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बुरहान प्रेमी पत्रकारों इन जवानों को भी दिखला दो!

ऐसे वक्त में जब मीडिया का एक बड़ा तबका कश्मीर के पत्थरबाजों के लिए हमदर्दी दिखाने में जुटा है, श्रीनगर के 92 आर्मी बेस हॉस्पिटल में घायल पुलिसवालों और सीआरपीएफ जवानों का तांता लगा हुआ है। इनमें से ज्यादातर बुरी तरह घायल हैं और उन्हें ग्रेनेड के छर्रों से चेहरे पर चोट लगी है। साफ है कि प्रदर्शनकारियों की आड़ लेकर आतंकवादी सुरक्षाबलों पर ग्रेनेड भी फेंक रहे हैं। सुरक्षा बलों के आगे मुश्किल यह है कि अगर उन्होंने गोली चलाई तो बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे जाएंगे। ऐसे में उन्हें इन बलवाइयों को भगाने के लिए पैलेट गन चलाने को मजबूर होना पड़ रहा है। आतंकवादी बुरहान वानी की मौत के बाद से कश्मीर में हिंसा का ये दौर शुरू हुआ है।

मीडिया नहीं दिखा रहा है दूसरी तस्वीर

दिल्ली की मीडिया का एक तबका पैलेट गन से घायल कश्मीरी पत्थरबाजों की कहानियां तो दिखा रहा है, लेकिन इन जवानों पर किसी की नज़र नहीं है। इनमें से कुछ कोमा में हैं तो कुछ की हालत बेहद नाजुक है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है। ये सभी पिछले 10 दिन की हिंसा में इस अस्पताल में लाए गए हैं। ये जवान इस बात का सबूत हैं कि सुरक्षा बलों पर कैसे सिर्फ पत्थरबाजी ही नहीं, बल्कि ग्रेनेड का भी इस्तेमाल हो रहा है। घायलों में से बिहार से लेकर केरल तक के जवान हैं। बड़ी संख्या जम्मू कश्मीर पुलिस के उन जवानों की है जो सीधे आतंकवादियों से लोहा लेती है।

बड़ी संख्या में मुस्लिम जवान भी घायल

जम्मू कश्मीर पुलिस के ये जवान घाटी में जगह-जगह थानों पर हुए हमलों और भीड़ को काबू करने की कोशिश में घायल हुए हैं। ज्यादातर को आंखों और सिर में चोट लगी है। सेना इन सभी का इलाज अपने अस्पताल में कर रही है। अलगाववादियों के हमलों में बीते 10 दिन में सुरक्षा बलों के कम से कम 28 जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस हिंसा में 2000 के करीब सिविलियन और करीब 1500 जवानों को छोटी-बड़ी चोट आई हैं। इनमें बड़ी संख्या उन जवानों की है जिन्हें ग्रेनेड के छर्रे लगे हैं।

पत्थरबाजों पर नहीं चलाई गई गोली

आर्मी बेस अस्पताल में भर्ती एक सीआरपीएफ जवान ने हमें बताया कि दंगाइयों पर सख्त कार्रवाई की हमें छूट मिली हुई है, लेकिन हमने कहीं भी पत्थरबाजों पर गोली नहीं चलाई। सख्ती सिर्फ उन्हीं जगहों पर हुई जहां पर भीड़ में से ग्रेनेड या पेट्रोल बम सुरक्षा बलों पर फेंके गए। सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी यह भी होती है कि वो झड़प में घायल होने वाले दंगाइयों को साथ-साथ अस्पताल पहुंचाने का भी इंतजाम करती रहे। इसके बावजूद कश्मीर में सुरक्षा बलों को मीडिया का एक तबका खलनायक बनाने की कोशिश कर रहा है।

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