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रोने वाली आईपीएस अफसर की असलियत देखिए!

बायीं तस्वीर उन दो महिलाओं की हैं जो चारू निगम के नासमझी भरे लाठीचार्ज का शिकार बनीं। नीली साड़ी पहने महिला 5 महीने की प्रेगनेंट है।

यूपी के गोरखपुर में महिला पुलिस अधिकारी से बीजेपी के विधायक की कथित बदसलूकी के मामले में नया मोड़ आ गया है। मीडिया में खबरें चल रही हैं कि स्थानीय विधायक राधा मोहन अग्रवाल ने ट्रेनी आईपीएस अधिकारी चारू निगम को इतनी बुरी तरह डांटा की वो रो पड़ीं। लेकिन चैनलों और अखबारों में इस पूरे झगड़े की असली कहानी नहीं बताई गई। यह बात सामने आई है कि विधायक के गुस्से से ठीक पहले चारू निगम ने उसी जगह पर महिलाओं और बच्चों के प्रदर्शन के खिलाफ लाठीचार्ज का आदेश दिया था। शराब के ठेके का विरोध कर रही महिलाओं और उनके साथ मौजूद छोटे-छोटे बच्चों को बुरी तरह पीटा गया। खुद चारू निगम ने भी इस दौरान महिलाओं पर लात-घूंसे बरसाए। एक प्रेगनेंट महिला ने सामने आकर बयान दिया है कि उन्होंने उसके पेट पर लात से मारा था। साथ ही उसकी बुजुर्ग मां के साथ भी धक्कामुक्की की। चारू निगम दलील दे रही हैं कि महिलाओं ने उन पर पथराव किया, जबकि मौके पर मौजूद स्थानीय पत्रकारों और चश्मदीदों के मुताबिक ऐसा कुछ नहीं हुआ था। गलती चारू निगम की थी, लेकिन उन्होंने आंसू बहा दिया और दिल्ली में बैठे पत्रकारों ने उन्हें फौरन पीड़ित मान लिया और बीजेपी विधायक को खलनायक बना दिया। (नीचे देखें घटना का वीडियो)

अफसर के आंसू का पूरा सच!

लाठीचार्ज की घटना के बाद जब बीजेपी विधायक राधामोहन दास अग्रवाल को खबर मिली तो वो मौके पर पहुंचे। वो मौके पर मौजूद एसडीएम से बात कर रहे थे तो बीच में चारू निगम ने टोका-टोकी शुरू कर दी, जिस पर वो भड़क गए और चुप रहने को कहा। जिसके बाद वो वहीं पर रोने लगीं। हो सकता है कि पहली नजर में विधायक का बर्ताव गलत हो। लेकिन उससे भी बड़ी गलती चारू निगम कर चुकी थीं। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से चक्का जाम कर रही महिलाओं को समझाने-बुझाने और बड़े अधिकारियों को बुलाने के बजाय खुद ही लाठीचार्ज का आदेश दे दिया। जिस महिला के पेट पर उन्होंने लात मारी वो पांच महीने की गर्भवती है। तब से उसके पेट में दर्द है और उसे अस्पताल भी ले जाना पड़ा। जिस 70 साल की महिला को लाठी मारी गई उसकी हालत अब भी खराब है। इसके अलावा चारू निगम के ही आदेश पर 7 महिलाओं को जीप में ठूंस कर थाने ले जाया गया। जहां उनके साथ गाली-गलौज और बदसलूकी भी की गई। बाद में प्रदर्शनकारी महिलाओं पर झूठे आरोप लगा दिए गए कि वो पथराव कर रही थीं, जबकि मौके पर मौजूद मीडिया और दूसरे चश्मदीदों के मुताबिक महिलाओं ने कोई हिंसा नहीं की थी।

ठेके पर क्या था विवाद?

बताया जा रहा है कि यहां चिलुआताल थाना क्षेत्र के तीन गांवों में शराब के ठेके खोले गए थे। गांव वाले इसका विरोध कर रहे थे। करीब 15 दिन पहले गांववालों ने विरोध प्रदर्शन किया तो एसडीएम ने आदेश दिया कि तीनों ठेके इन गांवों में नहीं खुलेंगे। दो ठेके तो बंद हो गए, लेकिन एक तीसरा ठेका फिर से खुलने लगा। इससे नाराज महिलाओं ने सड़क पर चक्काजाम लगा दिया। असिस्टेंट एसपी चारू निगम हालात को काबू करने मौके पर पहुंचीं और महिलाओं की बात सुनने या समझाने-बुझाने के बजाय उनसे सीधे भिड़ने लगीं और देखते ही देखते लाठीचार्ज का आदेश दे दिया। जबकि नियम के मुताबिक उन्हें पहले इलाके के थानेदार को बुलाना चाहिए था। क्योंकि महिलाओं का आरोप था कि थानेदार ने पैसे लेकर उस ठेके को फिर से खुलने दिया है।

देखें वीडियो:
यह वीडियो पुलिस कार्रवाई से ठीक पहले का है। आप खुद देख सकते हैं कि महिलाओं के पास न तो कोई लाठी-डंडा है और न ही उन्होंने कोई पथराव किया।


चारू निगम की बर्बरता की शिकार महिला का बयान देखने के लिए अगले पेज (2) पर क्लिक करें

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