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प्रणव धनावडे क्रिकेट की दुनिया का ‘एकलव्य’ है?

सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन को वेस्टर्न रीज़न की अंडर-16 टीम में चुन लिया गया है, लेकिन एक हजार रन की शानदार पारी खेलने वाले प्रणव धनावडे टीम में जगह नहीं बना पाए। इस टीम को हुबली में होने वाली इंटर-रीजन अंडर-16 चैंपियनशिप में हिस्सा लेना है। हर तरफ यह बात हो रही है कि एक ऑटो ड्राइवर के प्रतिभाशाली बेटे को टीम में जगह क्यों नहीं मिली, जबकि सचिन का बेटा टीम में है।

सोशल मीडिया पर मचा है हंगामा

फेसबुक पर ट्विटर पर कई लोगों ने इस नाइंसाफी पर एतराज जताया है। कई लोग प्रणब धनावडे को नए जमाने का एकलव्य भी करार दे रहे हैं। कुछ उसे नया विनोद कांबली बताने में जुटे हैं। वैसे यह सफाई दी जा रही है कि प्रणब धनावडे का सेलेक्शन न हो पाने की वजह ये है कि उसकी उम्र 16 साल से कुछ ज्यादा है। लेकिन अर्जुन तेंदुलकर की उम्र प्रणब धनावडे से कुछ महीने अधिक है, फिर उसका सेलेक्शन अंडर-16 टीम में कैसे हो गया। कुछ लोगों का कहना है कि टीम के सेलेक्टर समीर दिघे ने सचिन के बेटे को चुनकर खुद पर सचिन का एहसान उतारा है। क्योंकि जब सचिन टीम इंडिया के कप्तान थे तो उन्होंने खराब खेल के बावजूद दिघे को टीम में खेलने का मौका दिया था।

प्रणव की तारीफ खुद सचिन ने की थी

प्रणव धनावडे ने जब स्कूली क्रिकेट में 1009 रन की पारी खेली थी तो उनकी चर्चा देश-विदेश में हुई थी। सचिन ने भी उनकी तारीफ करते हुए अपने ऑटोग्राफ वाला बैट तोहफे में दिया था। कप्तान एमएस धोनी ने भी धनावडे को अच्छे भविष्य की शुभकामनाएं दी थीं। तब मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन की तरफ से प्रणव का सम्मान भी किया गया था। उन्हें हर महीने 10 हजार रुपये स्कॉलरशिप भी मिलती है।

मामले को जातीय रंग देने की कोशिश जारी

क्रिकेट में सेलेक्शन में धांधली की घटनाएं आम हैं, लेकिन कुछ लोग इसे जातीय रंग देने की कोशिश में जुटे हैं। प्रणव धनावडे एक गरीब घर से ताल्लुक रखता है, लेकिन लोग उसे उसकी जाति से नहीं, बल्कि अच्छे खेल से जानते हैं। फिर भी कुछ राजनीतिक लोग यह कहने में जुटे हैं कि प्रणव के साथ इसलिए नाइंसाफी हुई है क्योंकि वो एक दलित परिवार से ताल्लुक रखता है। जाहिर है ऐसे बयानों से प्रणव धनावडे का फायदा कम और नुकसान ही ज्यादा होगा।

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