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यूपी में पहला राउंड बीजेपी का, जाटों ने पलटा खेल

यूपी में पहले दौर की वोटिंग में बीजेपी को अच्छी खासी बढ़त मिलने के आसार हैं। आज दिन 73 सीटों पर वोट पड़े उनमें से ज्यादातर जाट बहुल इलाकों में पड़ती हैं। सबकी नजरें जाट वोटरों पर थीं कि वो किसकी तरफ रुख करते हैं। आरक्षण आंदोलन के कारण ऐसी खबरें चल रही थीं कि जाट वोटर बीजेपी के खिलाफ वोट कर सकते हैं, लेकिन जमीन पर ये दावा गलत साबित हो गया। यह साफ हो गया है कि ज्यादातर जाटों ने आखिरी वक्त में बीजेपी के पक्ष में जोरदार वोटिंग की है। सिर्फ उन्हीं जाट वोटरों को बीजेपी खींचने में कामयाब नहीं हो पाई, जो पहले से आरएलडी के वोटर माने जाते रहे हैं। पहले दौर में हुई 64 फीसदी वोटिंग को भी बीजेपी के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

काम आई अमित शाह की रणनीति

जाट आरक्षण को लेकर बने नकारात्मक माहौल के बावजूद भाजपा ने जाट समुदाय को खुश करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। खुद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इस काम की जिम्मेदारी संभाल रखी थी। पहले दौर में जिन सीटों पर वोट डाले गए उनमें 15 से 25 फीसदी तक जाट आबादी है। बीजेपी इन वोटरों को यह समझाने में कामयाब रही कि अगर समाजवादी पार्टी या बीएसपी की सरकार बनेगी तो ये उनके लिए ठीक नहीं होगा। क्योंकि इन दोनों पार्टियों की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति का सबसे बड़ा शिकार जाट समुदाय ही हुआ है। इसके अलावा गन्ना किसानों में भी मौजूदा सपा सरकार के खिलाफ नाराजगी साफ दिख रही थी। ऐसे में जबकि जाट समुदाय को सपा-कांग्रेस की जीत का खतरा दिख रहा था, उन्होंने ऐन मौके पर बीजेपी का साथ देने का फैसला किया।

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बीजेपी को 35 से 40 सीट की उम्मीद

पहले दौर में भाजपा के रणनीतिकारों ने 73 में से कम से कम 40 सीट जीतने का लक्ष्य रखा था। आज के ट्रेंड्स से उसे 35 से 40 सीट अपनी झोली में आने की उम्मीद दिख रही है। 2012 में इन्हीं सीटों में से पार्टी को सिर्फ 10 सीटें ही मिली थीं, लेकिन 10 सीटों पर वो बहुत कम अंतर से नंबर दो रही थी। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां की 14 में से 13 सीटें झटक ली थीं। पिछले चुनाव में बीजेपी को इन 73 में से 25 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार के जातीय समीकरण में उसे सीधे-सीधे नुकसान होता दिख रहा है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी को 24 सीट और कांग्रेस को 5 सीटें मिली थीं। इनमें से ज्यादातर सीटों पर उसका जीत का अंतर बहुत कम था। लिहाजा समाजवादी पार्टी के लिए ये दौर बहुत आसान नहीं कहा जा सता।

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सपा, बसपा और रालोद में बंटे वोट

पश्चिमी यूपी के जिन 15 जिलों में पहले दौर की वोटिंग हुई है उनमें ज्यादातर जगहों पर एसपी-कांग्रेस, बीएसपी और अजित सिंह की राष्ट्रीय लोकदल के बीच वोटों का बंटवारा हुआ है। ये वो वोट थे जो गैर-बीजेपीवाद के नाम पर पड़ते हैं। इनमें मुस्लिम, यादव, दलित और कुछ दूसरे जातीय समुदायों के वोट शामिल हैं। इन सभी सीटों पर मुस्लिम वोटर भी आखिरी वक्त तक ये तय नहीं कर पाए कि वो किस पार्टी के साथ जाना पसंद करेंगे। ज्यादातर जगहों पर मुसलमानों के वोट अलग-अलग पार्टियों में बंटने के आसार हैं।

नीचे एक नजर सोशल मीडिया पर चल रही बातचीत की एक झलक:

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