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वो पांच पुराने साथी जिनसे केजरीवाल को डर लगता है!

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल इन दिनों अपने ही पुराने साथियों के उठाए सवालों से बचते फिर रहे हैं। अन्ना आंदोलन के वक्त से साथ रहे इनमें से कई साथी अपनी नौकरी और जमा-जमाया काम सौंपकर केजरीवाल के साथ जुड़े थे। लेकिन बाद में काम निकल जाने पर केजरीवाल ने उन्हें किनारे लगा दिया। इनमें कई ऐसे भी हैं जिन्होंने केजरीवाल के कामकाज के निरंकुश तरीके के खिलाफ आवाज उठाई और उन्हें इसकी सज़ा दी गई। आज भले ही अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी के एकछत्र नेता हों, लेकिन अपनी ही पार्टी के इन पुराने साथियों से उन्हें नजरें चुरानी पड़ती हैं। हम उन पांच चेहरों के बारे में बताते हैं, जिनके सवालों पर केजरीवाल की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है।

1. कपिल मिश्रा, सेर पर सवा सेर

अरविंद केजरीवाल से बगावत करके बाहर हुए सबसे ताजा चेहरे हैं। कपिल मिश्रा ने दावा किया था कि उन्होंने मुख्यमंत्री को एक शख्स से 2 करोड़ रुपये रिश्वत लेते देखा है। इसके बाद उन्हें मंत्री पद से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। कपिल मिश्रा कभी सोशल मीडिया तो कभी मीडिया के जरिए केजरीवाल को आइना दिखाते रहते हैं। किसी भी मसले पर वो केजरीवाल के कामकाज के तरीकों और कथित भ्रष्टाचार का खुलासा करते रहते हैं। बिजली पानी से लेकर प्रदूषण जैसे मसलों पर कपिल मिश्रा सीधे अरविंद केजरीवाल से सवाल पूछते हैं, लेकिन अब तक दिल्ली के तथाकथित ईमानदार मुख्यमंत्री उनके सवालों से पीछा छुड़ाकर भागते रहे हैं।

2. मुनीष रायजादा, केजरीवाल का सही इलाज़

पेशे से डॉक्टर हैं और अमेरिका के शिकागो में प्रैक्टिस करते हैं। डॉक्टर रायजादा ने आम आदमी पार्टी की एनआरआई शाखा की स्थापना की थी। डॉक्टरी के अपने व्यस्त पेशे से वक्त निकालकर उन्होंने करोड़ों रुपये चंदे के तौर पर बटोरकर आम आदमी पार्टी के खाते में भेजा। डॉक्टर रायजादा चाहते थे कि केजरीवाल चंदे का पूरा हिसाब पार्टी की वेबसाइट पर दें, ताकि उनके जरिए पैसे देने वालों को तसल्ली रहे। लेकिन केजरीवाल इसके लिए तैयार नहीं हुए। बाद में केजरीवाल और लालू यादव की मुलाकात के विरोध में लेख लिखने के आरोप में उन्हें भी पार्टी से निकाल दिया गया। मुनीष रायजादा तब से अरविंदकेजरीवाल के लिए मुसीबत बने हुए हैं। वो सोशल मीडिया और अपनी वेबसाइट newsgram.com के जरिए अपना अभियान जारी रखे हुए हैं। साथ ही पंजाब चुनाव में उन्होंने लोगों के घर-घर जाकर अपने साथ हुई दगाबाजी की कहानी बताई। उनके चंदा बंद अभियान का पंजाब विधानसभा और दिल्ली नगर निगम में आम आदमी पार्टी की हार में बड़ा योगदान माना जाता है।

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