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मोदी जी, छोटी लड़ाइयां छोड़िए असली युद्ध में आइए

सामने से उठते हुए तूफान पर अगर आँखें फेर लें तो क्या तूफ़ान अपनी दिशा बदल देगा? इतिहास के दिए घाव अगर मिट नहीं पा रहे तो क्या इतिहास मिटाने से घाव भी मिट जायेंगे? मित्रों, पुरानी पीढ़ियों से अगर संवाद किया जा सकता हो तो 15 पीढ़ी पहले के बाप-दादाओं से मैं ये ज़रूर पूछता कि 17 बार… जी हाँ एक, दो, तीन नहीं… 17 बार महमूद ग़ज़नी हमारी छाती कैसे रौंद गया? किस नशे में, किस आमोद में, किस भोग में डूबे थे आप लोग… एक वहशी हिंदुकुश जैसे पर्वत, सिंधु जैसी दस बड़ी नदियाँ, बार-बार पार करके कश्मीर से लेकर कन्नौज और सोमनाथ से लेकर मथुरा… सब कुछ लूटता चला गया। असंख्य महिलाओं के चीर, असंख्य निर्बलों की हत्या से वो हमारी नदियों का पानी लाल करता गया। हमारे स्वाभिमान को पैरों तले कुचलता गया। और आप देखते रहे। आज सवाल उन लाशों के ढेर का नहीं है। आज सवाल ये है कि आप लोगों की कायरता ने इस देश के एक हज़ार साल मलिन कर दिए। इतिहास बताता है कि आपकी चूक ने अगली पंद्रह पीढ़ियां को अपने ही घरों में सदियों तक गुलाम रखा।

क्या हज़ार साल बाद हम कोई दूसरी चूक फिर तो नहीं करने जा रहे हैं? आज 2017 में हिमालय के उस पार भले ही कोई चंगेज़ खान नहीं है। भले ही कोई मंगोल नहीं है। लेकिन आज हिमालय के उस पार माओ का वो वामपंथी चीन खड़ा है जो हमे लीलना चाहता है। वो घात लगाए बैठा है लेकिन हमारी पीढ़ी उससे वैसे ही मुंह फेर रही है, जैसे हज़ार साल पहले की पीढ़ी ने चंगेज़ खान से मुंह फेर लिया था। तब की लड़ाई तो तलवार भाले की थी जिसे हम हारे थे और अब की लड़ाई इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट की है। कारखानों-फैक्टरियों की है। यूआन, येन और रुपए की है। यह लड़ाई भी शायद आज हम हारते से दिख रहे हैं। वो हमारी ओर बढ़ रहा है। हमे घेरता जा रहा है लेकिन हम कहीं और देख रहे हैं।

हमारी प्रतिस्पर्धा पाकिस्तान या अरब से नहीं है। हमारी मुसीबत आरक्षण और रंग-वर्ण नहीं है। हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य गरीबी से दो-दो हाथ करना नहीं है। हमारा मूल लक्ष्य चीन और सिर्फ चीन है। हमें चीन से आज उसके कारखाने हर लेने है। हमें चीन से उसका उत्पादन छीन लेना है। हमे चीन से उसकी 12 ट्रिलियन डॉलर की अर्थशक्ति लूटनी है। आज इतिहास की सुई हमें पलटनी हैं। आज हमें खुद चंगेज़ जैसा बाहुबली बनना है। आज हम विश्व की सबसे सशक्त 6 अर्थव्यवस्थाओं में एक हैं लेकिन हमे तेज़ी से आगे बढ़ना होगा क्योंकि चीन कुछ ही वक़्त में अमेरिका को पीछे धकेल दुनिया का नंबर एक सुपरपावर बनने जा रहा है। वक़्त कम है और लक्ष्य बहुत बड़ा है।

मोदी जी, यूं तो स्वच्छ भारत, डिजिटल भारत, एक भारत श्रेष्ठ भारत सब ठीक है। लेकिन अब आपको सिर्फ केदारनाथ तक नहीं जाना है। अब आपको केदारनाथ के उस पार देखना है। आँख खोलकर देखिये… चंगेज़ खान बनकर माओ का चीन हमारा इंतज़ार कर रहा है। इस माओ से निपटिए। संकोच नहीं करना है। एलानिया निपटिए। अगर इस ड्रैगन को निपटा डाला तो कश्मीर, असम, वर्ण, सवर्ण, आरक्षण, गरीबी, बेरोज़गारी जैसे अभिशाप
खुद ही निपट जाएंगे। मोदी जी, राहुल, ममता, पटनायक छोड़िए। असली रणभूमि में उतरिए।

अर्थ महायुद्ध की रणभूमि में।

उठाइए गांडीव

साधिये तीर

वो देखिये

सामने चीन है

अगर चूक गए तो

ये सदी हमारे हाथों से निकल जाएगी।

(सीनियर जर्नलिस्ट दीपक शर्मा की फेसबुक वॉल से साभार)

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