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बंगाल में बीजेपी हार गई, लेकिन ममता टेंशन में होंगी!

बीजेपी के लिए विधानसभा उपचुनाव में पश्चिम बंगाल के नतीजे बेहद अहम हैं। यहां कंठी दक्षिणी विधानसभा सीट पर हुए चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल के उम्मीदवार को जीत मिली है। लेकिन इस जीत से भी बड़ी खबर ये है कि पहली बार यहां बीजेपी दूसरे नंबर पर रही है। बीजेपी को यहां 31 फीसदी वोट हासिल हुए हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 56 फीसदी वोट मिले। बंगाल की राजनीति पर कभी एकछत्र राज करने वाले कम्युनिस्ट तीसरे नंबर पर रहे हैं। पूर्वी मिदनापुर जिले की इस सीट पर सीपीआई के उम्मीदवार को सिर्फ 10 फीसदी वोट मिले हैं। यानी बंगाल में दूसरे स्थान की रेस में बीजेपी वामपंथी पार्टियों से काफी आगे निकल गई है। बीजेपी को 2011 के विधानसभा चुनाव में बंगाल में सिर्फ 4 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन 2016 में हुए चुनाव में पार्टी ने जोरदार तरीके से करीब 10 फीसदी वोट हासिल किए। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी बंगाल में बीजेपी को 17 फीसदी के करीब वोट मिले थे। अब एक सीट पर उसका 31 फीसदी वोट पाना एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। इसी लेख में नीचे आप बंगाल की कंठी दक्षिण सीट पर मतगठना के आंकड़े देख सकते हैं।

बीजेपी के टारगेट पर है बंगाल

यूपी में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद उसके टारगेट पर अब बंगाल ही है। बीजेपी ने बीते 3 से 4 साल में बंगाल में अपना आधार मजबूत किया है। लगभग हर जिले में पार्टी के कार्यकर्ताओं का काडर खड़ा हो चुका है। साथ ही आरएसएस के संगठन ढांचे का भी उसे सहयोग मिलता रहा है। ऐसे में चुनाव दर चुनाव बीजेपी का प्रदर्शन मजबूत हो रहा है। पार्टी 2021 के चुनाव से पहले ऐसी स्थिति हासिल कर लेना चाहती है कि बंगाल में चुनाव ममता बनाम बीजेपी हो। विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से आने वाले कल की साफ झलक देखी जा सकती है। फिलहाल ममता की पार्टी तृणमूल और बीजेपी के वोट शेयर के बीच बहुत बड़ा फासला है। लेकिन बीजेपी राज्य में जिस तरह से अपना जनाधार फैला रही है, उसे देखते हुए अगले 3 से 4 साल में इस अंतर को पाटना बहुत मुश्किल भी नहीं लग रहा है। पिछले दिनों कोलकाता में आरएसएस का एक बड़ा कार्यक्रम हुआ था। इसमें जुटी भारी भीड़ बंगाल में हिंदुत्ववादी शक्तियों के उभार के बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

ममता की नीतियों से नाराजगी

बंगाल में ममता बनर्जी की मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति से लोगों में भारी गुस्सा है। अभी तक बीजेपी के कमजोर होने के कारण उसके समर्थक वोट इधर-उधर छिटक जाते थे। लेकिन जैसे-जैसे बीजेपी मजबूत हो रही है। बीजेपी के पक्ष में एक तरह का ध्रुवीकरण भी देखने को मिल रहा है। यही कारण है कि राज्य में पिछले कुछ साल में हिंदुओं और बीजेपी के नेताओं के दमन की घटनाएं तेज़ हुई हैं। साथ ही मुस्लिम आबादी के फैलाव के कारण लोगों में भारी बेचैनी है। यहां के दो-तीन जिलों में तो मुसलमान बहुसंख्यक हो चुके हैं और वहां पर आम हिंदू परिवारों का रोजी-रोटी चलाना मुश्किल हो गया है। बीजेपी की बढ़ती ताकत के साथ ही वामपंथी दल और कांग्रेस कमजोर हो रही है। कंठी उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार को सिर्फ 1 फीसदी से कुछ ज्यादा वोट मिले हैं।

सियासी जानकारों के मुताबिक बंगाल एक तरह के ध्रुवीकरण की तरफ बढ़ रहा है। ममता अभी तक सेकुलर हिंदुओं और मुस्लिम वोटों के दम पर जीतती रही हैं। लेकिन उनकी नीतियों से हिंदू समुदाय में बेचैनी बढ़ रही है। खास तौर पर जिस तरह से ममता ने बीते कुछ साल में बंगाल को जिहाद का अड्डा बना दिया है उससे साफ है कि बंगाल में भी असम की तरह हिंदू ध्रुवीकरण की स्थिति बन रही है। ऐसी स्थिति में अगर 2021 में नतीजे बिल्कुल उलट आएं तो किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए।

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