Home » Loose Top » रेडियो पर क्या कहना चाहते थे नेताजी सुभाषचंद्र?
Loose Top

रेडियो पर क्या कहना चाहते थे नेताजी सुभाषचंद्र?

आजादी के करीब 70 साल बाद नेताजी सुभाषचंद्र बोस से जुड़ी कुछ सीक्रेट फाइलें सामने आई हैं। मोदी सरकार की पहल के बाद कुल 64 फाइलें पश्चिम बंगाल सरकार ने जारी की हैं। जिनमें फाइल नंबर-62 से बड़ा खुलासा हुआ है। इसमें साफ-साफ लिखा है कि 1945 के बाद नेताजी जिंदा थे और बंगाल में इंटेलिजेंस ब्यूरो उनके परिवार वालों की जासूसी कर रहा था। इसलिए ताकि अगर वो परिवार के संपर्क में आएं तो उन्हें पकड़ा जा सके। इन फाइलों में एक जो सबसे चौंकाने वाली बात है वो है नेताजी का एक रेडियो मैसेज, जिसके बारे में हम आपको आगे बताएंगे। जिन 64 फाइलों को जारी किया गया है उनमें कुल 12744 पन्ने हैं। मतलब ये कि सारी बातें सामने आने में अभी काफी वक्त लग सकता है। यह भी पढ़ें: भारत की सच्ची बहू जिसे देश ने भुला दिया

भतीजे को रेडियो पर मैसेज भेजा था

दरअसल जो क्लासीफाइड फाइलें जारी की गई हैं, उनमें एक चिट्ठी भी है। 18 नवंबर 1949 की ये चिट्ठी नेताजी के भतीजे अमियनाथ बोस ने अपने भाई शिशिर बोस को भेजी थी। शिशिर उस वक्त लंदन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे, जबकि अमिय बोस कोलकाता में रहते थे। इस चिट्ठी में अमियनाथ बोस ने लिखा है- “करीब महीने भर से रेडियो पर एक अजीबोगरीब आवाज़ सुनाई दे रही है। शॉर्ट वेव पर 16एमएम फ्रीक्वेंसी पर जाते ही आवाज आने लगती है कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस ट्रांसमीटर ए कौथा बोलते चाये (नेताजी सुभाषचंद्र बोस ट्रांसमीटर पर बात करना चाहते हैं)। यही बात बार-बार घंटों तक दोहराई जाती रहती थी। हमें पता नहीं कि ये मैसेज कहां से आ रहा है।” तब जवाहरलाल नेहरू सरकार की खुफिया एजेंसियां नेताजी के परिवार की एक-एक चिट्ठी खोलकर पढ़ती थीं। उसी दौरान ये चिट्ठी उनके हाथ लगी थी और सीक्रेट फाइलों का हिस्सा बन गई। ये चिट्ठी शिशिर बोस तक कभी नहीं पहुंच पाई थी।

परिवार से संपर्क की दूसरी कोशिश

जारी की गई सीक्रेट फाइलों के मुताबिक नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने संभवत: एक बार फिर अपने परिवार से संपर्क करने की कोशिश की थी। एक फाइल में नेताजी के ही भतीजे एसके बोस की चिट्ठी है, जो उन्होंने नेताजी के बड़े भाई शरतचंद्र बोस को 12 दिसंबर 1949 को भेजी थी। इसमें उन्होंने लिखा है कि- “सिंगापुर में रेडियो पीकिंग ने बताया हैकि नेताजी थोड़ी देर में अपना मैसेज ब्रॉडकास्ट करेंगे। हमने हॉन्गकॉन्ग ऑफिस में इसे सुनने की कोशिश की, लेकिन फ्रीक्वेंसी मैच नहीं हुई। और हम कुछ सुन नहीं पाए।” इन सारी चिट्ठियों से यह पता चल रहा है कि नेताजी अपने परिवार से कुछ कहना चाहते थे, लेकिन वो इसमें सफल नहीं हो पा रहे थे। शायद उन्हें भी अंदाजा था कि नेहरू सरकार के जासूस उनके पीछे हैं।

1970 तक होती रही थी जासूसी

बोस परिवार की 1970 तक की चिट्ठियां और उनके कहीं भी आने-जाने पर नज़र रखी गई। ये सारा कुछ सीक्रेट वीकली सर्वे के तहत इन फाइलों में दर्ज है। इस पूरे दौर में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की सरकार हुआ करती थी और सिद्धार्थ शंकर राय मुख्यमंत्री थे। जाहिर है आज के समय में भी किसी आतंकवादी या अपराधी पर इस तरह नज़र नहीं रखी जाती होगी, जिस तरह से उस दौर में नेताजी सुभाषचंद्र और उनके परिवार के साथ किया गया।

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें


कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।

comments

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...

Donate to Newsloose.com

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें

Popular This Week

Don`t copy text!