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‘दिल्ली में पर एटमी हमले के लिए 5 मिनट चाहिए’

बायीं तरफ रावलपिंडी के पास कहूटा में बने पाकिस्तानी एटमी सेंटर की तस्वीर है। दायी तस्वीर डॉ. अब्दुल कादिर ख़ान की है।

पाकिस्तानी एटमी साइंटिस्ट डॉक्टर अब्दुल कादिर ख़ान ने कहा है कि उनकी सेना सिर्फ 5 मिनट के नोटिस पर दिल्ली पर एटम बम गिरा सकती है। 1998 में पाकिस्तान के पहले न्यूक्लियर टेस्ट की सालगिरह के मौके पर शनिवार शाम एक प्रोग्राम में वो बोल रहे थे। इस प्रोग्राम को नाम दिया गया था- यौम ए तकबीर। डॉ. ए क्यू ख़ान को पाकिस्तान के एटमी प्रोग्राम का जनक माना जाता है।

पाकिस्तान के टारगेट पर है दिल्ली!

बातों-बातों में डॉ. अब्दुल कादिर ख़ान ने कहा कि रावलपिंडी के पास कहूटा से दिल्ली तक एटम बम दागने की ताकत पाकिस्तान के पास है। अगर कभी इसकी जरूरत पड़ी तो सिर्फ 5 मिनट के अंदर पाकिस्तान दिल्ली पर परमाणु बम गिरा सकता है। कहूटा में ही पाकिस्तान का एटॉमिक सेंटर है और यहीं पर पाकिस्तान ने 1998 में पहला एटमी टेस्ट भी किया था।

‘1984 में ही बना लेते एटम बम’

कादिर ने कहा कि 1984 में ही पाकिस्तान परमाणु शक्ति बन सकता था। लेकिन तब के राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक़ ने टेस्ट की इजाज़त नहीं दी थी। क्योंकि उन्हें लगता था कि अगर पाकिस्तान ने न्यूक्लियर टेस्ट किया तो दुनिया के बड़े देश पाकिस्तान पर हमला कर देंगे। जनरल जिया उल हक़ 1979 से 1988 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे। इस दौरान उन्हीं की वजह से पाकिस्तान परमाणु बम का परीक्षण नहीं कर पाया। खान ने आगे कहा कि जरनल जिया उल हक़ का डर सही भी था क्योंकि उस वक्त सोवियत रूस की फौज अफगानिस्तान में लड़ाई लड़ रही थीं, जिसकी वजह से अमेरिका पाकिस्तान को बड़े पैमाने पर फौजी और आर्थिक मदद दे रहा था।


कौन हैं ए क्यू ख़ान?

ये पाकिस्तान के सबसे बड़े न्यूक्लियर साइंटिस्ट माने जाते हैं। टेक्नोलॉजी चोरी से लेकर रेडियोएक्टिव पदार्थों की तस्करी तक के आरोप इन पर लग चुके हैं। अब्दुल कादिर खान को न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी बेचने वाला बदनाम वैज्ञानिक माना जाता है। 2004 में पाकिस्तान सरकार ने ए क्यू खान को घर में नज़रबंद कर दिया था। उन्होंने खुद ही एक टीवी इंटरव्यू में उत्तर कोरिया, ईरान और लीबिया को एटमी टेक्नोलॉजी बेचने की बात मानी थी। इसके बाद अमेरिका ने पाकिस्तान से कहा था कि वो ए क्यू ख़ान को उसके हवाले कर दे, लेकिन पाकिस्तान सरकार इसके लिए राजी नहीं हुई। बाद में यूसुफ रज़ा गिलानी की सरकार ने 2009 में अब्दुल कादिर खान को रिहा कर दिया था। माना जाता है कि अब्दुल कादिर ख़ान दुनिया के कुछ उन लोगों में से हैं जिन पर अमेरिकी खुफिया एजेंसियां सबसे ज्यादा निगरानी रखती हैं। फिलहाल वो कराची और इस्लामाबाद में रहते हैं।

ब्लैकमनी के विवादों में भी फंसे हैं क़ादिर

अब्दुल क़ादिर ख़ान पर ब्लैकमनी विदेशों में छिपाने के आरोप भी लगे हुए हैं। पनामा पेपर लीक्स में उनका नाम भी शामिल है। डॉक्टर कादिर और उनके परिवार के कई लोगों के नाम पर विदेशी कंपनियों की बात सामने आ चुकी है।

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