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अक्षय को नेशनल अवॉर्ड से सेक्यूलरिज्म खतरे में है!

फिल्म रुस्तम के लिए अक्षय कुमार को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने से देश में कुछ लोगों के कलेजे पर सांप लोट गया है। बेस्ट एक्टर कैटेगरी के लिए अक्षय के नाम का क्या एलान हुआ सेकुलर ब्रिगेड ने मातम मनाना शुरू कर दिया। इतने लंबे एक्टिंग करियर में ढेरों बेहतरीन फिल्मों के बावजूद अक्षय को यह सम्मान पहली बार मिला है। इस बात से जहां उनके प्रशंसक खुश हैं, वहीं कुछ ज्यादा ही सेक्युलर लोगों ने उन्हें ये अवॉर्ड दिए जाने पर रोना-गाना शुरू कर दिया है। ऐसे लोगों का दर्द बस इतना सा है कि अक्षय कुमार ने पिछले दिनों उनके मोदी विरोधी प्रोपोगेंडा में उनका साथ नहीं दिया, जैसा साथ उनको शाहरुख़ और आमिर खान से मिला। यहाँ तक कि अक्षय कुमार ने पिछले दिनों सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल खड़ा करने वालों पर भी एक वीडियो संदेश जारी करके अपना रोष जताया था। यह बात भी सेकुलर ब्रिगेड को हजम नहीं हुई। अब यह बात सीधे-सीधे तो नहीं कही जा सकती, इसलिए सवाल खड़ा किया जा रहा है कि पिछले दिनों आई फिल्म दंगल जिसने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़े दिए उसमें अभिनय के लिए आमिर खान को यह पुरस्कार क्यों नहीं दिया गया? यह साबित किया जा रहा है कि अक्षय कुमार को अवॉर्ड देकर आमिर खान के साथ नाइंसाफी की गई है।

आमिर को सम्मान क्यों नहीं?

आमिर खान के साथ पक्षपात का आरोप लगाने वाले यह बात भूल जाते हैं कि आमिर खान प्रोडक्शन के बैनर तले बनी फिल्म दंगल में तथ्यों के साथ बुरी तरीके से छेड़खानी की गई थी। फिल्म को पहलवान गीता और बबीता फोगट और उनके पिता पहलवान महावीर फोगट की जिंदगी पर आधारित बताया गया था। लेकिन फिल्म में कुछ तथ्यों को बड़ी सफाई से बदल दिया गया। आमिर ने फिल्म में जबर्दस्ती सेकुलरिज्म का तड़का लगवाया। फिल्म में दिखाया गया है कि पटियाला स्पोर्ट्स एकेडमी में गीता फोगट के गुरु यानी कोच पीएल सोंधी गीता के खिलाफ साजिशें रच रहे हैं। जबकि ऐसा कभी कुछ नहीं हुआ। महावीर फोगट पर कुछ रोकटोक जरूर लगी थीं, लेकिन वो स्पोर्ट्स फेडरेशन के नियमों के कारण। उन्हें जिस तरह से बाथरूमनुमा स्टोर रूम में बंद करवाया गया, दरअसल वैसा कभी कुछ नहीं हुआ। महावीर फोगट ने गैलरी में खड़े होकर अपनी बेटी का मुकाबला देखा था। यह सब अभिनेता होने के बावजूद बिना आमिर खान की इच्छा के संभव नहीं था।

पढ़ें: ‘दंगल’ में आमिर खान के जिहादी एजेंडे के 5 सबूत

NDTV को सबसे ज्यादा मिर्ची

सोशल मीडिया पर अक्षय कुमार को बधाई देने वालों का ताता लगा हुआ है,  लेकिन एनडीटीवी चैनल को वो कुछ गिने-चुने लोग ही दिखे जो अलग-अलग कारणों से अक्षय कुमार को नेशनल अवॉर्ड दिए जाने का विरोध कर रहे थे। सोशल मीडिया पर दिए गए कमेंट्स का सहारा लेते हुए सेकुलरिज्म का झंडा बुलंद करने वाले एनडीटीवी ने भी ‘अक्षय कुमार को ‘रुस्तम’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार देकर मज़ाक बना दिया’ नाम से एक स्टोरी पब्लिश की है। नीचे आप उस पोस्ट की झलक देख सकते हैं जिसमें अक्षय को राष्ट्रीय पुरस्कार दिए जाने पर चैनल ने बेहूदा मज़ाक किया है।

एनडीटीवी ही नहीं, कई दूसरे चैनलों और वेबसाइट्स ने अक्षय कुमार का मज़ाक बनाते हुए स्टोरी पब्लिश की हैं। जबकि ये वही हैं जो खान अभिनेताओं की बकवास फिल्मों को अवॉर्ड दिए जाने पर जुबान तक नहीं खोला करते थे।

 

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