Home » Loose Top » एक बार फिर चीन के समर्थन में खड़ी हुई सीपीएम
Loose Top

एक बार फिर चीन के समर्थन में खड़ी हुई सीपीएम

इतिहास एक बार फिर से खुद को दोहरा रहा है। 1962 के युद्ध में खुलेआम चीन का साथ देने वाली कम्युनिस्ट पार्टियां एक बार फिर से देश के खिलाफ मुखर हो रही हैं। देश में सबसे बड़ी वामपंथी पार्टी सीपीएम यानी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने डोकलाम में भारत के रुख पर सवाल खड़ा किया है। पार्टी के मुखपत्र के ताजा अंक में जो कुछ छपा है उसे जानकर आप यकीन नहीं कर पाएंगे कि यह पार्टी भारत की है और लोकसभा और राज्यसभा में इसके सांसद हैं। मुखपत्र पीपुल्स डेमोक्रेसी के संपादकीय में चीन के साथ जारी ताजा तनाव के लिए भारत को दोषी ठहराते हुए इसकी कड़ी आलोचना की गई है।

देश का खाना, चीन का गाना

भारत में कम्युनिस्ट पार्टियां शुरू से ही चीन के लिए वफादारी के कारण बदनाम रही हैं। लेकिन बीते कुछ दशक में उसके नेता अपना चीन-प्रेम खुलकर जताने में झिझकते रहे हैं। ऐसे में सीपीएम का ये खुला रुख थोड़ा चौंकाने वाला है। मुखपत्र में छपी संपादकीय में कहा गया है कि “मोदी सरकार को यह समझना होगा कि सीमा के विवाद को हल करने के लिए बातचीत के सिवा कोई उपाय नहीं है। बातचीत का एक समयबद्ध फ्रेमवर्क होना चाहिए। हमें इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि ये सारा विवाद भूटान को लेकर है। ऐसा नहीं है कि भारत ने भूटान की सुरक्षा का ठेका ले रखा है। उसके साथ 1949 की संधि में यह अनुच्छेद हटा दिया गया था कि भूटान के लिए विदेश नीति और विदेशों से हथियार खरीदने के लिए भारत से मार्गदर्शन लेना जरूरी होगा। अब सिर्फ यह संधि है कि भारत और भूटान एक-दूसरे के राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर आपस में सहयोग करेंगे।” मतलब ये कि सीपीएम के मुखपत्र ने एक तरह चीन की तरफ से भारत को नसीहत दी है। अब तक यही बातें चीन सरकार बोलती रही है।

खत्म नहीं हुई चीन से वफादारी

1962 में चीन से हुई लड़ाई में तब के कम्युनिस्ट नेता खुलकर चीन के साथ खड़े हो गए थे। उनका कहना था कि ये दो देशों का नहीं, बल्कि कम्युनिस्ट चीन और पूंजीवादी भारत के बीच ताकत का संघर्ष है। तब के वामपंथी नेता बीटी रणदि्वे, पी सुंदरैया, पीसी जोशी, बास पुन्नइैया, ज्योति बसु और हरकिशन सिंह सुरजीत खुलेआम चीन का समर्थन कर रहे थे। वो कहते थे कि चीन की लाल सेना भारत में आकर हमें आजाद कराएगी। तब एक मात्र वामपंथी नेता अजय घोष थे जो तटस्थ भूमिका में थे। हालांकि उन्होंने भी खुलकर इसकी आलोचना नहीं की थी। भारत-चीन युद्ध के समय जब एक तरफ सेना बॉर्डर पर चीन की सेना से मोर्चा ले रही थी, उसी वक्त देश के अंदर बगावत की पूरी तैयारी कर ली गई थी। देखा जाए तो यह सीधे-सीधे देशद्रोह का मामला बनता है, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें


कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।

comments

अपनी लिखी पोस्ट या जानकारी साझा करें 

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...

Donate to Newsloose.com

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें

Popular This Week

Don`t copy text!