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हम लड़ते रहे, योग के दम पर जर्मनी चैंपियन बन गया!

देश में कई लोग अब भी इस बहस में पड़े हैं कि योग सेकुलर है या कम्युनल, उधर जर्मनी की फुटबॉल टीम योग के दम पर अपनी बादशाहत को बनाए हुए है। जर्मनी की टीम में कोच के अलावा एक फुल टाइम योग टीचर भी हैं। इनका नाम है पैट्रिक ब्रूम। जर्मनी के वर्ल्ड कप चैंपियन बनने का बड़ा श्रेय पैट्रिक को दिया जाता है। अभी यूरो कप फुटबॉल चल रहा है और इसमें भी जर्मनी की दावेदारी मजबूत है। पैट्रिक ब्रूम 2006 से ही जर्मन फुटबॉलरों को यौगिक क्रियाएं और ध्यान सिखा रहे हैं।

‘योग बनाता है अंदर से मजबूत’

पैट्रिक कहते हैं “फुटबॉल के खिलाड़ी शारीरिक रूप से मजबूत होते हैं। अच्छी टेक्निक और फिजिकल फिटनेस तो किसी भी टीम के खिलाड़ी हासिल कर सकते हैं। बड़े मैच जीतने के लिए मानसिक रूप से मजबूत होना भी उतना ही जरूरी होता है। योग हमें दिमागी तौर पर दबाव में खेलने की ताकत देता है।” इसी का नतीजा है कि कई खिलाड़ी बढ़ती उम्र के बावजूद बेहतरीन परफॉर्मेंस दे रहे हैं। खिलाड़ियों ने भी माना है कि योग करने के बाद उनका शरीर ज्यादा लचीला हुआ। इससे मैच पर फोकस बढ़ता है और पूरी ताकत झोंक देने का जज्बा पैदा होता है।

रोज 45 मिनट योग करते हैं खिलाड़ी

जर्मन फुटबॉल टीम के खिलाड़ी पैट्रिक ब्रूम के साथ रोज 45 मिनट तक यौगिक क्रियाएं करते हैं। ये उनके रुटीन का हिस्सा है। हालांकि यह हर खिलाड़ी की मर्जी पर है कि वो योग करे या न करे। अब तक जर्मनी की टीम के सिर्फ 3 खिलाड़ियों ने योग करने से इनकार किया है। पीटर ब्रूम बताते हैं कि “कुछ खिलाड़ियों को ऐसा लगता है कि यह एक धार्मिक प्रक्रिया है और इसलिए वो इससे बचना चाहते हैं। ऐसे खिलाड़ियों को वह समझाते हैं कि यह किसी भी शारीरिक अभ्यास की ही तरह है। बस इसमें बाकी एक्सरसाइज के अलावा सांसों के अभ्यास भी शामिल हो जाते हैं। सांसों का तो किसी खास धर्म से कोई लेना-देना नहीं हो सकता।”

जर्मनी के स्टार योग टीचर हैं पैट्रिक

पैट्रिक ब्रूम आज जर्मनी के सबसे मशहूर योग गुरु माने जाते हैं। वो बिल्कुल भारतीय पारंपरिक तौर-तरीके से योग करवाते हैं। म्यूनिख में उनके 2 योग स्टूडियो भी हैं। फुटबॉल टीम के साथ उनकी सफलता को जानने के बाद योग सीखने वालों की संख्या में भी भारी तेज़ी आई है।

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