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हिंदू धर्म ग्रंथों को दूषित करने में जुटी हैं ईसाई मिशनरी

हिंदू धर्म की प्रथाओं के खिलाफ पूरी दुनिया में दुष्प्रचार करने के बाद ईसाई मिशनरियां अब सनातन धर्म की पुरानी पुस्तकों को निशाना बना रही हैं। पुराणों और दूसरे ग्रंथों में वो इस तरह के शब्द घुसाने में जुटे हैं जिनके आधार पर कुछ साल बाद साबित किया जा सके कि हिंदू धर्म के ग्रंथों में जिस भगवान की बात कही गई है वो कोई और नहीं बल्कि ईसा मसीह हैं। इसी तरह हिंदू धर्म को ईसाई धर्म से पैदा हुआ बताने की कोशिश भी चल रही है। हिंदू दुनिया के सबसे प्राचीन धर्मों में से है। ईसाई धर्म इसके कई हजार साल बाद पैदा हुआ। यही कारण है कि यूरोप और दुनिया के कई ईसाई देशों में लोगों में हिंदू धर्म को लेकर उत्सुकता बीते सालों में बढ़ी है। धर्मग्रंथों में बदलाव के पीछे इरादा यही है कि किसी तरह से ईसाई धर्म को ज्यादा पुराना साबित किया जा सके, ताकि यूरोप में ईसाई से हिंदू धर्मांतरण को रोका जा सके।

पहला निशाना बना ईशवास्य उपनिषद

ईशवास्य या ईशोपनिषद शुक्ल यजुर्वेदीय शाखा के तहत एक उपनिषद है। इसमें ब्रह्म और आत्म का ज्ञान समाया हुआ है। हाल ही में पता चला कि अमेज़न की वेबसाइट पर इसी नाम से एक किताब बिक रही है, जिसमें ईशवास्य उपनिषद को ईसा मसीह से जोड़ने की कोशिश की गई है। इसे लिखने वाले प्रोफेसर एम एम निनान ने इसी तरह से हिंदू धर्म की कई और किताबों को ईसाई धर्म से जोड़ने की कोशिश की है। इसी लेखक ने एक किताब ऋग्वेद पर लिखी है जिसमें ऊल-जलूल तर्कों के आधार पर साबित करने की कोशिश की है कि ऋग्वेद कुछ साल पहले ही लिखा गया था और इसमें बाइबिल से सारी बातें कॉपी की गई हैं। एक किताब में लेखक ने हिंदू धर्म को ईसाई धर्म से पैदा हुआ बताया है। माना जाता है कि एम एम निनान दरअसल एक ठग है, जिसे हिंदू धर्म को नीचा दिखाने की सुपारी दी गई है। इसी तरह से कुछ समय पहले टीएन ओक नाम के एक शख्स ने किताब लिखकर दावा किया था कि भगवान कृष्ण कोई और नहीं, बल्कि जीसस क्राइस्ट थे। हैरानी की बात थी कि इस किताब को मीडिया ने खूब प्रचारित किया। नतीजा ये कि देश में कई हिंदू आज भी सोचते हैं कि क्राइस्ट और कृष्ण में कोई रिश्ता है। जबकि कृष्ण का काल आज से करीब 5000 साल पहले का था। जबकि जीसस क्राइस्ट सिर्फ 2000 साल पहले की बात है।

धर्म के नाम पर धोखेबाजी की कोशिश

दरअसल ईसाई धर्म यूरोप और अमेरिका में ही अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। रूस और कई दूसरे देशों में ईसाई धर्म की संस्थाएं धीरे-धीरे कमजोर हो रही हैं। शांति की तलाश में लोग हिंदू और बौद्ध जैसे सनातन धर्मों की तरफ बढ़ रहे हैं। इस प्रक्रिया को रोकने और आने वाली पीढ़ियों के लिए हिंदू धर्म की बिल्कुल गलत तस्वीर पेश करने की नीयत से ये किताबें बीते कुछ साल में लिखवाई गई हैं। माना जाता है कि इनके जरिए कुछ साल बाद यूरोप और दूसरे देशों में लोगों को बताया जाएगा कि हिंदू धर्म ईसाई धर्म के बाद आया। इस साजिश में अमेज़न जैसे पोर्टल भी शामिल हैं। जो इन फर्जी किताबों को इंटरनेट के जरिए दुनिया भर में फैलाने में जुटे हैं। सोशल मीडिया के जरिए लोगों ने इस तरह की कोशिशों पर विरोध दर्ज कराया है। नीचे आप इन ट्वीट्स को देख सकते हैं।

यह हैरानी की बात है कि जो ईसाई धर्म पूरे हिंदू धर्म को मिथक साबित करने में जुटा रहता है वो आखिर हिंदू धर्मग्रंथो को लेकर इस तरह की जालसाजी पर क्यों उतारू है? कहीं ऐसा तो नहीं कि हिंदू धर्म को लेकर ईसाइयत के दिमाग में कोई हीनभावना भरी हुई है, जिससे उबरने के लिए वो हिंदू धर्मग्रंथों और भगवानों के साथ ठगी की कोशिश कर रहा है। वो भी तब जब कई पश्चिमी विद्वान दावा करते हैं कि दरअसल ईसा मसीह कोई था ही नहीं। उस समय के चर्च ने ईसा मसीह की एक कल्पना गढ़ी थी ताकि लोगों को धर्म के

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