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चीन में सफाई जारी, 5000 से ज्यादा मस्जिदें ढहाईं

चीन में इन दिनों मस्जिदों के सफाये का काम चल रहा है। पिछले तीन महीने के अंदर पांच हजार से ज्यादा मस्जिदों को बुलडोजर से ढहाया जा चुका है। चीन के जिनझियांग प्रांत में सबसे ज्यादा आबादी मुसलमानों की है और यहां नई-पुरानी हजारों मस्जिदें थीं। चीनी अधिकारियों का आरोप है कि यहां कट्टरपंथी और आतंकवादी बनाने की ट्रेनिंग दी जाती थी। चीन सरकार ने एक ‘सफाई अभियान’ के तहत इन मस्जिदों को ढहाने का आदेश दिया था। चीन दुनिया का पहला देश है जिसने औपचारिक तौर पर इस्लाम पर पाबंदी लगाई हुई है।

रिपोर्ट पढ़ें: चीन ने अपने देश में इस्लाम पर पाबंदी लगाई

सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक मस्जिदें इसलिए तोड़ी जा रही हैं, क्योंकि वो बहुत पुरानी हो गई हैं और उनके गिरने का खतरा है। लेकिन न्यूज एजेंसी ने प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से बताया है कि मस्जिदों को हटाने का काम ‘शुद्धीकरण’ के तौर पर किया जा रहा है। मस्जिदों के अंदर आतंकवादी तैयार किए जाते हैं, इसलिए इन ढांचों के बने रहने की छूट नहीं दी जा सकती। जिनझियांग में उइघुर मुसलमान रहते हैं। ये कट्टरपंथी सुन्नी मुसलमान होते हैं। पिछले कुछ साल से इनके आतंकी हमलों से तंग आकर चीन ने इस्लाम धर्म मानने पर ही पाबंदी लगा दी थी और अब मस्जिदों के सफाये का काम शुरू किया गया है। एक अनुमान के मुताबिक चीन में करीब 5 करोड़ मुसलमान रहते हैं, इनमें से ज्यादातर उइघुर हैं। बताया जाता है कि चीन सरकार लंबी अवधि की एक रणनीति के तहत अगले 50 से 100 साल में चीन से इस्लाम को पूरी तरह खत्म करने की रणनीति पर काम कर रही है।

आतंकवादियों की तलाश का काम भी तेज़

मस्जिदों को ढहाने के साथ-साथ इस्लामी आतंकवादियों की तलाश का काम भी तेज़ कर दिया गया है। ये आतंकवादी आए दिन सरकारी बिल्डिंगों और कार्यक्रमों पर हमले करते रहते हैं। अक्टूबर में इस्लाम पर पाबंदी के फैसले के बाद ऐसे हमलों की संख्या और भी बढ़ गई है। जिसके बाद मस्जिदों को तोड़ने और आतंकियों की तलाशी की कार्रवाई शुरू की गई है। एक अधिकारी ने बताया कि अब तक 70 फीसदी मस्जिद तोड़ी जा चुकी हैं और अगले महीने तक चीन को पूरी तरह से मस्जिदों से मुक्त कर लिया जाएगा। साथ ही अब तक हजारों उइघुर आतंकवादियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

मस्जिदों की जगह पर बाजार या टायलेट!

जो मस्जिदें तोड़ी गई हैं उनमें से ज्यादातर की जमीन पर बाजार खोलने या पब्लिक टायलेट बनाने के आदेश दिए गए हैं। क्योंकि जगहों को खाली छोड़ने पर वहां पर फिर से नमाज पढ़े जाने का खतरा था। पूरा अभियान पीपुल्स रिपब्लिक आर्मी की देखरेख में चलाया जा रहा है। सेना की मौजूदगी की वजह से किसी तरह के विरोध-प्रदर्शनों की आशंका नहीं रहती है। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर किसी ने विरोध किया तो उसे या तो सेना गिरफ्तार करके जेल में डाल देगी या उसे फौरन गोली मार दी जाएगी।

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