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मायावती के खजाने का भंडाफोड़, अबतक 110 करोड़!

नोटबंदी के बाद से मायावती क्यों इतना बौखलाई हुई थीं, इसका पता चल गया है। दिल्ली के करोलबाग में यूनियन बैंक की ब्रांच में मायावती के खजाने का पता चला है। इस ब्रांच में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के अधिकारियों को मायावती के करीब 110 करोड़ रुपये मिले हैं। हालांकि अभी इसे शुरुआत माना जा रहा है। रकम उम्मीद से काफी ज्यादा भी हो सकती है। ब्रांच में बहुजन समाज पार्टी यानी बीएसपी के नाम से 105 करोड़ रुपये और मायावती के भाई आनंद कुमार के नाम से 1.43 करोड़ रुपये जमा कराए गए थे।

नोटबंदी के बाद जमा कराई गई रकम

जांच में पता चला है कि सारी रकम 8 नवंबर को नोटबंदी का एलान होने के बाद जमा कराया गया था। इसके लिए गाड़ियों में भर-भर के पुराने नोटों की गड्डियां लाई गई थीं। छापे में मिली रकम और जांच की पूरी जानकारी ईडी अब इनकम टैक्स विभाग को सौंप देगा। जो जानकारियां अब तक सामने आई हैं, उनके मुताबिक बीएसपी के खाते में 105 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम 7 बार में जमा कराई गई थी। इसी तरह मायावती के भाई आनंद कुमार के खाते में 3 बार में 18 लाख रुपये के पुराने नोट डाले गए। जबकि करीब सवा करोड़ रुपये इंटरनेट ट्रांसफर के जरिए जमा हुए। ईडी पता लगा रहा है कि ये पैसे किसने भेजे थे। ऐसा बताया जा रहा है कि ये रकम किसी फर्जी कंपनी के जरिए खाते में भिजवाई गई है।

बीएसपी और भाई को नोटिस जाएगा

सूत्रों के मुताबिक इनकम टैक्स विभाग बहुत जल्द बहुजन समाज पार्टी और मायावती के भाई को नोटिस भेजकर पूछेगा कि उन्हें ये पैसा कहां से मिला और उन्होंने किस आधार पर इसे बैंक में जमा करवाया। इनकम टैक्स की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। सूत्रों के मुताबिक फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट अब बीएसपी, मायावती और उनके भाई की वित्तीय लेनदेन के दूसरे सुराग लगा रही है। क्योंकि माना जाता है कि जो रकम पकड़ी गई है वो कुल पैसे का एक हिस्सा भर है। कई और बैंकों में इसी तरह पैसे जमा कराए गए होंगे।

पहले से जांच के दायरे में आनंद कुमार

बसपा सुप्रीमो मायावती का भाई आनंद कुमार बीते कुछ वक्त से जांच के दायरे में है। इनकम टैक्स विभाग ने उसे बेनामी प्रॉपर्टी के कारोबार के सिलसिले में पूछताछ के लिए भी नोटिस भेजा है। इसी मामले में कई बिल्डर जांच के दायरे में हैं। ये वो बिल्डर हैं जिनके कारोबार में आनंद कुमार की बेनामी हिस्सेदारी है। इस केस में आयकर विभाग के पास जो शिकायत दर्ज की गई है उसे X-कैटेगरी का यानी ‘बहुत गंभीर’ माना गया है।

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