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डीटीसी से ब्लैकमनी सफेद करा रहे हैं केजरीवाल?

दिल्ली में आम आदमी पार्टी क्या डीटीसी (दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन) के जरिए अपना 500 और 1000 रुपये का कैश चेंज करवा रही है? बीते 4-5 दिन से यह बात लगातार उठ रही है कि डीटीसी यात्रियों से छोटे नोट तो बटोर रही है, लेकिन सरकारी खजाने में बड़े नोट जमा कराए जा रहे हैं। डीटीसी बसों में 8 नवंबर के बाद से ही 500 और 1000 की नोट लेना बंद कर दिया गया था, जबकि दिल्ली सरकार चाहती तो लोगों को राहत के लिए बसों में छूट दिलवा सकती थी। डीटीसी की रोजाना की कमाई करीब 3 करोड़ रुपये है।

डीटीसी से बदलवाया जा रहा है काला धन?

नोटबंदी के बाद से ही केजरीवाल सरकार ने दिल्ली परिवहन निगम के कंडक्टरों को सख्त हिदायत दे दी कि वो अब 500 और 1000 के नोट नहीं ले सकते। वैसे भी इन लोकल बसों में ज्यादातर मुसाफिर 100 रुपये तक के छोटे नोट के जरिए ही किराया देते हैं। ये सारा कैश डीटीसी के डिपो में जमा होता है और उसके बाद बैंकों में जमा कराया जाता है। बताया जा रहा है कि ये सारी रकम छोटे नोट में नहीं, बल्कि 500 और 1000 के नोट के रूप में जमा कराए गए हैं। सीधे तौर पर शक दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी की तरफ है। देखिए सोशल मीडिया पर लोगों ने किस तरह इस मुद्दे को उठाया है।

नोटबंदी से आप को हुआ है भारी नुकसान!

लगातार यह बात सामने आ रही है कि 500 और 1000 के नोट बंद होने से आम आदमी पार्टी को भारी चूना लगा है। यह आरोप है कि पार्टी ने पंजाब चुनाव लड़ने के लिए खालिस्तान समर्थकों से हवाला के जरिए भारी रकम मंगाई थी। इसके अलावा दिल्ली में शराब के ठेके बांटने में भी जमकर रिश्वत चलने के आरोप लगते रहे हैं। पीएम मोदी के कदम से यह सारी रकम डूब गई है। कुछ दिन से लगातार यह अटकलें लग रही हैं कि आखिर आम आदमी पार्टी या उसके जैसे दूसरे राजनीतिक दल अपनी काली रकम को सफेद बनाने के लिए क्या जुगाड़ कर रहे हैं। जाहिर है इनकम टैक्स और बैंकिंग एजेंसियों को इस बात की जांच करनी चाहिए कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है और अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं पर सख्त कार्रवाई जरूर होनी चाहिए।

यूपी और कुछ दूसरे राज्यों में भी ही खेल

बताया जा रहा है कि यूपी और कुछ दूसरे राज्यों में भी ब्लैकमनी को सफेद करने के लिए रोडवेज जैसे सरकारी विभागों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रोडवेज इनमें सबसे ज्यादा प्रचलित है क्योंकि वहां पर यात्रियों से ज्यादातर किराया छोटे नोट में मिलता है। राज्यों में सरकार चला रही पार्टियां छोटे नोट वाली इस सारी रकम को अपने काले धन से बदल लेती हैं और बड़ी नोटें सरकारी खजाने में जमा करवा देती हैं।

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