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सेकुलरिज़्म की आग में झुलस गया यूपी का देवरिया

यूपी के देवरिया में इस्लामी कट्टरपंथियों के तांडव की खबरें मीडिया ने लगभग पूरी तरह दबा दीं। दो दिन पहले यहां पर हजारों मुसलमानों की एक भीड़ ने हिंदुओं की कई दुकानों में तोड़फोड़ और लूटमार की और एक पुलिस थाने को आग के हवाले कर दिया था। लेकिन किसी भी बड़े अखबार या चैनल ने ये खबर नहीं दिखाई, अगर किसी ने दिखाई तो उन्होंने भी ऐसे बताया मानो ये कोई छिटपुट हिंसा का मामला हो। ये हालत तब है जब देवरिया के एसपी पर दंगाइयों पर नरमी बरतने के आरोप लग रहे हैं। एसपी खुद भी शांतिदूतों के समुदाय के हैं और आरोप है कि इनके आने के बाद जिले में सांप्रदायिक हिंसा बढ़ी है। एक के बाद एक कई दंगों के बावजूद इन एसपी की नौकरी पूरी तरह सुरक्षित है।

साजिश के तहत हिंदुओं पर हमला

देवरिया के मदनपुर थाना क्षेत्र में रहमतुल्ला नाम का एक लड़का कुछ दिन पहले लापता हो गया था। बुधवार को उसकी लाश बरामद हुई। पुलिस जब परिवारवालों को लाश सौंपने के लिए पहुंची तो वहां जो कुछ हुआ उसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी। हजारों की तादाद में हथियारबंद लोगों ने थाने को चारों ओर से घेर लिया। इन लोगों ने पहले पुलिसवालों को मारा-पीटा और फिर थाने में लूटपाट करने के बाद आग लगा दी। थाने के आसपास हिंदुओं की दर्जनों दुकानों में भी जमकर लूटपाट हुई और जाते-जाते उनमें भी आग लगा दी गई। इलाके में खड़े जो भी वाहन दिखे उन्हें भी आग के हवाले कर दिया गया। हमले में कई पुलिसवालों को गंभीर चोट आई है। यह सवाल उठ रहा है कि एक घंटे के अंदर इतनी बड़ी घटना कैसे हो गई। खुद पुलिस भी मान रही है कि घटना के पीछे किसी तरह की सोची-समझी साजिश है।

दंगाइयों से नरमी, पीड़ितों पर सख्ती

हैरानी की बात ये है कि थाना और आसपास के इलाकों में आग लगाने वाले दंगाइयों पर पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। इनमें से कई को लोग पहचान भी रहे हैं, लेकिन पुलिस जांच के बहाने मामला टालने की कोशिश करती दिख रही है। हिंसा के तांडव का विरोध करने के लिए कुछ स्थानीय व्यापारी जब सड़कों पर उतरे तो पुलिस ने उन्हें लाठियों के दम पर भगा दिया। यह बात भी सामने आ रही है कि दंगाइयों की भीड़ ने जब थाने पर हमला बोला तो पुलिसवालों ने आत्मरक्षा के लिए हथियारों का इस्तेमाल करने के लिए बड़े पुलिस अधिकारियों से अनुमति मांगी, लेकिन मुसलमानों का मामला होने के कारण प्रशासन ने किसी कार्रवाई की छूट देने से मना कर दिया। हमले से पहले की कुछ तस्वीरें भी वायरल हुई हैं, जिनमें हथियारबंद लोगों को देखा जा सकता है, हालांकि इन तस्वीरों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।

देवरिया और पूर्वी यूपी के कई इलाकों में मुसलमानों की हिंसा के कई मामले हो चुके हैं, लेकिन इन मामलों में प्रशासन दंगाइयों का साथ देता दिखता है। ऊपर से मीडिया भी यहां की सच्चाई को दबाने में जुटा है, ऐसे में लोग सोशल मीडिया पर यहां की सच्चाई को बयान करने में जुटे हैं।

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