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नीतीश ने बीजेपी संग मनाई रामनवमी, लालू को नो एंट्री

बिहार में नीतीश कुमार और बीजेपी की करीबियों की कहानियां जारी हैं। पटना में रामनवमी के मौके पर हुए प्रोग्राम में नीतीश ने कई बीजेपी नेताओं और हिंदू गुरुओं के साथ मंच साझा किया। इनमें केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, सुशील मोदी और प्रेम कुमार भी शामिल थे। साथ ही राज्यपाल रामनाथ कोविद भी प्रोग्राम में शामिल रहे। नीतीश को इस मौके पर आयोजित शोभा यात्रा का भी न्यौता भेजा गया था। कार्यक्रम और शोभा यात्रा का आयोजन पटना से बीजेपी के विधायक नितिन नवीन और संजीव चौरसिया ने किया था। खास बात यह रही कि प्रोग्राम में लालू यादव या उनके दोनों बेटों तेजप्रताप और तेजस्वी को नहीं बुलाया गया था। रामनवमी के इस कार्यक्रम ने राज्य में नीतीश कुमार और बीजेपी के बीच बढ़ते प्रेम की अटकलों को एक बार फिर हवा दे दी है। ऐसी बातें चल रही हैं कि बहुत जल्द नीतीश लालू यादव का साथ छोड़कर बीजेपी के साथ गठबंधन की सरकार बना सकते हैं। अब तक इसके कई संकेत सामने आ चुके हैं, रामनवमी का ये प्रोग्राम भी उन्हीं में से एक है।

‘पहले नहीं आते थे नीतीश’

कार्यक्रम के आयोजक नितिन नवीन ने कहा कि पहले नीतीश बुलावे के बावजूद इस कार्यक्रम में नहीं आया करते थे। लेकिन अब उन्होंने आने की शुरुआत की है। इस बार पटना में दो दर्जन से ज्यादा रामनवमी शोभा यात्राएं निकली थीं, जो शहर के अलग-अलग हिस्सों से होते हुए डाक बंगला चौक पर पहुंचीं। यहां पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में ही नीतीश कुमार शामिल हुए। हालांकि कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मंच पर ही सीएम नीतीश पर ये कहते हुए हमला बोल दिया कि नवादा में रामनवमी की शोभा यात्रा को सरकार ने रोक दिया। दरअसल वहां पर सांप्रदायिक दंगे हुए थे, जिसके बाद प्रशासन ने रामनवमी के जलूस पर रोक लगा दी। गिरिराज सिंह ने मांग की कि शोभा यात्रा को न रोका जाए और ये राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि कार्यक्रम को सुरक्षा मुहैया करवाए।

लालू-नीतीश में बढ़ी है दूरी

दरअसल बिहार में कानून-व्यवस्था की खराब हालत और लालू यादव की पार्टी के नेताओं की बयानबाजियों के चलते नीतीश कुमार को ये लगने लगा है कि साझीदार के तौर पर बीजेपी ही ठीक थी। बीजेपी और नीतीश की मिलीजुली सरकार के दौर में बिहार में विकास के बहुत सारे काम हुए थे, जिसके कारण नीतीश की भी लोकप्रियता बढ़ी, लेकिन लालू यादव के साथ मिलकर सरकार चलाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। यहां तक खबर आ चुकी है कि लालू यादव ने यूपी चुनाव के बाद नीतीश को हटाकर अपने बेटे को सीएम बनाने की भी तैयारी कर ली थी। लेकिन वो मामला समय रहते खुल गया और लालू अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो सके।

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