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सेना नहीं मानेगी, लेकिन हमले की खबर पक्की है!

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में घुसकर कमांडो ऑपरेशन की खबर का सेना भले ही खंडन कर रही है, लेकिन हमारे सूत्रों के मुताबिक यह खबर सच है। आम तौर पर सेना ऐसे ऑपरेशंस की पुष्टि नहीं करती, जिसके कारण कोई अंतरराष्ट्रीय समझौता टूटता हो। पिछले दिनों म्यांमार में भी उग्रवादियों के ट्रेनिंग कैंप पर हमले की खबर की सेना ने कभी भी औपचारिक तौर पर पुष्टि नहीं की। 20 और 21 सितंबर की रात को उरी सेक्टर से लगे पीओके के इलाकों में यह ऑपरेशन हुआ था। भारतीय सेना के पारस कमांडो यूनिट के जवानों ने एलओसी के पास चल रहे एक बड़े ट्रेनिंग कैंप को तबाह कर दिया। हमले में 20 आतंकवादियों के मारे जाने जबकि 200 से ज्यादा के घायल होने की खबर भी आई।

कमांडो ऑपरेशन पर थी पीएम की नज़र!

सूत्रों के मुताबिक यह जानकारी सामने आ रही है कि 20 और 21 तारीख की रात पीएम मोदी देर रात तक साउथ ब्लॉक में ही रुके रहे थे। आम तौर पर वो शाम 7-8 बजे तक अपने सरकारी आवास के लिए रवाना हो जाते हैं। वैसे तो पीएम मोदी अक्सर साउथ ब्लॉक में अपने दफ्तर में देर रात तक काम करते हैं, लेकिन उस रात वो अपने दफ्तर में न होकर रक्षा मंत्रालय के वॉर रूम में थे। पीएम का दफ्तर और रक्षा मंत्रालय बिल्कुल अगल-बगल ही है। किसी भी युद्ध की स्थिति में रक्षा मंत्रालय के वॉर रूम से सारा ऑपरेशन कंट्रोल किया जाता है। पीएम मोदी करीब दो घंटे तक वॉर रूम के अंदर रहे। इस दौरान उनके साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, थल सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग, वायु सेना प्रमुख अरूप राहा, और नौसेना चीफ एडमिरल सुनील लांबा मौजूद थे।

निशाने की पहचान के बाद ऑपरेशन शुरू

हमारे सूत्रों के मुताबिक सबसे पहले आर्मी चीफ ने प्रधानमंत्री को संभावित टारगेट के बारे में बताया। साथ ही यह भी बताया कि यहां पर कितना और कितने वक्त में नुकसान पहुंचाया जा सकता है। उरी सेक्टर का इलाका ऑपरेशन के लिए सबसे मुफीद माना गया क्योंकि संभावना है कि आर्मी बेस पर हमला करने वाले आतंकवादी यहीं से आए थे। साथ ही इस लोकेशन पर पाकिस्तानी सेना की चौकसी लगभग न के बराबर थी। यहां से हेलीकॉप्टरों से एलओसी में घुसकर कम वक्त में ज्यादा नुकसान पहुंचाना आसान था।

‘ये न पहला हमला था, न आखिरी’

हमारे सूत्र का कहना है कि उरी के पास पीओके में हुई कमांडो कार्रवाई को बहुत तूल देना ठीक नहीं होगा। सेना पहले भी छोटे-मोटे पैमाने पर इस तरह की कार्रवाई कर चुकी है और आगे भी मौके और जगह का आंकलन करके ऐसे नियंत्रित और छोटे अटैक जारी रह सकते हैं। एलओसी पर ऐसे कई इलाके हैं जहां पाकिस्तानी चौकियां सीधे निशाने पर हैं। भारत पाकिस्तान के साथ किसी बड़े युद्ध में उलझना नहीं चाहता। लेकिन अब यह तय है कि पीओके के अंदर चलने वाले हर ट्रेनिंग कैंप के आतंकवादी रात में चैन से सो नहीं पाएंगे।

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