पर बन रही पनबिजली परियोजनाओं को रद्द करने की मांग को लेकर अनशन पर थे। इस दौरान वो सिर्फ नींबू पानी, शहद, जल और नमक ले रहे थे। 12 जुलाई को तबीयत बिगड़ने पर प्रशासन ने उन्हें जबरन दून अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां से उन्हें एम्स, ऋषिकेश भेज दिया गया। 23 जुलाई को सानंद को एम्स से छुट्टी दे दी गई थी। स्वामी सानंद इसके बाद से मातृ सदन में ही अनशन पर थे। 9 अक्तूबर से उन्होंने जल भी त्याग दिया, जिसके बाद हरिद्वार प्रशासन उन्हें फिर से ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया। जहां एक दिन बाद ही हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।

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