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मोदी जी देश के नेताओं और मीडिया पर रहम कीजिए!

दीपक शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं
दीपक शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं
अगर भाइयों में झगड़ा ना हों, अगर बहन से मतभेद न हों और फिर भी उन्हें प्रधानमंत्री के दफ्तर से एक हज़ार किलोमीटर दूर रखा जा रहा है तो ये मानना होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में इच्छाशक्ति है। आगे बढ़कर बाउंसर गेंद को हिट करने की इच्छाशक्ति है उनमे। 15 वर्ष से पीएमओ, साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक की सक्रिय रिपोर्टिंग में मैंने दत्तक दामादों से लेकर दत्तक दलालों को प्रधानमंत्री के घर में जाते-घुसते देखा है। सूटकेस के लिए बदनाम प्रधानमंत्री आवास में कई लीलाएं देखी हैं। कई हथकंडे रिपोर्ट किये हैं।

पिछले ढाई साल में मैंने देखा कि एक बार माँ हीराबेन को छोड़कर मोदी से मिलने अबतक उनके परिवार का कोई दूसरा सदस्य नही आया। मार्च 2015 को मोदी के छोटे भाई प्रह्लाद राशन दुकानदारों के एक प्रदर्शन में दिल्ली जरूर आये थे लेकिन प्रधानमंत्री आवास नही गए। तब उनसे मेरे एक पत्रकार मित्र ने सवाल किया कि “आप नरेंद्र भाई के घर या दफ्तर क्यों नहीं गए? आप अहमदाबाद से दिल्ली आये हो तो एक बार भाई से मिलने तो जाना चाहिए था?” इस सवाल पर प्रह्लाद ने कहा कि मेरी राशन की दुकान है और राशन दुकानदारों के प्रदर्शन में भाग लेने दिल्ली आया हूं। बड़े भाई को वो निजी मुलाकात के लिए डिस्टर्ब करना नही चाहते। उन्होंने कहा कि मोदी तीन बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने लेकिन उनसे निजी मुलाकात सिर्फ एक बार हुई।

जो प्रह्लाद मोदी का हाल है वही हाल बाकी तीन भाइयों और एक बहन का भी है। कोई फैक्टरी में वर्कर था तो कोई स्कूल में टीचर है। मोदी के एक फोन पर परिवार के किसी भी सदस्य की दुनिया बदल सकती थी लेकिन मोदी ने किसी कि सिफारिश नही की। अपने वजूद और खून के लिए ऐसी सिफारिश ना करने के लिए बड़ी प्रचंड इच्छाशक्ति चाहिए। ऐसी इच्छाशक्ति 70 साल की सरकार में अबतक सिर्फ पटेल के पास थी या थोड़ी बहुत अाडवाणी के पास।

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी अपने परिवार को मेडिकल सुविधा के अलावा कोई और सरकारी सुविधा उपलब्ध नहीं कराते हैं। पीएम का निजी मोबाइल नंबर उनके सबसे छोटे भाई पंकज के पास अवश्य उपलब्ध रहता है, लेकिन कोई अहम संदेश देने के लिए ही पंकज अपने बड़े भाई को फोन करते हैं। पंकज भी पिछले ढाई साल में एक बार भी प्रधानमंत्री से दिल्ली में नहीं मिल सके हैं। उनकी प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात अब तक सिर्फ तीन बार अहमदाबाद में हुई है।

जिस प्रधानमंत्री के सगे भाई बहन अगर ऑटो रिक्शा पर चलते हों और दो बेडरूम के घर में रहते हों वो यक़ीनन किसी को ओब्लाइज नही करेगा ऐसा मेरा मानना है। वो फिर चाहे सुषमा की बेटी हों, मेनका का बेटा हो या फिर जेटली का परिवार। ओब्लाइज करना मोदी के शब्दकोष में नही है। कालेधन पर हमला बोलने के मामले में मोदी ने अपनी पूरी कैबिनेट तक को सीक्रेट खबर ऐनवक्त पर दी थी। मायावती, मुलायम या बादल परिवार को छोड़ दीजिए, कालेधन पर स्ट्राइक से मोदी के कई मंत्री तक घबराए हुए हैं।

बहरहाल मोदीजी बस एक सार्वजनिक आग्रह है। अब तक जो हुआ सो हुआ… अब आप कालेधन पर और सर्जिकल स्ट्राइक मत करियेगा। कोई बर्बाद हो न हो पर नंबर-2 के पैसे से चलने वाले कई राजनीतिक दलों के साथ साथ कई अखबार और चैनल तबाह हो जायेंगे।

मोदीजी देश के पत्रकारों और नेताओं पर रहम करिए। पब्लिक पहले से पीछे पड़ी थी अब आप भी…

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