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नोटबंदी का सबसे बड़ा फायदा सामने आने वाला है!

500 और 1000 के नोट बंद करने के बाद से कई लोग पूछते हैं कि आखिर इस पूरे अभियान का फायदा क्या हुआ? अर्थशास्त्र की नजर से देखें तो देश की इकोनॉमी को इस कदम के कई फायदे हुए हैं, लेकिन जो सबसे बड़ा फायदा है वो अगले 2 महीने में दिखने वाला है। ये फायदा है इनकम टैक्स यानी आयकर के कलेक्शन का। नोटबंदी के बाद बड़ी संख्या में ऐसे लोग पकड़े गए हैं जिनके पास बड़ा घर, लंबी कार और भारी-भरकम बैंक बैलेंस था, लेकिन इसके बावजूद वो सरकार को एक पैसा टैक्स नहीं देते थे। ऐसे लोगों के ही कारण टैक्स का सारा बोझ नौकरीपेशा मध्य वर्ग पर आ जाता था। नोटबंदी के बाद इस साल 91 लाख नए लोग टैक्स देंगे। ये बढ़ोतरी पिछले साल के मुकाबले 80 फीसदी से भी अधिक है। इसके अलावा उन लोगों का भी टैक्स आएगा, जिन्होंने भारी मात्रा में काला धन अपने घरों में जमा कर रखा था।

काली कमाई का रास्ता बंद

जब कोई व्यक्ति एक बार इनकम टैक्स भरना शुरू कर देता है तो उसके लिए आगे टैक्स चोरी करना आसान नहीं होता। यही कारण है कि बहुत सारे धन्नासेठ कभी टैक्स नहीं देते थे। इसकी भरपाई करने के लिए सरकारें बंधी-बंधाई तनख्वाह वाले नौकरीपेशा लोगों पर सारा बोझ डाल देती थीं। ठीक वैसे ही जैसे कुछ लोग बिजली चोरी करके जलाते हैं, इसके कारण बिजली की दरें बढ़ानी पड़ जाती हैं और ये बोझ उन लोगों पर पड़ता है जो ईमानदारी से बिल चुका रहे होते हैं। जिन 91 लाख लोगों की पहचान हुई है उनमें से ज्यादातर करोड़ों में कमाई करने वाले लोग हैं। पिछले साल मात्र 24 लाख लोगों ने अपनी कमाई 10 लाख रुपये से ज्यादा बताई थी। जबकि इस बार इस संख्या में भारी इजाफा होना तय है। नोटबंदी के बाद देश की इकोनॉमी में 5 लाख करोड़ रुपये आए हैं। ये वो धन था जो अब तक तिजोरियों में बंद था या फिर ब्लैक मार्केट में चल रहा था।

टारगेट के करीब पहुंचे मोदी

पीएम मोदी ने नोटबंदी के समय ही इनकम टैक्स अफसरों को टारगेट दिया था कि अगले कुछ साल में करदाताओं की संख्या 10 करोड़ तक ले जाना है। नोटबंदी और उसके पहले से उठाए गए कदमों का फायदा ये हुआ कि अब ये संख्या करीब 7 करोड़ तक पहुंचने को है। अगले साल तक इसके 10 करोड़ हो जाने का अनुमान है। ये संख्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि लोगों के मन में यह बात घर कर रही है कि टैक्स चोरी करने पर सारी कमाई लुटने का खतरा है। नोटबंदी के दौरान लाखों की संख्या में ऐसे लोग रहे हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी भर की जुटाई काली कमाई गंवा दी। नोटबंदी से पहले तक देश में रोजाना करीब 1 लाख नए पैन कार्ड इश्यू हुआ करते थे। लेकिन अब ये संख्या औसतन रोज 2 से 3 लाख हो गई है।

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काले धन का हिसाब जारी

नोटबंदी के बाद कई लोगों ने अपनी काली कमाई को बैंकों में जमा कर दिया था। अब उन्हें उस रकम पर नियमों के हिसाब से ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा। हालांकि सरकार ने अभी तक औपचारिक तौर पर यह नहीं बताया है कि ऐसी रकम कितनी है, लेकिन यह जरूर साफ कर दिया है कि जिन लोगों ने अपनी अवैध कमाई बैंक में जमा कर दी थी वो यह न सोचें कि वो पैसा सफेद हो गया। बारी-बारी इन सभी को नोटिस भेजे जा रहे हैं। फिलहाल यह तय है कि इस साल जुलाई में जब इस साल का इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का काम खत्म होगा तो बड़ी मात्रा में काला धन अर्थव्यवस्था में वापस लौट चुका होगा और उससे मिले टैक्स से सरकार देश की तरक्की और गरीबों की भलाई की अपनी योजनाओं में तेज़ी ला सकेगी।

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