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अब सवर्ण आंदोलन के नाम पर हिंसा कराएगी कांग्रेस?

प्रतीकात्मक तस्वीर। इसका खबर से कोई लेना-देना नहीं है।

दलितों के ‘भारत बंद’ में हिंसा से उत्साहित कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां अब सवर्ण आंदोलन की तैयारी में जुट गई हैं। तैयारी के तौर-तरीके को देखकर समझा जा सकता है कि इसके पीछे भी कैंब्रिज एनालिटिका नाम की उस ब्रिटिश कंपनी का हाथ है, जिसे 2019 में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का ठेका दिया गया है। ये वही कंपनी है जो हाल ही में दुनिया भर में फेसबुक पर लोगों के डेटा चोरी करने के मामले में पकड़ी गई है। 2 अप्रैल को हुए दलितों के भारत बंद के पीछे भी इसी कंपनी का हाथ माना जा रहा है। उसने देश भर में कई दलित संगठनों और राजनीतिक दलों को मिलाकर उस बंद की रणनीति तैयार की थी। ठीक उसी तर्ज पर प्रतिक्रिया के नाम पर सवर्णों के आंदोलन की योजना बनाई गई है। इसके लिए 10 अप्रैल की तारीख का एलान किया गया है। खुफिया अलर्ट्स के मुताबिक इस तथाकथित आंदोलन में कांग्रेस की लोकल इकाइयों के कई नेता सक्रिय हैं।

लोकल गुंडों को सौंपी गई जिम्मेदारी

हमारी जानकारी के मुताबिक कैंब्रिज एनालिटिका के एजेंटों ने अलग-अलग शहरों में सवर्ण जाति के असमाजिक तत्वों की मदद से आंदोलन की तैयारी की है। इसके लिए झंडे, बैनर और दूसरे खर्चों के लिए मोटी रकम भी दी गई है। ऐसे गुंडों में सबसे अहम नाम है करणी सेना का नेता सुखदेव सिंह गोगामेड़ी। उसे पूरे राजस्थान के शहरों में आंदोलन की कमान दी गई है। गोगामेड़ी वही है जिसमें हाल ही में राजस्थान उपचुनाव में राजपूतों से कांग्रेस को वोट देने की अपील की थी। राजस्थान में गैंगस्टर आनंदपाल के एनकाउंटर के मामले को भी उसी ने कांग्रेस की शह पर राजपूत अस्मिता का सवाल बना दिया था। गोगामेड़ी पर बलात्कार के भी आरोप हैं। पद्मावती आंदोलन के समय हिंसा के ज्यादातर मामलों में करणी सेना का उसी का गुट सक्रिय था। इसी तरह से हर उस राज्य में लोगों को हिंसा फैलाने का काम सौंपा गया है जहां पर आने वाले दिनों में चुनाव होने हैं।

सोशल मीडिया से नफरत का खेल

कांग्रेस ने फेसबुक और ट्विटर पर सवर्ण, दलित और ओबीसी नामों वाले ढेरों प्रोफाइल बनवाए हैं, जिनके जरिए एक-दूसरे के लिए गालियां लिखी जा रही हैं। दो दिन पहले ही फेसबुक ने एक ऐसे ‘ब्राह्मण फेसबुक ग्रुप’ को ब्लॉक किया है, जिसका एडमिन एक मुसलमान था। इस ग्रुप में सिर्फ दलितों ही नहीं, बल्कि हिंदुओं की दूसरी सभी जातियों को गालियां दी जा रही थीं। इस ग्रुप ने महाराणा प्रताप और भीमराव अंबेडकर के लिए अपमानजनक तस्वीरें और पोस्ट शेयर की थीं। आम तौर पर ऐसे सभी ग्रुप और प्रोफाइल पैसे देकर चलवाए जाते हैं। कुछ दिन पहले कैंब्रिज एनालिटिका के एक पूर्व अधिकारी ने माना था कि कंपनी को भारत में जातीय आधार पर गृहयुद्ध कराने की तैयारी है। जाहिर है लोग कांग्रेस की इस साजिश को समझने लगे हैं और अपील कर रहे हैं कि वो सवर्ण आंदोलन के चक्कर में मोहरा न बनें।

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