Home » Loose Top » माल्या इकलौता नहीं, कांग्रेस ने इनको भी माल बांटा
Loose Top

माल्या इकलौता नहीं, कांग्रेस ने इनको भी माल बांटा

बैंकों से 9000 करोड़ रुपये लेकर विदेश भाग गए विजय माल्या के साथ-साथ अब बाकी डिफाल्टरों पर भी शिकंजा कसने का काम शुरू हो गया है। ये वो कंपनियां हैं जिन्हें पिछली यूपीए सरकार के दौरान अरबों के लोन बांटे गए। इसमें से भी ज्यादातर लोन सरकार के मंत्रियों के दबाव में बैंकों ने दिए हैं। अब केंद्र सरकार की दखल और रिजर्व बैंक के दबाव में बैंकों से कहा गया है कि वो सभी बड़े लोन डिफाल्टरों की लिस्ट तैयार करें। इन सभी को दिवालिया घोषित कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि उनके पास फंसा पैसा वसूला जा सके। आरबीआई ने शुरुआती तौर पर 12 सबसे बड़े डिफाल्टरों की पहचान कर भी ली है। इन 12 डिफाल्टरों के पास कुल डूबे हुए लोन (एनपीए) का 25 फीसदी है। इन सभी 12 कंपनियों से वसूली का नोटिस जारी कर दिया गया है। दिसंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक देश का 9.64 खरब रुपया कर्जों में फंसा हुआ है। इसमें से 7 खरब रुपये वो है जो एनपीए के दायरे में आता है। देश की आर्थिक तरक्की में ये एक बड़ा रोड़ा माना जा रहा है।

बैंकों को छह महीने का वक्त

रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को छह महीने का वक्त दिया है, इस दौरान उन्हें सभी बड़े डिफाल्टरों की लिस्ट तैयार करके उनके खिलाफ कार्रवाई की रणनीति तय करनी होगी। बैंक चाहें तो इन कर्जदारों को एक और आखिरी मौका दे सकते हैं। लेकिन इससे ज्यादा मोहलत मिलने की उम्मीद अब खत्म हो चुकी है। छह महीने के बाद उन्हें दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। ऐसी कंपनियों के एसेट्स बेचकर बैंक अपने घाटे की लोन की भरपाई करने को स्वतंत्र होंगे। सरकार इस पूरी प्रक्रिया को इसी कारोबारी साल में पूरा कर लेना चाहती है। शुरुआत में जिन 12 कंपनियों की लिस्ट तैयार की गई है उनके नाम अभी जारी नहीं किए गए हैं। आरबीआई के नियमों के कारण इनके नाम जाहिर नहीं किए जा सकते हैं।

कांग्रेस सरकारों ने बांटे लोन!

वैसे तो डूबे हुए ये लोन काफी वक्त से फंसे हुए हैं लेकिन इनका ज्यादातर हिस्सा पिछले सालों की कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के दौर में बांटा गया है। माल्या को लेकर भी जिस लोन की बात होती है वो 2007 से 2010 के बीच में दिया गया। कई कंपनियों को तो बाकायदा नियमों को ताक पर रखकर कॉरपोरेट, बैंक और सियासी साठगांठ के तहत अरबों के लोन दिए गए। अब ये सारी कंपनियां पैसे वापस करने में आनाकानी कर रही हैं। पिछले दिनों यह अफवाह उड़ी थी कि सरकार ने कंपनियों का कर्ज माफ कर दिया। जबकि सच यह है कि 2014 के बाद से केंद्र सरकार ने किसी कंपनी का एक पैसा कर्ज भी माफ नहीं किया है।

कांग्रेस ने देश को गुमराह किया

राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के तमाम नेता अक्सर कहते हैं कि मोदी सरकार ने कुछ उद्योगपतियों को पैसे बांट दिए। जबकि सच यह है कि अंबानी-अडानी जैसे उद्योगपतियों को मिले कर्ज का भी ज्यादातर हिस्सा कांग्रेस के जमाने का है। जबकि देश की अर्थव्यवस्था के साथ ये सारा खिलवाड़ कांग्रेस की सरकारों के दौरान हुआ। हाल ही में बनाये गए नए बैंकरप्सी इंसाल्वेंसी कानून के बाद ऐसी कंपनियों से निपटने के लिए सरकार को ब्रह्मास्त्र मिल गया है। वरना अब तक ये बड़ी कंपनियां बड़े-बड़े वकील करके लोन वसूली की हर कोशिश पर कोर्ट से रोक लगवा दिया करती थीं।

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।

comments

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...
Don`t copy text!