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फौजी अफसर बन गईं शहीद कर्नल महादिक की पत्नी

बच्चों के साथ स्वाति महादिक की ताजा तस्वीर। दायीं तरफ ऊपर पति के पार्थिव शरीर के साथ दो साल पुरानी तस्वीर है। नीचे कर्नल संतोष महादिक की तस्वीर है।

नवंबर 2015 में कुपवाड़ा में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए कर्नल संतोष महादिक की पत्नी स्वाति महादिक ने भी फौज में शामिल हो गई हैं। स्वाति ने अपने पति के अंतिम संस्कार के वक्त ही कहा था कि मैं भी फौज में शामिल होकर अपने पति की जिम्मेदारियों को पूरा करना चाहती हूं। स्वाति ने सेना से नौकरी नहीं मांगी, बल्कि पढ़ाई करके एसएसबी एग्जाम पास किया। उन्होंने भर्ती के सभी पांच राउंड भी क्लियर किए। लेकिन उनके इरादे में रुकावट बन रही थी उम्र। स्वाति 32 साल की हैं और सेना के नियमों के मुताबिक इस उम्र में भर्ती नहीं हो सकती। लेकिन ये रुकावट आड़े नहीं आई और आखिरकार सेना की कमीशंड ऑफिसर बन गई हैं। स्वाति ने एमए किया हुआ है और पति की शहादत के वक्त वो केंद्रीय विद्यालय में टीचर थीं। लेकिन सेना में भर्ती होने के लिए उन्होंने अपनी जमी-जमाई नौकरी भी छोड़ दी।

सेना ने दी स्पेशल छूट

अपने पति की तरह सेना में भर्ती होकर स्वाति भी देश की सेवा कर सकें, इसके लिए उस वक्त के आर्मी चीफ जनरल दलबीर सिंह ने सरकार से सिफारिश की थी कि उन्हें उम्र में छूट दी जाए। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने इस सिफारिश को मंजूर कर लिया है। फौज में भर्ती के वक्त स्वाति का वजन भी ज्यादा था, लेकिन उन्होंने इस बाधा को भी दूर किया। 2016 में स्वाति महादिक ने एसएसबी का टेस्ट पास किया और फिर चेन्नई में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में उनकी ट्रेनिंग हुई। एक साल के कठिन प्रशिक्षण के बाद चेन्नई के ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में उन्होंने औपचारिक तौर पर पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया। ये यादगार मौका रहा, जब उनको एक साल बाद अपनी बेटी और बेटे से मिलने का मौका मिला। 

बच्चों को बोर्डिंग में भेजा

स्वाति के एक 12 साल की बेटी और 6 साल का बेटा है। फौज में जाने से पहले उन्होंने दोनों का दाखिला एक बोर्डिंग स्कूल में करा दिया था। ताकि वो ट्रेनिंग पूरी कर सकें। स्वाति का कहना है कि “पति की शहादत के बाद मैं सदमे में थी। जब इससे बाहर निकली तो मैंने खुद को पहले से ज्यादा मजबूत महसूस किया। ऐसा लगा कि मेरे पति जिस काम पर थे उसके बाद उसकी जिम्मेदारी मुझे भी लेनी चाहिए। बच्चे अभी छोटे हैं, वो भी सेना में आएं तो मुझे अच्छा लगेगा।” स्वाति के सीनियर्स और फौजी अधिकारियों उनकी लगन की तारीफ करते हैं और कहते हैं कि जिस तरह का जुनून उनके अंदर था उसी के दम पर वो ओवरएज होने के बावजूद एक शानदार कैडेट बनकर सामने आईं।

चुपचाप पूरा किया सपना

कर्नल महादिक के भाई जयवंत घोरपड़े दूध का कारोबार करते हैं। उन्होंने बताया कि मेरे भाई की शहादत के बाद स्वाति पुणे चली गईं और वहां पर उन्होंने सेना में भर्ती के लिए एसएसबी की तैयारी शुरू कर दी। हमने उनकी इच्छा का सम्मान किया और इस दौरान बेटी कार्तिकी और बेटे स्वराज्य को अपने पास रखा। बाद में बेटी को देहरादून और बेटे को पंचगनी के बोर्डिंग स्कूल में दाखिला दिलवा दिया।

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