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स्वामी के सवालों पर ‘घोटालेबाज’ एनडीटीवी के 7 झूठ!

सुब्रह्मण्यम स्वामी के टारगेट पर एक बार फिर से एनडीटीवी है। दरअसल स्वामी ने मांग की थी कि एनडीटीवी के वित्तीय घपलों की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराई जाए। इसके बाद चैनल ने एक प्रेस रिलीज जारी करके स्वामी के आरोपों को झूठा करार दिया। एनडीटीवी ने इसमें कुल 7 दावे किए हैं जिनकी जांच pgurus.com नाम की एक वेबसाइट से पूरे विस्तार से की है।

एनडीटीवी का झूठ नंबर-1

चैनल का दावा है कि एस्ट्रो ऑल एशिया नेटवर्क्स के 4 करोड़ डॉलर के निवेश को जरूरी मंजूरी मिली हुई थी और ईडी ने कभी भी इस पर सवाल नहीं उठाया है। जबकि सच्चाई यह है कि ईडी ने एयरसेल-मैक्सिस केस की चार्जशीट में इस सौदे को ‘डाउटफुल’ कहा है। ईडी के अनुरोध पर ही 2जी केस के लिए बनी स्पेशल कोर्ट ने इस साल जनवरी में एक चिट्ठी लंदन भेजकर इस सौदे की जानकारी मांगी हैं।

झूठ नंबर-2

प्रणय रॉय की कंपनी का कहना है कि ईडी ने उस पर कभी भी 2030 करोड़ रुपये का जुर्माना नहीं लगाया। लेकिन यह दावा करते हुए एनडीटीवी ने शब्दों का बेहद चालाकी से इस्तेमाल किया है। तथ्य यह है कि एनडीटीवी पर फॉरेन एक्सचेंज मेंटेनेंस एक्ट (फेमा) के उल्लंघन का केस है और ईडी ने उसे 2030 करोड़ रुपये का नोटिस भेजा है। मामला फिलहाल कोर्ट में है। यह बात सही है कि जुर्माना नहीं लगा है। लेकिन आखिर कौन कह रहा है कि ईडी ने जुर्माना लगाया है?

झूठ नंबर-3

कंपनी की दलील है कि ब्रिटेन में रजिस्टर्ड उसकी कंपनी एनडीटीवी नेटवर्क्स में जिन लोगों के डायरेक्टर होने का दावा किया जा रहा है वो सरासर गलत है। यहां भी उसने अपनी सफाई में शब्दों से खेल किया है। इस कंपनी के सालाना रिटर्न में साफ-साफ लिखा है कि बरखा दत्त, सोनिया सिंह, विक्रम चंद्रा कंपनी के बड़े हिस्सेदारों में से एक हैं। ईडी और इनकम टैक्स इसकी जांच भी कर रहे हैं। इस साल 15 जून को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से भेजे पत्र में कहा गया है कि एनडीटीवी नेटवर्क्स लिमिटेड एक दिखावटी कंपनी थी। इस केस में 525 करोड़ का जुर्माना भी हुआ है।

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