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बीजेपी से खुद को नहीं निकलवा पाए बिहारी बाबू!

बीजेपी ने बिहार भेजे जाने वाले अपने स्टार प्रचारकों की लिस्ट में शत्रुघ्न सिन्हा का नाम भी रखा है। चुनाव से पहले बार-बार बीजेपी और पीएम मोदी की बुराई और खुलेआम सीएम नीतीश कुमार की तारीफ के बावजूद बीजेपी ने उन्हें प्रचारकों की लिस्ट से हटाया नहीं। बीजेपी प्रचारकों की लिस्ट में शत्रुघ्न सिन्हा 33वें नंबर पर हैं। हालांकि लिस्ट में नरेंद्र मोदी और अध्यक्ष अमित शाह के अलावा किसी का नाम सीनियॉरिटी के हिसाब से नहीं लिखा गया है।

अमित शाह ने नहीं निभाई ‘शत्रु’ता

शत्रुघ्न सिन्हा लोकसभा चुनाव के पहले नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाने का खुलकर विरोध करते थे। इसके बावजूद बीजेपी ने उन्हें पटना में लोकसभा सीट का टिकट देकर सांसद बनवा दिया। इसके बाद भी बिहारी बाबू के तेवर ढीले नहीं पड़े और उन्होंने मौके-बेमौके नरेंद्र मोदी की आलोचना जारी रखी। यहां तक तो फिर भी ठीक था, लेकिन ऐन बिहार चुनाव से पहले जेडीयू के पाले में उठना-बैठना कुछ ज्यादा ही शुरू कर दिया। उन्होंने खुलकर प्रधानमंत्री के बयानों की आलोचना की और नीतीश कुमार को सीएम पद के लिए अपनी पहली पसंद तक बताया। ऐसे में अब वो किस मुंह से प्रचार में नीतीश सरकार की बुराई और नरेंद्र मोदी की तारीफ करेंगे? कुछ दिन पहले ही शत्रुघ्न सिन्हा ने बयान दिया था कि अगर एनडीए की सरकार बने तो रामविलास पासवान को मुख्यमंत्री बनना चाहिए।

शहीद बनना चाहते थे शत्रुघ्न!

कहा जाता है कि पार्टी हाईकमान की आलोचना के पीछे शत्रुघ्न की मंशा ये थी कि उन्हें बीजेपी से निकाल दिया जाए और वो शहीद बनकर जेडीयू या किसी दूसरी पार्टी में अपना करियर बना सकें। लेकिन तमाम कोशिश के बाद भी बीजेपी के किसी बड़े नेता ने कभी उनके बयान पर मुंह नहीं खोला।


अब क्या करेंगे बिहारी बाबू?

स्टार कैंपेनर बनने के बाद प्रचार कार्यक्रम में उनका नाम भी होगा। उन्हें रैलियों में भाषण भी देना होगा। अब शत्रुघ्न सिन्हा के पास दो ही रास्ते हैं कि या तो वो कोई बहाना करके खुद को चुनाव प्रचार से अलग कर लें, या फिर ये कहकर चुनाव प्रचार में जुट जाएं कि अब तक उन्होंने जो कुछ कहा वो उनकी निजी राय थी। जाहिर है पार्टी हाईकमान ने बॉल उनकी कोर्ट में डाल दी है। फिलहाल बीजेपी के इस फैसले पर सोशल मीडिया में खूब चुटकियां भी ली जा रही हैं। देखिए एक नमूना।

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