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धरती की 5 सबसे रहस्यमयी जगहें

धरती पर ऐसी कई जगहें हैं जो किसी रहस्य से कम नहीं हैं। कुछ रहस्यों के जवाब इंसान ने ढूंढ लिए हैं और कुछ के जवाब अब तक नहीं मिल सके हैं। हम आपको बताते हैं धरती की उन 5 जगहों के बारे में जो किसी राज़ से कम नहीं।

1. सोकोट्रा द्वीप, यमन

इसे आप धरती की सबसे अजीबोगरीब जगह कह सकते हैं। यहां पहुंचकर आपको लगेगा मानो किसी दूसरे ग्रह पर आ गए हों। यमन में अरब और हिंद महासागर के बीच ये एक छोटा सा द्वीप है। कई साल तक इसके बारे में लोगों को जानकारी नहीं दी। यहां के पेड़-पौधों से लेकर जीव-जंतु और चट्टानें सब कुछ ऐसा है जो धरती पर कहीं और नहीं पाया जाता। पेड़ ऐसे दिखते हैं जैसे उलटे लटके हों। इस द्वीप पर करीब 40 लोगों की आबादी भी बसती है। इन लोगों की परंपराएं भी अजीब हैं। बीमारियों और मुसीबतों के लिए ये लोग सिर्फ भूत-प्रेत पर ही विश्वास करते हैं। हालांकि धीरे-धीरे यहां के लोग भी इंटरनेट और मॉडर्न टेक्नोलॉजी से जुड़ रहे हैं। ऐसा ज्यादातर यहां आने वाले टूरिस्टों की वजह से संभव हो पाया है। लेकिन इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है कि ये जगह धरती की बाकी जगहों से इतनी अलग और अजीब क्यों है।

सोकोट्रा द्वीप के अजीबोगरीब पेड़, ऐसे पेड़ धरती पर कहीं और नहीं मिलते।
सोकोट्रा द्वीप के अजीबोगरीब पेड़, ऐसे पेड़ धरती पर कहीं और नहीं मिलते।

2. बरमूडा ट्राइंगल, अटलांटिक महासागर

ये धरती की सबसे चर्चित रहस्यमयी जगहों में से एक है। अटलांटिक महासागर में एक त्रिकोण जैसा ये इलाका बरमूडा ट्राएंगल कहलाता है। ये करीब 5 लाख वर्ग मील का इलाका है। इस जगह से गुजरने वाले तमाम जहाज और विमान अचानक गायब हो जाते हैं। इन विमानों या जहाजों के कोई निशान भी नहीं मिलते और वो रेडार से अचानक लुप्त हो जाते हैं। बरमूडा ट्राइंगल के बारे में सबसे पहले जिक्र क्रिस्टोफर कोलंबस ने किया था। कोलंबस ने 11 अक्टूबर 1492 की अपनी लॉग बुक में लिखा है कि उस जगह से कुछ दूरी से गुजरते वक्त उन्होंने क्षितिज पर नाचती अजीबोगरीब सी रोशनी देखी। ऐसा लगता था कि आसमान में आग की लपटे हैं और वहां पर दिशा बताने वाला कंपास अजीबोगरीब तरीके से व्यवहार करने लगा था। वैज्ञानिक मानते हैं कि यहां पर धरती के अंदर कुछ ऐसा है जिसकी वजह से यहां प्रकृति के सारे नियम फेल हो जाते हैं।

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गूगल अर्थ पर बरमूडा ट्राएंगल के इलाके को लाइन की मदद से मार्क किया गया है

3. मीर माइंस, साइबेरिया

रूस के साइबेरिया में ये कभी हीरे की खदान हुआ करता था। कभी यहां से 1 करोड़ कैरेट हीरा हर साल निकाला जाता था। जब यहां हीरे का भंडार खत्म हुआ तो लोगों ने गौर किया कि ये जगह अजीब सी हो चुकी है। आसमान से देखने पर लगता है कि मानो धरती की नाभि हो। इसकी गहराई तकरीब 1700 फीट है और चौड़ाई 3900 फीट के करीब। इसके बाद सुरक्षा कारणों से मीर माइन्स के ऊपर नो फ्लाई ज़ोन बना दिया गया। क्योंकि हेलीकॉप्टर के पायलट्स ने शिकायत की थी कि मीर माइंस के ऊपर जाते ही कोई ताकत उन्हें जमीन के अंदर खींचने लगती है। ऐसा हवा के एक खास तरह के फ्लो की वजह से होता है।

रूस के साइबेरिया में मीर माइंस ऊपर से जाने वाले हेलीकॉप्टरों के लिए खतरा है।
रूस के साइबेरिया में मीर माइंस ऊपर से जाने वाले हेलीकॉप्टरों के लिए खतरा है।


4. नाज़का ड्राइंग्स, पेरू

पेरू के रेगिस्तानी इलाकों में आसमान से देखने पर ऐसी कई पेंटिंग्स या कहें तो लकीरें दिखाई देती हैं। ऐसा लगता है जैसे किसी चित्रकार ने इन्हें धरती पर बनाया है। ये आकृतियां कुछ जानवरों से भी मेल खाती हैं। लोकल लोग मानते हैं कि ये रेखाएं यहां हजारों साल पहले रहने वाले नाज़का इंडियंस ने बनाई हैं। इसीलिए इन्हें नाज़का लाइंस या नाज़का ड्राइंग्स कहते हैं। 1920 के दशक में पहली बार इन्हें हवाई जहाज से देखा गया था। नीचे से देखने पर ये लाइनें आपस में उलझी हुईं बेतरतीब लाइनें मालूम होती थीं। कुछ लोग इन्हें किसी धार्मिक अनुष्ठान की निशानी मानते हैं तो कुछ लोग कहते हैं कि हो सकता है किसी एलियन ने इन्हें बनाया हो।

आसमान से दिखने वाली इन लाइनों को किसने खींचा है और ये चित्र किसने बनाए हैं कोई नहीं जानता।
आसमान से दिखने वाली इन लाइनों को किसने खींचा है और ये चित्र किसने बनाए हैं कोई नहीं जानता।

5. डोर टु हेल यानी नर्क का दरवाजा, तुर्कमेनिस्तान

धरती में बना एक गड्ढा और उस गड्ढे में धधकती आग। ये आग अब तकरीबन 50 साल से जल रही है। दुनिया इसे नर्क के दरवाजे के नाम से जानती है। काराकुरम रेगिस्तान में बना ये विशाल गड्ढा दरअसल जमीन के अंदर प्राकृतिक गैस के ब्लास्ट से पैदा हुआ है। 1971 में सोवियत वैज्ञानिकों ने यहां गैस की खोज में खुदाई की थी। इसी दौरान एक दिन यहां विस्फोट हो गया, जिससे ये गड्ढा पैदा हो गया। इससे निकल रही मीथेन आसपास न फैलने पाए, इसके लिए रूसी वैज्ञानिकों ने इसमें आग लगा दी थी। तब से अब तक ये गड्ढा लगातार धधक रहा है। हर साल दुनिया भर से हजारों सैलानी इसे देखने जाते हैं।

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डोर टु हेल कोई राज तो नहीं, फिर भी वैज्ञानिकों के लिए ये रहस्य जरूर है कि तकरीबन 50 साल से धधक रही ये आग कब बुझेगी।
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