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एपीजे अब्दुल कलाम की महानता के बारे में 10 कहानियां

डॉ. कलाम के बारे में जितने मुंह उतनी कहानियां सुनने को मिलती हैं। इनमें से ही हम आपके लिए चुनकर लाए हैं वो टॉप-10 बातें जो हमेशा के लिए याद की जाएंगी।

  • जब कलाम डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) में काम करते थे। तो उनकी लैब की बिल्डिंग पर अक्सर चिड़िया आकर ऊपर रखी मशीनों में गंदगी कर देती थीं। कलाम को सुझाव दिया गया कि क्यों न छत पर शीशे और बोतलों के टुकड़े बिछा दिए जाएं ताकि चिड़िया वहां बैठ न सकें। कलाम ने इस सुझाव को ये कहते हुए रिजेक्ट कर दिया कि ऐसा करने से वो जख्मी हो सकती हैं।
  • जब राष्ट्रपति पद के लिए कलाम का नाम फाइनल हुआ था, तो उसके बाद भी वो एक ऐसे स्कूल में गए जहां पर ज्यादातर गरीब घरों के बच्चे पढ़ते थे। 400 बच्चे वहां पर कलाम को सुनने के लिए जुटे थे। प्रोग्राम में बिजली चली गई तो कलाम ने छात्रों से कहा कि वो सभी उन्हें चारों तरफ से घेरकर खड़े हो जाएं, ताकि हर बच्चे तक उनकी आवाज पहुंच सके।
  • राष्ट्रपति बनने के फौरन बाद कलाम ने अपनी सारी बचत और अब तक के वेतन और भत्तों को गांवों में काम करने वाले एक ट्रस्ट को दान कर दिया। उनका कहना था कि राष्ट्रपति बनने और रिटायर होने के बाद भी अब मेरा सारा खर्च सरकार उठाएगी। इसलिए अब मेरी सेविंग के पैसे मेरे किसी काम के नहीं हैं।
  • जो बच्चे राष्ट्रपति भवन में अपनी कविता, पेंटिंग या कोई तोहफा भेजते थे, उन्हें कलाम की तरफ से पर्सनलाइज्ड थैंक्यू कार्ड भेजा जाता था। इस पर उस बच्चे का नाम और दस्तखत खुद कलाम के होते थे।card
  • एक बार IIT-BHU के एक प्रोग्राम में चीफ गेस्ट की तरह शामिल हुए कलाम ने वहां उनके लिए रखी कुर्सी पर बैठने से मना कर दिया था। उनका कहना था कि ये कुर्सी बाकी कुर्सियों से बड़ी है। उन्होंने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर से रिक्वेस्ट किया कि वो बड़ी कुर्सी पर बैठें। लेकिन वाइस चांसलर ने ऐसा करने से मना कर दिया। आखिरकार कलाम के लिए भी उसी साइज की कुर्सी लाई गई, जैसी कुर्सियों पर बाकी लोग बैठे थे।
  • DRDO में काम करने के दौरान एक जूनियर साइंटिस्ट ने कलाम से आधे दिन की छुट्टी मांगी, ताकि वो अपने बेटे को एक प्रदर्शनी घुमाने ले जा सकें। कलाम ने इसकी इजाज़त दे दी। बाद में वो काम में इतने व्यस्त हो गए कि आधे दिन के बाद घर जाना ही भूल गए। शाम को अपराधबोध के साथ जब अपने घर पहुंचे तो पाया कि बेटा घर पर नहीं है। उनकी पत्नी ने बताया कि थोड़ी देर पहले डॉक्टर कलाम आए थे और वो बेटे को लेकर खुद प्रदर्शनी दिखाने गए हैं।
  • कलाम जब राष्ट्रपति थे तो उन्होंने एक बार Yahoo Answers पर एक सवाल पोस्ट किया कि ‘हमें अपनी धरती को आतंकवाद से मुक्त बनाने के लिए क्या करना चाहिए?’ उनकी इस पोस्ट पर लाखों लोगों ने अपनी राय रखी। इनमें श्री श्री रविशंकर, किरन बेदी और लिएंडर पेस जैसी हस्तियां भी शामिल थीं।
  • राष्ट्रपति बनने के बाद एपीजे अब्दुल कलाम जब केरल गए तो वहां राजभवन में उनके सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति की ओर से आमंत्रित दो मेहमान (Presidential Guest) भी शामिल थे। इनमें सड़क के किनारे दुकान चलाने वाला एक मोची और दूसरा एक ढाबा चलाने वाला था। ये दोनों कलाम के बहुत पुराने दोस्त थे।
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जाने-माने वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के साथ एक रॉकेट बनाते हुए डॉक्टर कलाम
  • कलाम ISRO के शुरुआती सालों में उससे जुड़ गए थे। वहां एक चर्च में उनका दफ्तर हुआ करता था। कलाम और बाकी वैज्ञानिकों ने पास के ही एक बीच पर रॉकेट लॉन्च पैड बनाया था। तब कलाम अक्सर साइकिल और बैलगाड़ी से रॉकेट के पार्ट्स लेकर लॉन्च पैड तक आया-जाया करते थे। कलाम उन कुछ गिने-चुने वैज्ञानिकों में शामिल थे, जिनका भारत के लगभग हर स्पेस प्रोग्राम में योगदान रहा है।
  • कहते हैं कि इंदिरा गांधी के वक्त डॉक्टर कलाम ने ही उन्हें एडवांस मिसाइल प्रोग्राम शुरू करने के लिए मनाया था। उस प्रपोजल को कैबिनेट ने नामंजूर कर दिया था, लेकिन इंदिरा गांधी ने चुपके इस प्रोजेक्ट के लिए फंड देना जारी रखा। उस वक्त कलाम की लगन और इंदिरा गांधी की दूरदर्शिता का ही नतीजा है कि भारत के मिसाइल और स्पेस प्रोग्राम की दुनिया भर में धाक है।
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