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मोर वाले जज साहब तो कांग्रेस के ‘करीबी’ निकले!

मोर को ब्रह्मचारी बताने और आंसुओं से सेक्स की थ्योरी देने वाले राजस्थान हाई कोर्ट के चर्चित जज महेश चंद्र शर्मा को लेकर बेहद चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। इनके मुताबिक जस्टिस शर्मा कांग्रेस के बेहद करीबी के तौर पर देखे जाते हैं और कांग्रेस की सरकारों की कृपा से ही वो एक मामूली वकील से हाई कोर्ट के जज के रुतबे तक पहुंचे। जस्टिस महेश चंद्र शर्मा एक दिन पहले ही पद से रिटायर हुए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने मोर के सेक्स के बारे में अपनी विशेषज्ञता जाहिर कर दी। तब से वो सोशल मीडिया पर मज़ाक का कारण बने हुए हैं। हालांकि इस मामले ने न्यायपालिका में जजों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुद कई पूर्व जजों और जाने-माने न्यायविदों ने जस्टिस शर्मा के बयान पर हैरानी जताई है।

कांग्रेस के कृपापात्र थे शर्मा जी!

राजस्थान हाई कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील ने नाम उजागर न करने की शर्त पर दावा किया कि जस्टिस महेश चंद्र शर्मा को कांग्रेस के एक बड़े नेता से अपनी करीबी का बहुत फायदा हुआ। इससे पहले तक वो हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले एक मामूली वकील भर थे। लेकिन राजनीतिक छत्रछाया में वो तेजी से तरक्की करने लगे। 2000 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में उन्हें एडिशनल एडवोकेट जनरल बना दिया गया। इस पद पर वो 2000 से 2003 तक रहे। 2003 में वसुंधरा राजे के सत्ता में आते ही उन्हें पद छोड़ना पड़ा। लेकिन कांग्रेस की उन पर कृपा ऐसी रही कि अगले ही साल यानी 2004 में उन्हें भारत सरकार का सीनियर पैनल एडवोकेट नियुक्त कर दिया गया। बताया जा रहा है कि यह नियुक्ति गहलोत की सिफारिश पर हुई थी और इसके लिए मंजूरी सोनिया गांधी के दफ्तर से दी गई थी। 2004 से 2007 तक वो मनमोहन सरकार के वकील के तौर पर बेहद अहम मुकदमों में पैरवी करते रहे।

कांग्रेस सरकार के वक्त बने जज

महेश चंद्र शर्मा का कानूनी क्षेत्र में करियर बेहद शानदार था। शायद यही कारण था कि उन्हें फौरन हाई कोर्ट के जज के लिए काबिल मान लिया गया। जुलाई 2007 में वो हाई कोर्ट के जज बन गए। जस्टिस शर्मा के पास राजस्थान यूनिवर्सिटी से बीएससी और एलएलबी की डिग्री है। इसके अलावा उन्होंने लेबर लॉ में कोई छोटा-मोटा डिप्लोमा किया है। आरोप है कि हाई कोर्ट जज के तौर पर उनका नाम डलवाने से लेकर उस पर केंद्र सरकार की मुहर लगवाने तक में ‘पहुंच’ का इस्तेमाल किया गया। उस वक्त केजी बालकृष्णन सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस थे। जिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। 10 साल के जज के करियर में उन्हें सियासी नेताओं पर कई ‘नरमी’ भरे फैसले दिए। चाहे वो कांग्रेस हो या बीजेपी। हमारे सूत्र ने कहा कि “रिटायर होने के बाद उन्होंने शायद बीजेपी को खुश करने की नीयत से मोर वाला बयान दिया होगा, लेकिन शायद उन्हें मालूम नहीं था कि इस चक्कर में वो खुद अपनी ही पोल खोल बैठेंगे।”

सुनें जज साहब का बुद्धिमत्ता से भरपूर बयान

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