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जानिए केपीएस गिल के जाने से क्यों खुश हैं केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के पीछे खालिस्तानी आतंकवादियों का हाथ होने का एक और सबूत सामने आया है। पंजाब में आतंकवाद का खात्मा करने वाले पूर्व डीजीपी केपीएस गिल के निधन के बाद सभी पार्टियों के नेताओं ने उनको श्रद्धांजलि दी, लेकिन जिस एक पार्टी ने केपीएस गिल को याद करने तक की जरूरत नहीं समझी वो थी आम आदमी पार्टी। केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के किसी भी नेता ने न तो ट्विटर न ही किसी और जरिए से केपीएस गिल को श्रद्धांजलि दी। यह बात लोगों को हैरान कर रही है। वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने इसे लेकर सवाल भी उठाया है और इसका कारण पूछा है। उन्होंने लिखा है कि- “बीजेपी और कांग्रेस ने केपीएस गिल को श्रद्धांजलि देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अकाली दल चुप रही यह बात समझ में आती है, लेकिन आम आदमी पार्टी के नेताओं ने अपने मुंह बंद क्यों कर रखे हैं?”

क्यों चुप हैं केजरीवाल?

ये आरोप लगातार लगते रहे हैं कि पंजाब चुनाव में आम आदमी पार्टी खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों से पैसे लेकर मैदान में उतरी थी। यहां तक कि पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने भी पंजाब चुनाव के लिए पार्टी की फंडिंग पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि पंजाब में चुनाव लड़ने के लिए करोड़ों रुपये आम आदमी पार्टी के पास कहां से आए इस बात की जांच होनी चाहिए। पंजाब चुनाव प्रचार के वक्त भी केजरीवाल हथियार डाल चुके एक आतंकवादी के घर पर रुके थे, जिसके बाद इसे लेकर काफी विवाद खड़ा हुआ था। चुनाव प्रचार से पहले फंड जुटाने के लिए आम आदमी पार्टी के कई नेता यूरोपीय देशों के दौरे पर गए थे। इनमें से कुछ की तस्वीरें सामने भी आई थीं। माना जा रहा है कि केजरीवाल की अभी की चुप्पी इसी कारण से है। अगर उन्होंने केपीएस गिल को श्रद्धांजलि देते हुए कुछ भी कह दिया तो खालिस्तानी संगठनों के नाराज होने का खतरा है।

गिल ने खोली थी पोल

पंजाब चुनाव से ठीक पहले केपीएस गिल ने ही आम आदमी पार्टी और केजरीवाल की पोल खोली थी। उन्होंने कहा था कि अगर पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तो राज्य में आतंकवाद की वापसी से कोई नहीं रोक पाएगा। उन्होंने राज्य में अपने सूत्रों के हवाले से दावा किया था कि आम आदमी पार्टी और खालिस्तानी आतंकी संगठनों के बीच बेहद करीबी रिश्ते हैं। पंजाब में दोबारा मजबूत होने के लिए ये संगठन मौके की तलाश में हैं और आम आदमी पार्टी इसके लिए उनकी मददगार बनने को राजी हुई है। अब केपीएस गिल के जाने से केजरीवाल को पंजाब में अपना आधार फैलाने का मौका नजर आ रहा है। केपीएस गिल के उस बयान पर रिपोर्ट हमने न्यूज़लूज़ में भी पोस्ट की थी।

रिपोर्ट पढ़ें: पंजाब में आप जीती तो आतंकवाद लौटेगा!

खालिस्तानियों का दबाव

केजरीवाल 29 मई को पंजाब के दौरे पर भी जा रहे हैं। राज्य में करारी हार के बाद कहा गया था कि केजरीवाल अब पूरी तरह दिल्ली पर फोकस करेंगे, लेकिन इस दौरान उन पर पंजाब जाने का दबाव भी बना रहा। बहाना है कि केजरीवाल इस दौरे में अपने वोटरों को धन्यवाद देंगे, लेकिन हमारी जानकारी के मुताबिक इस दौरे में भी उनकी कट्टरपंथी खालिस्तानी संगठनों के साथ बैठकें तय हैं। ऐसी आशंका भी है कि राज्य में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के बारे में भी रणनीति तय हो सकती है।

आम आदमी पार्टी के रवैये पर शेखर गुप्ता का ट्वीट आप नीचे देख सकते हैं।

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