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जानिए 1000 की जगह 2000 के नोट क्यों चलाए

क्या आप अभी तक इस सवाल का जवाब नहीं ढूंढ पाए हैं कि सरकार ने 1000 का नोट हटाकर उसकी जगह 2000 के नोट क्यों शुरू कर दिए? कई लोग यह सवाल पूछ रहे हैं और यहां तक शक जता रहे हैं कि ऐसा करने से ब्लैकमनी रखने वालों का काम और आसान हो जाएगा, क्योंकि अब वो कम जगह में ज्यादा काला धन रख सकेंगे। दरअसल इसके पीछे सरकार की जो ट्रिक है वो आम लोग तो नहीं समझ सके, लेकिन वो लोग फौरन समझ गए जिन्हें घर पर पड़ी अपनी काली कमाई कहीं पर खपानी थी। क्योंकि इसकी वजह से वो लोग बैंकों के जरिए ब्लैक को ह्वाइट बनाने का काम नहीं कर पाए। चार्टर्ड एकाउंटेंट मेहुल शाह ने इस सवाल का जवाब देने की कोशिश की है।

अगर 1000 का नोट जारी होता तो क्या होता?

सूरत के सीए मेहुल शाह के मुताबिक 2000 के नोट की जगह अगर 1000 रुपये के ही नए नोट जारी किए जाते, तो ब्लैकमनी रखने वालों के लिए इस पैसे को फिर से ब्लैकमनी में कनवर्ट करना बहुत आसान होता। एकाउंटिंग की भाषा में इसे तरीके को “पीक थ्योरी” कहते हैं। इसे उन्होंने एक उदाहरण से समझाया है।

“मान लीजिए किसी व्यक्ति के पास 1000-1000 की नोट की शक्ल में 1 लाख रुपये काला धन है। इस व्यक्ति को इस पैसे के 10-10 नोट के कुल 10 बंडल बनाने होंगे। सुबह यह शख्स 10 नोट का एक बंडल बैंक में जमा करेगा और शाम को वो रकम बैंक से निकाल लेगा। इस पैसे को वो घर पर लॉकर में रख देगा। इसके बाद असली खेल शुरू होता है। दूसरे दिन वो व्यक्ति 10 नोट का अगला बंडल बैंक में जाकर जमा करेगा। ऐसे लोगों की बैंक मैनेजर से सेटिंग हो सकती है जिससे वो आराम से बिना लाइन में लगे पैसे जमा करवा देगा। दूसरे दिन की शाम को वो व्यक्ति एक बार फिर से 1000-1000 रुपये की वैल्यू में 10 हजार रुपये बैंक से निकालकर अपने घर पहुंचा देगा। अब बाकी बचे 80 हजार रुपये के पुराने नोट। इसके बाद आगे का काम अगले हफ्ते किया जाएगा, क्योंकि एक हफ्ते में 20 हजार की लिमिट लगी हुई है। कुल मिलाकर 10 दिन यही काम करना होगा और आखिर में वो व्यक्ति अपनी 1000-1000 की सारी पुरानी करंसी को नई करंसी में कनवर्ट करा चुका होगा। कानून और बैंक की नज़रों में वह व्यक्ति रोज एक ही 1000-1000 के नोट लेकर आता है, जमा कराता और शाम को वापस निकाल लेता है। इस तरह उसक पास सिर्फ 10 हजार रुपये ही हैं। यानी एक लाख में से 90 हजार अभी भी ब्लैकमनी बना रहेगा और सरकार की सारी कोशिश फेल हो जाएगी।”

आसान नहीं करंसी का यह गोरखधंधा पकड़ना!

तमाम जांच एजेंसियां अक्सर इसे पकड़ नहीं पातीं क्योंकि ऐसे लोग आम ईमानदार लोगों के बीच में आसानी से छिप जाते हैं। ईमानदार लोगों को भी अक्सर किसी काम के लिए बैंक से रकम निकालने की जरूरत होती है, जिसे कई बार काम न होने पर वापस उसी या अगले दिन बैंक में वापस जमा करना पड़ता है। ऐसे लाखों-करोड़ों ट्रांजैक्शन में एक चोर को पकड़ना लगभग नामुमकिन होता है।

2000 के नोट से कैसे फंसे ब्लैकमनी वाले?

2000 के नए नोट जारी करने की वजह से पीक थ्योरी का सारा खेल गड़बड़ हो गया है। कल्पना कीजिए कि उदाहरण वाला वही व्यक्ति जिसके पास 1 लाख रुपये काला धन पड़ा हुआ है वो बैंक में जाकर 10 हजार रुपये जमा करवाएगा। शाम को जब वो बैंक से पैसे निकालने जाएगा तो उसे 2000-2000 रुपये की 5 नोट वापस मिलेंगी। वो इसे अपने घर के लॉकर में रख देगा। अगले दिन फिर वो 10 हजार का अगला बंडल बैंक में जमा करेगा लेकिन वो यह नहीं कह पाएगा कि उसने वही बंडल जमा किया है जो कल उसने बैंक से निकाला था। क्योंकि उसे 5 नोट ही मिले थे। इस तरह से ब्लैकमनी का सारा खेल पकड़ा जाएगा। क्योंकि बैंक स्लिप में नोट की संख्या दर्ज होती है उसका नंबर नहीं।

अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय ने इसकी दो और वजहें बताई हैं। पहला यह कि नीति आयोग ने कुछ वक्त पहले सिफारिश दी थी कि 2000 रुपये के नोट लाना जरूरी है। क्योंकि बड़ी नोट पर छापने पर कम खर्च आता है। साथ ही इन नोटों की उम्र ज्यादा होती है क्योंकि लोग इन्हें संभालकर इस्तेमाल करते हैं। दूसरा कारण यह कि नोटबंदी के बाद अचानक ज्यादा पैसे की डिमांड होगी, जिसे पूरा करने के लिए 1000 की जगह 2000 का नोट देना बेहतर विकल्प होगा।

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