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बनारस में मोदी के सपने को पूरा करने में दिन-रात जुटी है नगालैंड की एक लड़की

बनारस जहां ज्यादातर लोग घाटों पर गंदगी फैलाने के लिए ही आते हैं, उनके बीच नगालैंड से आई एक लड़की दिन-रात सफाई में जुटी है। प्रधानमंत्री मोदी के गंगा सफाई अभियान से इंस्पायर होकर नगालैंड की तेम्सतुला इमसॉन्ग ने कुछ घाटों पर गंदगी हटाने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे उनके साथ कुछ और नौजवान जुड़ते गए और आज पूरी एक टीम ‘मिशन प्रभुघाट’ के नाम से दो घाटों को साफ-सुथरा बनाने में जुटी है। तेम्सतुला की टीम बिना प्रशासन की मदद के खुद अपने हाथों से सफाई का काम करती है। ये लोग घाटों पर बह रहे नालों को ठीक करते हैं और यहां-वहां बरसों से पड़ी गंदगी को हटाते हैं।

Temsutula Imsong

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तेम्सतुला इमसॉन्ग और उनकी टीम ने प्रभु घाट और बबुआ पांडे घाटों की तो तस्वीर ही बदल दी है। जिन लोगों ने इन घाटों को पहले देखा है वो अब इन्हें पहचान भी नहीं पाते। तेम्सतुला के इस मिशन का नतीजा ये है कि बनारस में लोगों में घाटों और गंगा में गंदगी न फैलाने को लेकर जागरूकता दिखाई देने लगी है।

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तेम्सतुला की टोली में ज्यादातर पढ़ाई-लिखाई कर रहे नौजवान हैं। इन सभी के लिए करियर चाहे जो हो लेकिन गंगा और अपने शहर बनारस को साफ करना एक मिशन है। मिशन की एक साथी दर्शिका शाह हैं जो दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करके इस अभियान में पूरी तरह जुट गई हैं।

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मिशन प्रभुघाट के बारे में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जानकारी मिली तो उन्होंने ट्वीट करके तेम्सतुला और उनके साथियों की तारीफ की थी और पिछले दिनों डिजिटल इंडिया के मौके पर दिल्ली में प्रधानमंत्री ने तेम्सतुला और दर्शिका से मुलाकात भी की थी।

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घाटों की सफाई के लिए चल रहे बड़े-बड़े सरकारी अभियानों से अलग ये छोटी सी कोशिश ज्यादा असरदार दिखाई देती है। आजकल जो लोग इन घाटों पर आते हैं वो ये कहे बिना नहीं रहते कि ‘अरे वाह, ये घाट तो चमक गया है’। यहीं छोटी सी तारीफ तेम्सतुला और उनके साथियों के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा का काम करती है।

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