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रवीश जी आपका पाखंड भी देश देख रहा है

neeraj badhwar
पत्रकार नीरज बधवार के फेसबुक पोस्ट से साभार
झूठे तथ्यों को आगे रखकर कैसे तय एजेंडे के तहत चर्चा की जाती है, इसका एक नमूना अभी रवीश कुमार के प्राइम टाइम में देखने को मिला। जब मैंने चर्चा देखनी शुरू की तो स्टूडियो में मौजूद संवाददाता इकबाल बता रहे थे कि बुरहान वानी ने सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को हथियार उठाने के लिए प्रेरित तो किया मगर पिछले 6 साल में ऐसी एक भी घटना सामने नहीं आई जिसमें बुरहान खुद किसी आतंकी घटना में शामिल रहा हो। रवीश ने इसी तथ्य को आगे रखकर बड़ी मासूमियत से राइज़िग कश्मीर के एडिटर शुज़ात बुखारी से पूछा कि जब वो खुद किसी आतंकी घटना में शामिल नहीं रहा तो वो युवाओं को कैसे मोटीवेट कर रहा था?

मैं ये देखकर बड़ा हैरान था कि जो कौम इतने दिनों से छाती कूट रही है कि अर्नब गोस्वामी को मोदी से ये पूछना चाहिए था, वो पूछना चाहिए था, क्या ऐसे लोगों को इतना भी नहीं पता कि इसी बुरहान वानी ने मार्च में सीआईएसएफ के 3 जवानों को मारने का दावा किया था…मेरे लिए ये यकीन करना बहुत मुश्किल है कि जो संवाददाता एक तरह से एक्सपर्ट की हैसियत से इस चर्चा में बैठा था वो इस तथ्य से वाकिफ नहीं, रवीश कुमार जो इतने बड़े मामले पर चर्चा करने बैठे हैं, उन्हें भी इस बात की बेसिक जानकारी नहीं।

चर्चा के दौरान शुज़ात बुखारी लगातार कश्मीर की समस्या को राजनीतिक समस्या बता रहे थे, क्या रवीश कुमार को ये भी नहीं पता कि इसी बुरहान वानी ने वीडियो जारी करके ये दावा किया था कि कश्मीरी पंडित यहां आए, तो मैं उनका कत्ल कर दूंगा। अगर पता था तो क्यों नहीं पूछा कि जो शख्स एक राजनीतिक समस्या के लिए लड़ रहा है वो उन्हीं पंडितों को मारने की बात क्यूं करता था, जो उसी कश्मीर के बाशिंदे रहे हैं?

बुखारी ने चर्चा के दौरान कहा कि किसी ने 2 सालों में कश्मीर की जनता से बात करने की कोशिश नहीं की सब सैनिकों और कश्मीरी पंडितों की कॉलोनी बसाने जैसे मामलों पर अपनी एनर्जी वेस्ट करते रहे। ये देखकर भी हैरान था कि रवीश ने इस पर भी बुखारी से नहीं पूछा कि बाकी सब तो ठीक है मगर कश्मीरी पंडितों की वहां कॉलोनी बनाने की बात करना एनर्जी या टाइम वेस्ट करना कैसे हो गया?

“आख़िर किसी को लेकर लोग कोई राय बनाते हैं तो वो हवा में नहीं बनाते। अगर रवीश या उनके संस्थान को लेकर भी लोगों की राय है तो उसके पीछे बड़ी जायज़ और ठोस वजह है।”

अगर कश्मीर की समस्या राजनीतिक है, तो क्या कश्मीरी पंडितों को वहां फिर से बसाना उसी समस्या को सुलझाने की तरफ एक कदम नहीं है। आज ही एक वेबसाइट के हवाल से ख़बर है कि जब बुरहान वानी की मां से इस मसले पर उनकी राय पूछी तो उन्होंने कहा कि वो मेरा बेटा कश्मीर में इस्लामी निज़ाम कायम करते हुए मारा गया।

बेटा कश्मीरी पंडितों को मारना चाहता है, मां को लगता है कि बेटा इस्लामी निज़ाम कायम करने की कोशिश में मारा गया और आप कह रहे हैं कि कश्मीर की समस्या साम्प्रदायिक नहीं, राजनीतिक है! ये भी एक ऐसा सवाल था जो रवीश पूछ सकते थे मगर नहीं पूछा गया। अब या उन्हें तो कश्मीर मसले की समझ नहीं या इस समझ को समझने की नीयत नहीं! जब आप नेताओं को दोगलेपन पर सवाल पूछते हैं तो इतना ख्याल रखना चाहिए कि आपका पाखंड भी दुनिया देख रही है। आख़िर दुनिया किसी को लेकर भी कोई राय बनाती है तो वो हवा में नहीं बनाती। अगर रवीश या उनके संस्थान को लेकर भी लोगों की राय है तो उसके पीछे बड़ी जायज़ और ठोस वजह है।

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