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मंदिर में दीया जला नमाज़ पढ़ते हैं ये मुस्लिम दंपति

केरल के अखबारों में बीते कुछ दिनों में अबू बकर और असिया की कहानी छाई रही है।

76 साल के अबू बकर और उनकी 65 साल की पत्नी असिया अपनी ही बिरादरी से बाहर किए जा चुके हैं। उनका गुनाह ये है कि वो अपनी जमीन पर बने एक मंदिर को तोड़ने की इजाज़त नहीं दे रहे हैं। केरल के एर्नाकुलम इनकी पुश्तैनी जमीन है, जिसके एक हिस्से में नाग देवता का एक मंदिर बना हुआ है। अपने मज़हब के साथ-साथ दोनों के मन में धीरे-धीरे इस मंदिर के लिए भी श्रद्धा पनपने लगी। यही बात आसपास रहने वाले दूसरे लोगों को बर्दाश्त नहीं हुई।

नाग देवता की पूजा की सज़ा

अबू बकर बताते हैं कि वो वो यहां करीब 50 साल से रह रहे हैं। 25 साल वो और उनकी पत्नी किसी बड़े संकट में फंसे। उन्हें लगता है कि नागदेवता ने उस संकट से उनकी रक्षा की थी। तब से वो चुपचाप बिना किसी को बताए इस मंदिर की देखभाल करने लगे। करीब 13 साल तक ये सिलसिला चला। लेकिन बेटे की शादी के बाद जब बहू आई तो उसने बाहर वालों को उनके इस मंदिर के बारे में बता दिया। लोगों ने चेतावनी दी कि वो मंदिर को तोड़ दें, लेकिन दोनों पति-पत्नी इसके लिए तैयार नहीं हुए। जब वो नमाज पढ़ने जाते हैं तो उन्हें धमकियां दी जाती थीं। लोग मेरी दाढ़ी और मुसलमान होने की हर निशानी का मज़ाक उड़ाते हैं। जब मैं हज पर गया तो उसके लिए भी मुझे गालियां सुननी पड़ीं।

कई बार गिरा दिया गया मंदिर

असिया और अबू बकर बताते हैं कि कैसे बीते चार साल में कई बार मंदिर में तोड़फोड़ की कोशिश हुई। हर बार दोनों पति-पत्नी खुद मंदिर की मरम्मत करवाते हैं।

बचाव में आगे आया वक्फ़ बोर्ड

इस मुसीबत की घड़ी में केरल वक्फ़ बोर्ड ने अबू बकर और उनकी पत्नी की मदद की है। बोर्ड का कहना है कि हम बीच-बचाव करके मामला सुलझाने को तैयार हैं। इसके लिए खुद अबू बकर ने हमें ख़त भी लिखा है। हम मानते हैं कि अगर उन्हें उस मंदिर को लेकर श्रद्धा है तो इसमें कुछ गलत नहीं है और इसकी इजाज़त दी जा सकती है। इसके लिए उन्हें बिरादरी से निकाला नहीं जा सकता।

रोज जलाते हैं मंदिर में दीया

ख़ैर इन सारे झगड़ों के बीच अबू बकर और असिया आज भी रोज मंदिर में दीया जलाना नहीं भूलते। मस्जिद में अगर एंट्री नहीं है तो दोनों इसी मंदिर के सामने बैठकर पांच वक्त की नमाज़ भी पढ़ लेते हैं।

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