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किरण बेदी वो कर रही हैं जो केजरीवाल नहीं कर सके

पुडुचेरी की उपराज्यपाल बनीं किरण बेदी शपथ लेने के दिन से चर्चा में हैं। किरण बेदी ने आते ही प्रशासन के कामकाज के तरीकों में कुछ ऐसे बदलाव किए हैं, जिनकी खूब तारीफ हो रही है। ज्यादातर ऐसे सुधार हैं, जिनका दावा अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बनाकर की थी। केजरीवाल चुनी हुई सरकार के मुख्यमंत्री होने के बावजूद जनता से दूर होते गए, जबकि बेदी ने उपराज्यपाल होकर भी पुडुचेरी का राजभवन आम जनता के लिए खोल दिया है। उन्होंने @LGov_Puducherry नाम से ट्विटर हैंडल शुरू किया है, जिस पर लोग डायरेक्ट अपनी बात कह सकेंगे।

रोज 5 से 6 बजे जनता का टाइम

राजभवन समेत पुडुचेरी के सभी बड़े सरकारी अधिकारियों से कहा गया है कि वो रोज शाम 5 से 6 बजे का टाइम आम जनता से मिलने के लिए रखें। लोगों की समस्याएं सुलझाएं और उसकी रिपोर्ट उन्हें भेजें। खुद किरण बेदी भी इस दौरान राजभवन में लोगों की शिकायतें और समस्याएं सुनेंगी। उन्होंने अधिकारियों को एक whatsapp ग्रुप भी बनाया है, ताकि तमाम मुद्दों पर सभी आपस में संपर्क में रह सकें।

शपथ लेने के अगले दिन से ही किरण बेदी ने #ProperousPuducherry अभियान शुरू किया है। इसका मकसद टूरिज्म और दूसरे तरीकों से पुडुचेरी के लोगों की आमदनी बढ़ाना है।

अपने व्यवहार से जीता सबका दिल

पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकार है, लेकिन अब तक उपराज्यपाल और सरकार के बीच टकराव जैसी कोई स्थिति नहीं है। नारायणसामी सरकार के शपथ ग्रहण के दिन कांग्रेस की एक महिला विधायक ने मंत्री पद की शपथ लेने के बाद किरण बेदी के पैर छू लिए तो किरण बेदी ने पलटकर उसी के पैर छू लिए।

केजरीवाल के लिए सबक बनीं किरण बेदी

किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल ने अन्ना आंदोलन में एक साथ ही हिस्सा लिया था। दोनों का राजनीतिक सफर भी लगभग साथ-साथ शुरू हुआ था। आम आदमी के नाम पर अरविंद केजरीवाल कुछ चापलूसों और चमचों से घिरकर रह गए हैं। जबकि किरण बेदी ने वैसी मिसाल बनाई, जो केजरीवाल नहीं कर सके। केजरीवाल की राजनीति टकराव और नकारात्मकता की है, जबकि किरण बेदी सकारात्मक तरीके से हर वो काम कर रही हैं, जिसकी जरूरत जनता को है। पुडुचेरी कई मायनों में दिल्ली जैसा राज्य है, ऐसे में किरण बेदी वहां जो कुछ काम करेंगी, उसकी तुलना दिल्ली से होगी ही।

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