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चांद की वो तस्वीरें जो अब तक आपने नहीं देखीं

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने पहली बार चांद पर इंसान के पहुंचने की वो तस्वीरें जारी की हैं, जो अबतक आम लोगों ने नहीं देखीं। करीब 12 हजार तस्वीरें Flickr और दूसरी सोशल मीडिया साइट्स पर अपलोड की गई हैं। इनमें चांद पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के चांद पर उतरने, उनकी दिनचर्या, चांद की सतह और वहां से धरती की तस्वीरें शामिल हैं। ये तस्वीरें 1961 से 1975 के बीच अपोलो मून मिशन की हैं। इनमें 1969 में नील आर्मस्ट्रॉन्ग के अपोलो-11 की भी तस्वीरें हैं। इनमें से कुछ तस्वीरें आपने देखी होंगी, लेकिन वो भी पहली बार हाई रिजॉल्यूशन में जारी की गई हैं। अपोलो मिशन की ज्यादातर तस्वीरें हैज़लब्लैड कैमरे से ली गईं है, जो एस्ट्रोनॉट्स के सीने के पास फिट होता था।

यह कमांडर नील आर्मस्ट्रॉन्ग की यान चांद पर उतरने के कुछ देर बाद की तस्वीर है। तब वो चांद की सतह पर उतरने की तैयारी कर रहे थे। खुद आर्मस्ट्रॉन्ग ने कहा था कि वो उस वक्त बेहद नर्वस थे।
यह कमांडर नील आर्मस्ट्रॉन्ग की यान चांद पर उतरने के कुछ देर बाद की तस्वीर है। तब वो चांद की सतह पर उतरने की तैयारी कर रहे थे। खुद आर्मस्ट्रॉन्ग ने कहा था कि वो उस वक्त बेहद नर्वस थे।

 

यान की सीढ़ियों से चांद की सतह पर उतरते आर्मस्ट्रॉन्ग।
यान की सीढ़ियों से चांद की सतह पर उतरते आर्मस्ट्रॉन्ग।

चांद की सतह पर इंसान का पहला कदम।

 

चांद पर पहुंचने के बाद नील आर्मस्ट्रॉन्ग की पहली तस्वीरों में से एक। ये तस्वीरें यान में बैठे उनके साथी एडविन एल्ड्रिन ले रहे थे।

 

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अपने कैमरे से फोटोग्राफी करते नील आर्मस्ट्रॉन्ग। उनकी ये तस्वीर भी एडविन एल्ड्रिन ने ही ली थी।
चांद की सतह पर चहलकदमी करते नील आर्मस्ट्रॉन्ग। वो और एडविन एल्ड्रिन ने करीब ढाई घंटे चांद की सतह पर बिताए थे। इस दौरान उन्होंने चांद की मिट्टी का 21.5 किलो सैंपल बटोरा।
चांद की सतह पर चहलकदमी करते नील आर्मस्ट्रॉन्ग। वो और एडविन एल्ड्रिन ने करीब ढाई घंटे चांद की सतह पर बिताए थे। इस दौरान उन्होंने चांद की मिट्टी का 21.5 किलो सैंपल बटोरा।
चांद की सतह से कुछ ऐसी दिखाई दे रही थी धरती। दोनों अंतरिक्ष यात्री काफी देर तक धरती को ही देखते रह गए थे।
चांद की सतह से कुछ ऐसी दिखाई दे रही थी धरती। दोनों अंतरिक्ष यात्री काफी देर तक धरती को ही देखते रह गए थे।
वापसी के वक्त आर्मस्ट्रॉन्ग ने चांद की सतह पर अमेरिका का झंडा लहराया था। चांद पर हवा नहीं होती। इसलिए ये झंडा मेटल से बनाया गया था।
वापसी के वक्त आर्मस्ट्रॉन्ग ने चांद की सतह पर अमेरिका का झंडा लहराया था। चांद पर हवा नहीं होती। इसलिए ये झंडा मेटल से बनाया गया था।
यान की सीढ़ियों पर ही यह तख्ती लगी हुई थी। जिसमें लिखा था कि धरती से आया इंसान पहली बार जुलाई 1969 में यहां पर उतरा। हम यहां मानवता की शांति के मकसद से आए हैं।
यान की सीढ़ियों पर ही यह तख्ती लगी हुई थी। जिसमें लिखा था कि धरती से आया इंसान पहली बार जुलाई 1969 में यहां पर उतरा। हम यहां मानवता की शांति के मकसद से आए हैं।
इस तस्वीर में चांद की सतह पर उगता सूरज दिखाई दे रहा है।
इस तस्वीर में चांद की सतह पर उगता सूरज दिखाई दे रहा है।
बाद के मून मिशन में अंतरिक्ष यात्री अपने साथ मून वैहिकिल भी ले गए, जिससे वो अपने यान से कुछ किलोमीटर दूरी तक गए।
बाद के मून मिशन में अंतरिक्ष यात्री अपने साथ मून वैहिकिल भी ले गए, जिससे वो अपने यान से कुछ किलोमीटर दूरी तक गए।
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