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27 साल 3 महीने 20 दिन… तिरपाल से निकलकर मंदिर में पहुँचे रामलला

नवरात्र के पहले दिन भगवान रामलला को तिरपाल के मंदिर से निकालकर उनके नए अस्थायी मंदिर में पहुँचा दिया गया है। नए मंदिर में शिफ़्टिंग के बाद अब गर्भगृह से राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रह्म मुहूर्त में रामलला को विधिवत तरीक़े से नए स्थान पर स्थापित किया। नए मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामलला की आरती की। इस दौरान सीएम योगी ने भव्य मंदिर के निर्माण के लिए 11 लाख रुपये का चेक भेंट किया। इससे पहले नए मंदिर के शुद्धिकरण अनुष्ठान के लिए दिल्ली, काशी, मथुरा और प्रयागराज से 24 पंडित आए थे। प्रसिद्ध वैदिक आचार्य डॉक्टर कृतिकांत शर्मा ने सोमवार से ही यह अनुष्ठान शुरू कर दिया था। रामलला को जिस सिंहासन पर विराजमान किया गया है, वो चांदी का बना है और उसका वजन 9.5 किलोग्राम है। यह भी पढ़ें: वेटिकन सिटी और मक्का से भी बड़ा और भव्य होगा भगवान राम का मंदिर

कैसा है भगवान राम का अस्थायी मंदिर

अस्थायी मंदिर हल्की मलेशियन लकड़ी और फाइबर से बनवाया गया है। इसे ख़ास तौर पर ऑर्डर देकर बनवाया गया है। ​फाइबर का ये नया मंदिर 24×17 वर्गफुट के साढ़े तीन फुट ऊंचे चबूतरे पर स्थापित है। शिखर की उंचाई 25 फुट है। इसके चारों तरफ सुरक्षा को लेकर एंगल का मजबूत जालीदार कवच बना है। श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए तीन हिस्से से होकर गुजरना पड़ेगा, जिसकी लंबाई 48 मीटर है। सुरक्षा को लेकर पूरे रास्ते में एलईडी बल्बों से रोशनी का इंतजाम किया गया है। फाइबर मंदिर की दीवारें मलेशिया की ओक लकड़ी की स्ट्रिप्स को जोड़ कर खड़ी की गई हैं। इसके अंदर 4 से 5 लोग बैठकर पूजा कर सकते हैं। इसी के अंदर चांदी के सिंहासन को रखा गया है। ये सिंहासन जयपुर से बनवाया गया है और इसे अयोध्या के राजघराने ने भेंट किया है। अयोध्या राजघराने के राजा विमलेंद्र मोहन मिश्र स्वयं यह सिंहासन लेकर अयोध्या से आए थे। सिंहासन के पिछले हिस्से पर सूर्य देव की आकृति और दो मोर बने हैं। अब तक मूल गर्भगृह के अस्थायी मंडप में रामलला लकड़ी के सिंहासन पर विराजित थे। ​​​नए आसन पर रामलला के साथ तीनों भाई लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न भी हैं। यह भी पढ़ें: केके मुहम्मद, वो शख्स जिसने बाबरी ढांचे के अंदर दबे राम मंदिर को ढूंढ निकाला था

तालाबंदी के नियमों के तहत कार्यक्रम

कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए इस दौरान भीड़ से बचने के भी पूरे इंतज़ाम किए गए थे। सिर्फ़ ज़रूरी साधु-संतों और अधिकारियों को ही मौक़े पर मौजूद रहने को कहा गया था। नए अस्थायी मंदिर में शिफ्टिंग के दौरान सीएम योग के अलावा रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास, ट्रस्ट के सदस्य राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, सदस्य अनिल मिश्रा, ट्रस्ट के महासचिव चपंत राय, दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास और अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी मौजूद थे। पूजा अनुष्ठान से पहले सभी लोगों ने स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देशों का भी पूरी तरह से पालन किया था। यह भी पढ़ें: राम मंदिर के मुक़दमे मेंइतिहासकारों ने हिंदुओं को ऐसे ठगा

योगी ने लंबे संघर्ष को किया याद

इस मौक़े पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा हजारों साल के संतों और हिंदू समाज के संघर्ष के बाद आज यह अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि “भव्य राम मंदिर निर्माण का पहला चरण खत्म होने के साथ मंदिर निर्माण का दूसरा चरण शुरू हो गया है। राम लला नए आसन पर विराजमान हो गए हैं। हम सब उनसे प्रार्थना करते हैं कि कोरोना वायरस के वैश्विक संकट से मुक्ति दिलाएं। देश में इससे निपटने के लिए तीन हफ्ते के लिए लॉकडाउन किया गया है। प्रभु राम की मर्यादा के संदेश का हम सब पालन करते हुए सरकार व डॉक्टरों की गाइडलाइन का कड़ाई से पालन करें।”

(न्यूज़लूज़ टीम)

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