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मोदी ‘भाईजान’ के नाम कौन भेज रहा है चिट्ठियां!

File Photo, Courtsey: WSJ and MEA

तीन तलाक को लेकर देश भर में छिड़े हंगामे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक एक लाख से ज्यादा चिट्ठियां मिल चुकी हैं। इनके जरिए पीएम मोदी से अपील की गई है कि वो तीन तलाक पर पाबंदी के सवाल पर कट्टरपंथियों के दबाव में न आएं और फैसले पर आगे बढ़ें। बोरों में भर-भरकर आ रही इन चिट्ठियों को भेजने वाली ज्यादातर मुस्लिम महिलाएं हैं। पिछले एक पखवाड़े में हर दिन दो हजार से ज्यादा चिट्ठियां मोदी के नाम से पहुंच रही हैं। प्रधानमंत्री के दिल्ली के पतों ही नहीं, बल्कि अहमदाबाद और वाराणसी में भी हर दिन ऐसी चिट्ठियां आ रही हैं। इन चिट्ठियों में कई ऐसी हैं जिनमें महिलाओं ने अपने नाम भी लिखे हैं।

मुस्लिम महिलाओं की आखिरी उम्मीद मोदी!

कई मुस्लिम महिलाओं ने लिखा है कि “अगर आपने तीन तलाक पर पाबंदी नहीं लगाई तो आगे यह काम कोई नहीं करेगा। सारी उम्मीद आपसे ही है और हम इस फैसले में आपके साथ हैं।” एक महिला ने अपने ख़त में लिखा है कि “हम मुस्लिम औरतें सड़कों पर उतरकर धरने-प्रदर्शन तो नहीं कर सकतीं, लेकिन हम आपके साथ हैं।” ऐसी महिलाओं की संख्या भी बहुत ज्यादा है, जिन्होंने अपने चिट्ठियों में प्रधानमंत्री मोदी को अपना भाई कहकर संबोधित किया है। एक चिट्ठी में लिखा गया है कि इस मसले पर हमें आपकी मंशा पर कोई शक नहीं है। चिट्ठी लिखने वालों में कई डॉक्टर, इंजीनियर, सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स और टीचर भी हैं। ये चिट्ठियां अंग्रेजी, हिंदी और यहां तक कि उर्दू में भी लिखी गई हैं। देशभर से भेजी गई ये चिट्ठियां क्षेत्रीय भाषाओं में भी हैं। सबसे ज्यादा चिट्ठियां हिंदी में लिखी गई हैं। बड़ी तादाद में पीएम दफ्तर और MyGov वेबसाइटों पर भी मुस्लिम महिलाओं ने अपनी फरियाद दर्ज कराई है।

“हमारे बच्चों की खातिर ये जुल्म बंद कराएं”

कुछ महिलाओं ने प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठियों में अपनी आपबीती सुनाई है। एक महिला ने लिखा है कि कैसे तीन लड़कियों के पैदा होने के बाद शौहर ने उसे घर से निकाल दिया। आज उसके और बेटियों के पास खाने को भी पैसे नहीं हैं। उस महिला ने लिखा है कि “हम अपनी जिंदगी तो जैसे-तैसे काट लेंगे, आप मेरी बेटियों को अपनी बेटी समझकर कुछ ऐसा कर दीजिए ताकि उनको जिंदगी में कभी ऐसी ज़लालत का सामना न करना पड़े।” कई महिलाओं ने घर में खुद पर हो रहे जुल्म का भी जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि तलाक के डर से वो अपनी जुबान बंद रखने को मजबूर हैं। एक महिला ने लिखा है कि “टीवी पर तीन तलाक के फेवर में दिए जा रहे बयान सुन रही हूं। ये लोग झूठ बोलते हैं। इन लोगों ने एक आम मुस्लिम औरत की जिंदगी को दोज़ख (नर्क) से भी बदतर कर दिया है। जिन औरतों को तलाक नहीं भी दिया जाता है, वो भी तलाक के खौफ में जिंदगी बसर करती हैं।”

इन तमाम बातों के अलावा जो खास बातें इन चिट्ठियों में हैं, वो कुछ इस तरह से हैं-

  • लड़कियों के लिए शादी की उम्र 18 साल से ऊपर होनी चाहिए।
  • मेहर की न्यूनतम रकम तय होनी चाहिए।
  • तीन तलाक पर पूरी तरह से पाबंदी होनी चाहिए।
  • एक से ज्यादा शादी को गैर-कानूनी ठहराया जाए।
  • गुजारा भत्ता शौहर की जिम्मेदारी होनी चाहिए, भले ही औरत कमा रही हो।
  • हलाला को कानूनन अपराध घोषित किया जाए।
  • हिंदुओं की तरह मुस्लिम शादियों का रजिस्ट्रेशन जरूरी हो।

मुस्लिम कट्टरपंथियों के खिलाफ भारी गुस्सा

लगभग सभी चिट्ठियों में एक बाद कॉमन है, वो है- मुस्लिम धर्मगुरुओं के लिए महिलाओं में छिपी नाराजगी। कई महिलाओं ने इस बात को लिखा है कि ये लोग अपने फायदे के लिए कभी नहीं चाहेंगे कि तीन तलाक खत्म हो। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लिए भी महिलाओं में भारी गुस्सा है। प्रधानमंत्री के नाम से जा रही चिट्ठियों का ये अंबार मुस्लिम समाज के अंदर ही अंदर बरसों से सुलग रहे गुस्से का विस्फोट मालूम होता है। हैरत की बात यह है कि मजहब के नाम पर जो मुस्लिम मर्द नेता तीन तलाक की वकालत कर रहे हैं उन्हें ही इस बात का एहसास नहीं है कि पैरों तले जमीन खिसकती जा रही है।

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