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डीयू की ये बहादुर लड़की गुंडा नहीं, असली हीरो है!

दिल्ली के रामजस कॉलेज के बाहर मारपीट के मामले की एक अलग ही तस्वीर सामने आ रही है। अखबारों में एक तस्वीर छपी जिसमें एक लड़की एक लड़के को पीटती हुई दिख रही है। वामपंथी छात्र संगठनों ने इस तस्वीर के आधार पर दावा किया कि एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने उन पर हमला किया। अब तस्वीर में दिख रही लड़की दीक्षा वर्मा ने खुद आगे आकर अपना पक्ष रखा है। डीयू की छात्रा दीक्षा ने बताया है कि हंगामे के दिन वो मौके पर मौजूद थी। दीक्षा ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए बताया है कि हंगामे के दिन मौका पाकर एक लड़के ने उसके साथ छेड़खानी की कोशिश की, जिसके बाद उसने लड़के को मौके पर ही धुन दिया। इस तस्वीर को दिखाकर लेफ्ट संगठनों ने मीडिया की मदद से यह साबित करने की कोशिश की कि एबीवीपी के छात्रों ने उनसे मारपीट की। जबकि सच्चाई कुछ और ही है। 22 फरवरी के दिन रामजस कॉलेज में देशद्रोह के आरोपी उमर खालिद और शेहला राशिद का सेमीनार था। बाद में प्रशासन ने सेमीनार रद्द कर दिया। इसके बावजूद वहां जुटे वामपंथी छात्रों ने न सिर्फ हंगामा मचाया, बल्कि कश्मीर की आजादी के नारे भी लगाए।

छेड़खानी के बाद पिटाई हुई

दीक्षा वर्मा ने फेसबुक पर बताया है कि उस लड़के ने मौका देखकर पहले उस पर हमला किया। फिर कपड़े फाड़ने की कोशिश की। दीक्षा ने अपने फटे कपड़ों की तस्वीरें भी फेसबुक पर पोस्ट की हैं। दीक्षा ने बताया है कि बुधवार को हुई इस घटना के वक्त दोनों पक्षों के लोग बेहद गुस्से में थे। लेकिन कुछ लड़के इस मौके का इस्तेमाल लड़कियों को निशाना बनाने में कर रहे थे। जिस लड़के की दीक्षा ने पिटाई की वो वामपंथी छात्र संगठन आइसा से जुड़ा हुआ है। वामपंथी छात्र संगठनों ने अखबारों में छपी इस तस्वीर को इस्तेमाल करते हुए फेसबुक और ट्विटर पर दीक्षा को ‘गुंडा’ कहकर बदनाम करना शुरू कर दिया। इस इकलौती तस्वीर के अलावा दीक्षा किसी को भी पीटती नहीं दिख रही है। उसने अपने शरीर पर लगी खरोंच और चोट के निशानों की तस्वीरें शेयर की हैं और बताया है कि किस तरह वो आइसा, एसएफआई और दूसरे छात्र संगठनों के लड़कों की बदसलूकी का शिकार बनी। दीक्षा ने कहा है कि कोई भी लड़का मेरे साथ ऐसा बर्ताव करेगा तो मैं वही करूंगी जो मैंने किया। मीडिया को मेरा साथ देना चाहिए था, लेकिन उन्होंने मुझे गुंडा घोषित कर दिया। लेकिन अगर अपनी आत्मरक्षा करना गुंडागर्दी है तो मैं यह कहलाने में मुझे कोई एतराज नहीं है।

दीक्षा ने एक वीडियो संदेश जारी करके लोगों से अपील की है कि वो मीडिया की पक्षपाती रिपोर्टिंग के कारण गलत राय न बनाएं।

दीक्षा सक्सेना को बदनाम कराने के लिए वामपंथी और आम आदमी पार्टी से जुड़े छात्रों ने बाकायदा एक पोस्टर बनाकर सोशल मीडिया पर फैलाना शुरू किया था। खास तौर पर गुरमेहर कौर नाम की आम आदमी पार्टी समर्थक छात्रा छेड़खानी करने वाले लड़कों के बचाव में काफी सक्रिय रही। इस बात पर दीक्षा ने ट्विटर पर उसे जवाब दिया है कि “हां मैंने ही छेड़खानी कर रहे उस लड़के को पीटा है और मुझे इस पर गर्व है। तुम लोगों को अपने महिलावाद पर शर्म आनी चाहिए।”

मीडिया ने झूठी खबरें फैलाईं

सबसे खास बात यह रही कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और वामपंथी संगठनों के बीच हुए झगड़े में मीडिया ने बड़ा अहम रोल निभाया। चैनलों और अखबारों ने पहली नजर में ही इसे एबीवीपी के छात्रों का हमला मान लिया। जबकि सच्चाई यह थी कि मारपीट में वामपंथी संगठनों के छात्र भी शामिल थे। तस्वीरों और वीडियो में कई वामपंथी छात्र हाथों में रॉड लिए और छात्रों को मारते-पीटते दिखाई दे रहे हैं। द हिंदू अखबार ने ऐसी ही एक तस्वीर में मारने वाले एसएफआई के नेता को एबीवीपी का बता डाला। बाद में सोशल मीडिया पर इस झूठ की पोल खुलने के बाद भी हिंदू अखबार माफी मांगने को तैयार नहीं है। सबसे हैरानी की बात यह रही कि सड़क पर गुंडागर्दी करने वाले प्रशांत मुखर्जी नाम का ये लड़का उसी शाम एनडीटीवी पर बैठकर बता रहा था कि कैसे एबीवीपी वालों ने उन्हें घेरकर बुरी तरह मारा। मतलब एनडीटीवी एक अपराधी को नेता बनाने की कोशिश करता रहा। अब जब सच्चाई सामने आ रही है ये सभी मीडिया संस्थान चुप्पी साधे हुए हैं। ट्विटर पर कई लोगों ने इसे लेकर नाराजगी जताई है।

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