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योगी के बयान पर मीडिया की ‘नौटंकी’ का पूरा वीडियो

यूपी के कुशीनगर में फाटक रहित रेलवे क्रॉसिंग पर हुए दर्दनाक हादसे के दौरान भी मीडिया फर्जी खबरें फैलाने से बाज नहीं आया। कई चैनलों और अखबारों ने दावा किया था कि कुशीनगर में हादसे के शिकार बच्चों के रिश्तेदारों ने वहां के दौरे पर गए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नारेबाजी की और इससे भड़क कर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “नौटंकी बंद करो”। घटना के बाद से देर शाम तक दिल्ली-नोएडा के तमाम चैनलों पर यह बयान दिखाया गया। शाम होते-होते मुख्यमंत्री कार्यालय से एक सफाई आई इसके बावजूद देर रात तक ये झूठी खबर चैनलों पर चलती रही। हैरानी की बात यह रही कि अगले दिन शुक्रवार को अखबारों में भी इस झूठी खबर को भरपूर जगह दी गई। टाइम्स ऑफ इंडिया ने तो इसे अपनी लीड स्टोरी बनाया। न्यूज़लूज़ पर हमने मुख्यमंत्री के बयान का वो पूरा हिस्सा हासिल करने में कामयाबी पाई है, जिसे मीडिया नहीं दिखा रहा।

अपने समर्थकों को डांटा था!

योगी के भाषण का जो वीडियो वायरल हो रहा है और जिसे चैनलों ने दिखाया है वो दरअसल एक स्थानीय पत्रकार ने अपने कैमरे से शूट किया था। ये वीडियो दो हिस्से में है, क्योंकि बीच में उसका कैमरा हिल गया था। कुछ स्थानीय चैनलों के पास योगी के उस भाषण का पूरा वीडियो भी है। इन चैनलों ने उसे दिखाया भी। लेकिन उससे पहले अधूरा वीडियो दिल्ली के चैनलों ने दिखाना शुरू कर दिया। किसी चैनल ने इस भाषण को 12-13 सेकेंड से ज्यादा नहीं दिखाया जबकि पूरी क्लिप 40 सेकेंड की थी। इसके अलावा एक और वीडियो भी सामने आया है जिसमें दिख रहा है कि योगी के भाषण शुरू करने से ठीक पहले कुछ भाजपा समर्थक वंदेमातरम और भारत माता की जय के नारे जोर-जोर से लगा रहे थे। उनके कारण योगी को भाषण शुरू करने में दिक्कत हुई और उन्होंने उन्हें यह कहते हुए फटकारा कि “ये दुखद घटना है और दुखद घटना के समय शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करने के साथ-साथ (कट) इसीलिए आप लोगों से आग्रह है कि आप लोग रास्ता खाली करके घटनास्थल तक मुझे जाने दें।”

दिल्ली की मीडिया ने गढ़ा झूठ

इस मामले में खास तौर पर दिल्ली की मीडिया का रुख हैरान करने वाला रहा। सच्चाई को जानते हुए भी सबने 13 सेकेंड का अधूरा वीडियो दिखाकर साबित कर दिया कि योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवारों को गाली दी। इस होड़ में खुद को राष्ट्रवादी बताने वाला चैनल रिपब्लिक सबसे आगे था। बाकी चैनल भी पीछे नहीं रहे। ज़ी न्यूज़ ने भले ही टीवी पर ये फर्जी वीडियो नहीं दिखाया, लेकिन उन्होंने अपनी वेबसाइट पर इसे पोस्ट करके इस झूठ को फैलाने में भरपूर मदद की। शाम तक सच्चाई सामने आने के बाद भी टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे अगले दिन के अखबार की सबसे बड़ी खबर बनाया। लोकल हिंदी अखबार अमर उजाला ने भी उसी झूठ को आगे बढ़ाया जिसे शाम के समय चैनल गढ़ चुके थे। बीते कुछ समय में मीडिया हिंदूवादी शक्तियों के खिलाफ लगातार ऐसी झूठी खबरें फैलाता रहा है। माना जाता है कि ऐसा एक झूठ फैलाने के बदले में चैनलों और अखबारों को मोटी रकम मिलती है। ये पैसा कौन देता है और कहां से आता है ये निश्चित तौर पर जांच का विषय है।

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