Ajeet Bharti

प्रिय रवीश जी, पत्रकारिता के आलोकनाथ मत बनिए

प्रिय रवीश जी, आपका ‘आकाश में झूठ की धूल’ वाला लेख पढ़ा। मूड ख़राब हो गया। क्योंकि इस झूठ की धूल में आपने भी तो खूब गर्दा उड़ाया है। सवाल यह कि आप पत्रकारिता के आलोकनाथ क्यों बनना चाह रहे…


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