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ये है केजरीवाल सरकार के ‘घोटालों’ का पूरा हिसाब!

केजरीवाल के पीछे प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार हैं, जिन्हें अवैध वसूली का एक्सपर्ट कहा जाता है। दायीं तस्वीर आशीष खेतान की है। इन पर आरोप है कि वो अलग-अलग विभागों और विधायकों के स्तर से वसूली का हिसाब किताब रखते हैं।

दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार के करप्शन की पोल खुलनी शुरू हो गई है। फाउंटेनइंक (FountainInk) नाम की न्यूज मैगजीन ने केजरीवाल सरकार और आम आदमी पार्टी के अंदर बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार के बारे में खबर पब्लिश की है। ये वो खबरें थीं जो आम तौर पर दिल्ली के सारे पत्रकार जानते हैं, लेकिन सरकारी विज्ञापनों के लालच में कोई इन्हें छापने या दिखाने की हिम्मत नहीं करता। जब रिपोर्ट पब्लिश हुई तो केजरीवाल सरकार बौखला गई। उनके करीबी और दिल्ली डायलॉग कमीशन के प्रमुख आशीष खेतान ने बाकायदा ट्वीट कर-कर के उन पत्रकारों को धमाकाना शुरू कर दिया, जिन्होंने भी इस खबर को शेयर किया।

केजरीवाल सरकार की पूरी पोल-खोल

  1. पत्रकारों को बांटी गई रेवड़ी: केजरीवाल ने सत्ता में आते ही दिल्ली यूनिवर्सिटी से जुड़े 28 कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी को भंग करके उन पत्रकारों को उनमें घुसा दिया जो अब तक उनके फेवर में खबरें लिखते रहे थे। करीब 25 मौजूदा और कुछ पूर्व पत्रकारों को ‘शिक्षाविद’ बताकर कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी में नियुक्त कर दिया गया। दिल्ली यूनिवर्सिटी विरोध करती रही, लेकिन किसी मीडिया समूह ने इस बारे में कोई खबर नहीं छापी। सबसे ज्यादा टाइम्स समूह के 4 पत्रकार इस लिस्ट में शामिल थे। आम आदमी पार्टी बनने के बाद से इन चारों पत्रकारों ने पार्टी के प्रवक्ता की तरह काम किया था। इन सभी ने पद ले भी लिया। लेकिन बाद में बात खुलने पर इस्तीफा देना पड़ा, क्योंकि टाइम्स ग्रुप की इंटरनल पॉलिसी में इसकी मनाही है। ये चारों पत्रकार आज भी इसी समूह में हैं और केजरीवा सरकार के पक्ष में खबरें लिखते हैं।
  2.  AAP कार्यकर्ताओं को भी रेवड़ी: पार्टी के कई कार्यकर्ताओं और व्यापारियों को सामाजिक कार्यकर्ता बताकर दिल्ली यूनिवर्सिटी की गवर्निंग कमेटी में रखवा दिया। जबकि इनमें से कई ऐसे थे जो ठीक से पढ़े-लिखे भी नहीं थे। गवर्निंग बॉडी में रहते हुए कॉलेज में भर्तियों में अहम भूमिका रहती है। इन पदों के लिए जमकर रिश्वत दी और ली जाती रही है।
  3.  डिजिटल मार्केटिंग के नाम पर घोटाला: बताया गया है कि केजरीवाल सरकार ने कई डिजिटल मार्केटिंग कंसल्टेंट्स नियुक्त किए। जिन्हें करोड़ों रुपयों का भुगतान किया गया। इनका काम पॉजिटिव खबरों को उछालना और नेगेटिव खबरों को दबाने का होता है। उदाहरण दिया गया है कि कुछ दिन पहले जब खुलासा हुआ कि ट्रांसपोर्ट मंत्री गोपाल राय जाति और क्षेत्र के आधार पर ऑटो लाइसेंस रीन्यू करने में भेदभाव कर रहे हैं तो इन डिजिटल कंसल्टेंट्स ने बिल्कुल नया मुद्दा उछालकर इस मामले को दबा दिया था।
  4. गाड़ियों के नंबर प्लेट के ठेके में घोटाला: दिल्ली सरकार ने एक ऐसी कंपनी को हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट्स बनाने का ठेका दिया, जो करप्शन के आरोपों की वजह से ब्लैकलिस्टेड थी। एक अधिकारी ने इस धांधली के खिलाफ आवाज़ उठाई तो उसका मुंह बंद करा दिया गया। उस कंपनी को ठेका मिल गया। बदले में आप के कार्यकर्ताओं और विधायकों को कथित तौर पर फायदे पहुंचाए गए।
  5. ट्रांसफर-पोस्टिंग का धंधा: केजरीवाल ने आने के बाद से दिल्ली में ट्रांसफर-पोस्टिंग के धंधे में जान फूंक दी। कई अधिकारियों को उन पदों पर ट्रांसफर किया गया जो अलग-अलग तरीकों से ‘कमाई’ के एक्सपर्ट माने जाते हैं। आम तौर पर इस काम में ऐसे अफसरों की जरूरत होती है जो ऐसे काम करें कि पकड़े भी न जाएं। दिल्ली सरकार ने ऐसे अफसरों को उचित ‘इनाम’ भी दिया है। केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार भी ऐसे ही अफसर माने जाते हैं, जो नियम-कानून से बचते हुए कमाई करने के एक्सपर्ट हैं। वेबसाइट की रिपोर्ट में इस पूरे धंधे के काम करने का तरीका विस्तार से बताया गया है।
  6. विधायकों को बनाया वसूली मशीन:  मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने खुद अपने विधायकों को वसूली के लिए टारगेट दे रखा है। पिछले साल अक्टूबर में यह खबर लीक हो गई थी कि सभी विधायकों से कहा गया है कि पंजाब चुनाव की तैयारी के लिए वो पार्टी फंड में हर महीने 1-1 लाख रुपये जमा कराएं। हल्ला मचा तो पार्टी ने इसे बंद कर दिया। लेकिन कुछ ही दिनों में ही वसूली का ये धंधा फिर शुरू हो गया। इस बार हर विधायक को हर महीने डेढ़-डेढ़ लाख रुपये जमा करने का टारगेट दे दिया गया। कई विधायकों ने निजी बातचीत में इसे लेकर नाराजगी जताई है और कहा है कि इस हालत में ईमानदार नहीं रहा जा सकता।

आरोपों पर चुप है आम आदमी पार्टी?

जिस तरह से पक्के दस्तावेजों के साथ आरोप लगाए गए हैं, उसे देखते हुए आम आदमी पार्टी के नेताओं की बोलती बंद है। वेबसाइट ने केजरीवाल के मीडिया सलाहकार से लेकर कई सीनियर नेताओं से इस बारे में बात करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने उनके सवालों का जवाब नहीं दिया। कई पत्रकारों ने जब इस स्टोरी को ट्विटर पर शेयर किया तो पार्टी के नेता आशीष खेतान ने बाकायदा धमकाने वाली भाषा में उन्हें जवाब दिया। देखिए इसकी कुछ मिसाल:

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