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दिल्ली में फिर फ्लॉप होने वाला है ऑड इवेन फॉर्मूला!

दिल्ली में गाड़ियों के लिए सम-विषम यानी ऑड-इवेन फॉर्मूले के पहले दो दिन के जो नतीजे सामने आए हैं, उनके मुताबिक यह लगातार दूसरी बार फ्लॉप होने जा रहा है। पहले दिन यानी 15 अप्रैल को हवा में पर्टिकुलेट मैटर यानी पीएम की संख्या सबसे ज्यादा पाई गई। इसमें 12, 13 या 14 अप्रैल के मुकाबले कोई कमी नहीं आई, बल्कि ये थोड़ा बढ़ ही गया। ये आंकड़े पर्यावरण संस्था TERI ने जारी किए हैं।

15 अप्रैल को क्यों बढ़ा प्रदूषण?

दरअसल गर्मी के मौसम में हवा का बहाव उत्तर-पश्चिम दिशा से होता है। दिल्ली के उत्तर-पश्चिमी इलाके में हरियाणा के सोनीपत, बहादुरगढ़ और रोहतक जैसे शहर हैं। यहां बड़ी संख्या में छोटे-बड़े कल-कारखाने हैं, जिनसे धुआं निकलता है। इस वजह से सड़क पर कम गाड़ियां होने के बावजूद हवा में मौजूद कणों यानी पीएम2.5 और पीएम10, दोनों की मात्रा सामान्य से 2-3 गुना ज्यादा पाई गई। 14 अप्रैल को पीएम2.5 का स्तर स्टैंडर्ड से 2.3 गुना ज्यादा था, जबकि 15 अप्रैल को ये बढ़कर 3.5 गुना ज्यादा हो गया।

क्या होता है पर्टिकुलेट मैटर?

दरअसल यह हवा में घुले ऐसे बारीक कण होते हैं, जो सांस के रास्ते शरीर में पहुंच जाते हैं। इन्हीं की वजह से सांस की बीमारियां होती हैं। ये कण धूल के अलावा तेल के धुएं, प्लास्टिक और कचरा जलाने से भी पैदा होते हैं। ये कण दो तरह के होते हैं- पीएम2.5 (जिनकी गोलाई 2.5 माइक्रोमीटर से कम होती है) और पीएम10 (जिनकी गोलाई 10 माइक्रोमीटर से कम होती है)।

हवा में जहरीली गैसों की मात्रा भी बढ़ी

हवा के कणों के अलावा 15 अप्रैल को जहरीली गैसों में भी कोई खास कमी दर्ज नहीं हुई। दिल्ली के पंजाबी बाग, आनंद विहार और आरकेपुरम जैसे सबसे प्रदूषित इलाकों में NO2 का लेवल जस का तस रहा। टेरी दिल्ली-एनसीआर की कुल 9 जगहों पर प्रदूषण की जांच करवा रहा है। ये इलाके हैं- मंदिर मार्ग, आरकेपुरम, पंजाबी बाग, आनंद विहार, बहादुरगढ़, लोधी रोड, गाजियाबाद, गुड़गांव और नोएडा। इन सभी जगहों पर प्रदूषण या तो जस का तस रहा या बढ़ गया। जाहिर है ऐसे में यह सवाल तो उठेगा ही कि जब ऑड-इवेन स्कीम से प्रदूषण ही कम नहीं हो रहा तो आखिर दिल्ली सरकार इसका इतना ढोल क्यों पीट रही है।

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