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मीडिया वालों, उस होटल का नाम प्राइड प्लाज़ा है!

दिल्ली के एक फाइवस्टार होटल में महिला कर्मचारी के साथ छेड़खानी की खबर सुबह से मीडिया में छाई हुई है। ज्यादातर चैनल इस खबर को दिखा रहे हैं। न्यूज़ वेबसाइट्स और अखबारों में भी ये खबर देखी जा सकती है। हैरानी की बात यह है कि कोई भी यह नहीं बता रहा है कि होटल का नाम क्या है। इतना ही नहीं आरोपी का नाम भी ज्यादातर जगहों पर गायब है। ये हालत तब है जब सीसीटीवी कैमरे में आरोपी की हरकत साफ-साफ देखी जा सकती है। कुछ चैनलों की वेबसाइट पर होटल का नाम है, लेकिन बुलेटिनों में ‘दिल्ली के एक फाइवस्टार होटल’ कहकर ही बताया जा रहा है। सवाल ये है कि खुद को सबसे निडर और महान पत्रकार बताने वालों की जुबान पर अब ताला क्यों लग गया है? दिल्ली पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में होटल और आरोपी, दोनों के ही नाम साफ-साफ लिखे हैं तो फिर क्या कारण है कि मीडिया इनका नाम लेने से डर रहा है?

मीडिया ने दिखाई अधूरी खबर

सीसीटीवी कैमरे में जो सिक्योरिटी मैनेजर महिला कर्मचारी की साड़ी खींचता दिखाई दे रहा है उसका नाम पवन दहिया बताया जा रहा है। जबकि ये मामला दिल्ली एयरपोर्ट एरिया में बने होटल प्राइड प्लाज़ा का है। ये फाइव स्टार होटल चेन का हिस्सा है और इसके देश भर के बड़े शहरों में करीब एक दर्जन होटल हैं। मामले को रफा-दफा करने के लिए होटल प्राइड प्लाज़ा का प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। इसके तहत पुलिस से लेकर मीडिया तक को साधने की कोशिशें चल रही हैं। पीड़ित लड़की को इंसाफ दिलाने के बजाय होटल प्रशासन को ये तरीका आसान नजर आ रहा है। घटना के दौरान ही पीड़ित लड़की ने भागते हुए मेट्रो स्टेशन से होटल की एचआर मैनेजर को फोन पर अपने साथ हुए सलूक की जानकारी दी थी। लेकिन प्राइड प्लाज़ा होटल की एचआर मैनेजर ने उल्टा उसे ही नौकरी से निकाल दिया। पुलिस केस होने के बाद जब बात बढ़ी तो आरोपी पवन दहिया को सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया गया। लेकिन होटल के रवैये से लगता नहीं कि वो आरोपी को सजा देने के मूड में है। ये घटना 29 जुलाई की है।

विज्ञापन के लालच में है मीडिया

आम तौर पर ऐसे मौके ज्यादातर मीडिया संस्थानों के लिए कमाई का मौका होता है। होटल का नाम न लिखने और मामले को ज्यादा तूल न देने के एवज़ में संपादकों, रिपोर्टरों और मैनेजमेंट के लोगों को मोटी रिश्वत मिल जाती है। इसके अलावा विज्ञापनों का भी सौदा होता है। होटल प्राइड प्लाज़ा के इस मामले में ऐसा कुछ हुआ है या नहीं, यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता है। लेकिन जिस तरह से होटल और आरोपी को बचाने की कोशिश की जा रही है उसे देखकर शक जरूर पैदा हो रहा है। उधर सोशल मीडिया पर सुबह से ही यह चर्चा तेज़ थी कि ये होटल कौन सा है। कई लोगों ने अखबारों और चैनलों के रिपोर्टरों से ट्विटर और फेसबुक पर पूछा कि वो होटल का नाम क्यों नहीं बता रहे हैं। इसके बाद कुछ मीडिया संस्थानों ने वेबसाइट की खबरों में होटल प्राइड प्लाज़ा का नाम डाल दिया। हालांकि टीवी पर अब भी वो इसका नाम लेने से बच रहे हैं।

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