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वो हिंदू हैं इसलिए मीडिया को असहिष्णुता नहीं दिखी

कल्पना कीजिए क्या होगा अगर किसी स्कूल में गैर-हिंदू छात्रों को गायत्री मंत्र या सरस्वती वंदना करने को कहा जाए। ज़ाहिर है मीडिया से लेकर देश के बुद्धिजीवी तक आसमान सिर पर उठा लेंगे। जहां पर ऐसी घटना हुई अगर वहां पर बीजेपी की सरकार हुई तो इसके लिए सीधे प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहरा दिया जाएगा। लेकिन क्या होगा अगर किसी स्कूल में पढ़ने वाले हिंदू बच्चों से जबरन नमाज पढ़वाई जाए? अगर ऐसा हुआ तो कुछ नहीं होगा। सरकार और प्रशासन चाहे जो करे, लेकिन दिल्ली का मीडिया माफिया कान में तेल डाल लेगा।

हरियाणा के स्कूल में हिंदू बच्चों से पढ़वाई नमाज

हरियाणा के दिल्ली से सटे मेवात जिले के तावडू की यह घटना है। यहां ग्रीन डेल्ज़ पब्लिक स्कूल में एक मुस्लिम टीचर ने ईद मिलन समारोह के दौरान बच्चों को जबरन नमाज़ पढ़वाया। इतना ही नहीं, उन्हें कुरान पढ़ने को भी मजबूर किया गया। बच्चों ने घर जाकर जब यह बात अभिभावकों को बताई तब मामले ने तूल पकड़ा। हरियाणा पुलिस ने समझदारी दिखाते हुए वक्त रहते हालात को संभाल लिया। पुलिस ने थाने में ही पंचायत करवाई। इस पंचायत में स्कूल की मालिक हेमा शर्मा ने माना कि हिंदू बच्चों से नमाज के लिए जोर-जबरदस्ती की गई है। उन्होंने सफाई दी कि उन्होंने एक एनजीओ के जरिए ईद मिलन कार्यक्रम किया था। जिसमें दिल्ली से आए एक टीचर ने बच्चों के साथ यह जोर-जबरदस्ती की। वो इस बहाने धर्म का प्रचार करने की कोशिश कर रहे थे। फिलहाल पंचायत ने स्कूल पर 5.51 लाख रुपये जुर्माना और 2 साल तक फीस नहीं बढ़ाने की सज़ा दी है।

मीडिया से गायब हो गई यह ख़बर

धार्मिक आजादी और असहिष्णुता का रोना रोने वाले राष्ट्रीय मीडिया से यह खबर पूरी तरह गायब हो गई। जबकि यह खबर सभी अखबारों और चैनलों के पास भी थी। 6 जुलाई को हुई इस घटना को कुछ लोकल अखबारों को छोड़ दें तो कहीं भी जगह नहीं मिली। वैसे यह अच्छी बात है कि ऐसी भड़काऊ खबरें मीडिया में न ही छापी जाएं। लेकिन सवाल यही है कि क्या मीडिया दोनों धर्मों के लिए एक ही पैमाना अपनाता? जाहिर है ऐसा नहीं है। अगर मामला हिंदू छात्रों से जुड़ा होता तो अब तक मीडिया दंगे भड़काने की कोशिश में जुट चुका होता।

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