Home » Loose Top » क्या फिल्मों की तरह अब विज्ञापन भी सेकुलर होंगे?
Loose Top

क्या फिल्मों की तरह अब विज्ञापन भी सेकुलर होंगे?

ग्राहकों को लुभाने के लिए विज्ञापनों में कंपनियां तरह-तरह के फॉर्मूले आजमाती हैं। देशभक्ति से लेकर धर्म तक का इस्तेमाल विज्ञापनों में होते देखा गया है, लेकिन शायद पहली बार एक कंपनी अपना सामान बेचने के लिए सेकुलरिज्म का फॉर्मूला आजमा रही है। एलजी रेफ्रीजरेटर का एक विज्ञापन इन दिनों चैनलों पर खूब चल रहा है। इस विज्ञापन में खास तौर पर मुसलमानों को टारगेट करने की कोशिश की गई है। ‘फ्रिज ऑफ इंडिया’ सीरीज के विज्ञापन में यूं तो कोई गड़बड़ नहीं है, लेकिन इसका जो मैसेज है उसे लेकर सोशल मीडिया पर विरोध की आवाज उठ रही हैं। विज्ञापन में दिखाया गया है कि एक हिंदू परिवार में कोई पार्टी चल रही है। पार्टी में एक परिवार पहुंचता है। पहनावे से लगता है कि वो मुसलमान परिवार है। मेहमान महिला के हाथ में कुछ सामान होता है जिसे वो फ्रिज में रखना चाहती है। मेजबानी कर रही महिला उसे घर के अंदर ले जाती है और फ्रिज में सामान रखने का इशारा करती है। इस पर मुस्लिम पहनावे में दिख रही महिला कहती है कि हमारे लिए तो जगह ही नहीं है। इस पर मेजबान जवाब देती हैं कि आपके लिए तो स्पेशल जगह है मोहतरमा। (एलजी का ये विज्ञापन नीचे देखें)

विज्ञापन के मैसेज पर ऐतराज

विज्ञापनों में एक-एक लाइन बहुत सोच-समझकर और उसके असर को नाप-तौलकर लिखी जाती हैं। इस विज्ञापन में मुस्लिम दिख रही महिला कहती है कि “हमारे लिए तो जगह ही नहीं है”। इस पर हिंदू महिला जवाब देती है कि “आपके लिए तो स्पेशल जगह है मोहतरमा”। यूं तो यह आम बातचीत लगती है लेकिन इसका छिपा हुआ मैसेज आप खुद समझ सकते हैं। इस विज्ञापन के जरिए दिखाया गया है कि देश में मुसलमान पीड़ित हैं और उनको लगता है कि उनके लिए कोई जगह नहीं है। लेकिन ‘फ्रिज ऑफ इंडिया’ यानी एलजी के फ्रिज में बहुत जगह है। उसमें मुसलमानों के लिए तो स्पेशल जगह है। आम तौर पर विज्ञापनों में इस तरह के मैसेज कभी नहीं दिए जाते। क्योंकि कोई फ्रिज टीवी जैसे प्रोडक्ट क्वालिटी के आधार पर बिकते हैं न कि किसी खास धर्म में अपनी अपील के लिए। जानकारों की राय में ये खतरनाक ट्रेंड है और इसे रोकने की जरूरत है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने एलजी के प्रोडक्ट्स के बायकॉट की भी अपील की है।

फिल्मों की बीमारी विज्ञापन को!

अब तक फिल्मों में चुपके से सेकुलरिज्म के ऐसे मैसेज देना आम बात रही है। हाल ही में आई आमिर खान की दंगल में बिना मतलब एक मुसलमान कसाई का किरदार घुसाया गया था जो कि अल्ला का नेक बंदा है। इससे पहले की तमाम फिल्मों में भी बहुत सोचे-समझे तरीके से कहानी में टोपी पहनने वाले मुसलमानों को सच्चे ईमान वाला, जबकि जनेऊ और तिलक लगाने वाले पंडित को लालची और धूर्त के तौर पर दिखाया जाता रहा है। लंबे समय में समाज में लोगों पर इसका बुरा असर भी पड़ा है। किसी भी प्रोडक्ट को बेचने के लिए इस तरह से इशारों-इशारों में धर्म का इस्तेमाल शायद पहली बार है। एलजी का यह विज्ञापन हिंदुओं को बुरा बताता तो नहीं दिखता, लेकिन ये खराब शुरुआत है। फिल्मों और मीडिया की ही तरह विज्ञापन के क्षेत्र में भी जिहादी सोच वालों का बोलबाला है। अब तक कारोबारी मजबूरियों के कारण वो अपना खास असर नहीं दिखा सके, लेकिन आगे चलकर ऐसे ही छिपे मैसेज से हिंदू धर्म को बदनाम करने की भी कोशिश की जा सकती है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। एलजी के रेफ्रीजरेटर का ये पूरा सेकुलर विज्ञापन आप नीचे लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं।

कुछ साल पहले भी इस तरह का एक मामला सामने आया था, जब शाहरुख खान पेप्सी का और ऋतिक रौशन कोक का विज्ञापन किया करते थे। उस समय मुसलमानों के इलाकों में अचानक कोक की बिक्री गिर गई थी। दावा किया जाता है कि पेप्सी ने उन इलाकों में यह बात उड़वाई थी कि उनका कोल्ड ड्रिंक मुसलमानों के लिए ठीक है, जबकि हिंदू हीरो के विज्ञापन वाला कोक मुसलमानों को नहीं पीना चाहिए। जब ये बात तब की मीडिया में आई तो इस पर काफी विवाद भी पैदा हुआ था। एलजी का विज्ञापन इसी ट्रेंड की दोबारा शुरुआत हो सकती है।

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें


कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।

comments

अपनी लिखी पोस्ट या जानकारी साझा करें 

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...

Donate to Newsloose.com

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें

Popular This Week

Don`t copy text!